पुस्तक
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दुआएँ तथा किताब व सुन्नत में उल्लेखित झाड़-फूँक द्वारा इलाज
लेखक अल्लाह के अनुग्रह का अभिलाषी ''और सबसे अच्छे नाम अल्लाह ही के हैं। अतः उसे उन्हीं के द्वारा पुकारो और उन लोगों को छोड़ दो, जो उसके नामों के बारे में सीधे रास्ते से हटते हैं। उन्हें शीघ्र ही उसका बदला दिया जाएगा, जो वे किया करते थे।'' सूरा आराफ़ :180. अल्लाह - प्रथम - अंतिम - प्रत्यक्ष - गुप्त - ऊँचा - सबसे ऊँचा
कुछ हराम कार्य, जिन्हें बहुत-से लोगों ने असान समझ लिया है
शैख़ मुहम्मद सालेह अलमुनज्जिद अल्लाह के नाम से (शुरू करता हूँ), जो बड़ा दयालु एवं अति कृपाशील है। भूमिका सारी प्रशंसा केवल अल्लाह के लिए है। हम उसी की तारीफ़ करते हैं, उसी से मदद तलब करते हैं और उसी से माफ़ी चाहते हैं। हम अपने नफ़्सों (आत्माओं) की बुराइयों से तथा अपने बुरे कर्मों से उसकी शरण माँगते हैं। जिसे अल्लाह हिदायत दे उसे कोई गुमराह करने वाला नहीं है और जिसे वह गुमराह करे उसे कोई हिदायत देने वाला नहीं है। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं है, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं है। और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उसके बंदे तथा रसूल हैं।…
इस्लाम के सिद्धांत और उसके मूल आधार
लेखक डॉ. मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन सालेह अस-सुहैम अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ, जो बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है। प्राक्कथन सभी प्रशंसाएँ अल्लाह के लिए हैं। हम उसकी प्रशंसा और गुणगान करते हैं, उसी से सहायता माँगते हैं और उसी से क्षमा याचना करते हैं। हम अपनी आत्मा की बुराइयों और अपने दुष्कर्मों से अल्लाह की शरण में आते हैं। जिसे अल्लाह मार्गदर्शन प्रदान कर दे, उसे कोई पथभ्रष्ट नहीं कर सकता और जिसे वह पथभ्रष्ट कर दे, उसे कोई मार्ग दर्शाने वाला नहीं। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, वह अकेला है और उसका कोई साझी नहीं। तथा मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद उसके बंदे और…
शरीयत की पूर्णता और बिदअत के ख़तरे का बयान
आदरणीय शेख की पुस्तकों की श्रृंखला (8) लेखक: आदरणीय शेख़ अल्लामा मुहम्मद बिन सालेह अल-उसैमीन अल्लाह तआला उनकी तथा उनके माता-पिता और समस्त मुसलमानों की मग़्फ़िरत फ़रमाये शेख़ मुहम्मद बिन सालेह अल-उसैमीन चैरिटेबल फाउंडेशन के प्रकाशनों में से
सौभाग्यशाली जीवन के उपयोगी साधन
शैख अबदुर्रहमान बिन नासिर अस-सादी की “सौभाग्यशाली जीवन के उपयोगी साधन” नामी किताब गहरे ईमानी दृष्टिकोण से वास्तविक सौभाग्य के कारणों का विवेचन करती है; यह पाठक को ईमान, नेक अमल, अल्लाह का ज़िक्र, क़नाअत, अल्लाह की नेमतों पर विचार, इहसान, तवक्कुल, सब्र और मामलों के सही आकलन के माध्यम से दिली इत्मिनान की राह दिखाती है। सुंदर शैली में यह आपके समक्ष ऐसा खाका रख देती है, जो जीवन के उतार-चढ़ाव के बावजूद एक मुतमइन, संतुलित और खुशहाल जीवन की राह प्रशस्त करता है।
तीन मूल सिद्धान्त और उनके प्रमाण
यह किताब उन बुनियादी उसूलों का वर्णन करती है जिनका सीखना हर मुसलमान पर अनिवार्य है: (जो यह हैं) अल्लाह को जानना, इस्लाम धर्म को जानना, और नबी मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को जानना,तथा यह किताब क़ुरआन एवं हदीस के प्रमाणों के आधार पर, ईमान के निर्माण और नेक अमल की राह में इन उसूलों की अहमियत पर ज़ोर देती है।
हिस़्न अल-मुस्लिम (क़ुरआन एवं हदीस की दुआएँ)
इस किताब में क़ुरआन एवं सुन्नत से अज़्कार एकत्र किए गए हैं, ताकि विभिन्न समय और परिस्थितियों में उन्हें दोहराना आसान हो जाए। इसमें जागने, वुज़ू, नमाज़, यात्रा और अन्य अवसरों की दुआएँ शामिल हैं, जो एक मुसलमान को अपनी हिफ़ाज़त करने में मदद करती हैं, ताकि वह अल्लाह की सुरक्षा और संरक्षण में रहे।
शिया के चंद अक़ायद (आस्थाएं)
अल्लाह के नाम से (आरंभ करता हूं), जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है। लेखक : अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद अस-सलफ़ी संक्षिप्त, अनुवाद और प्रकाशन पायनियर्स अनुवाद केंद्र सभी प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए हैं, तथा दया और शांति अवतरित हो सब से प्रतिष्ठित रसूल एवं संदेष्टा हमारे पैगंबर मुहम्मद, उनकी संतान और उनके सभी साथियों पर।
उम्मत के सामान्य लोगों के लिए महत्वपूर्ण पाठ
शैख़ अब्दुल अज़ीज़ बिन बाज़ -रहिमहुल्लाह- की पुस्तक "उम्मत के सामान्य लोगों के लिए महत्वपूर्ण पाठ" एक संक्षिप्त किंतु अत्यंत लाभदायक पुस्तिका है, जिसे इमाम ने आम मुसलमानों के लिए वैज्ञानिक (धार्मिक) पूँजी बनने के उद्देश्य से तैयार किया। इसमें उसूल-ए-दीन (इस्लाम के मूल सिद्धांतों) और उसके स्तंभों—तौहीद, ईमान और इस्लाम— से लेकर पवित्रता (तहारत) और नमाज़ के अहकाम (नियम), इस्लामी आचरण एवं शिष्टाचार, तथा शिर्क और गुनाह के खतरों का बयान, सब कुछ सरल और स्पष्ट शैली में, किताब व सुन्नत से प्रमाणित तौर पर, किया गया है, ताकि हर मुसलमान के लिए सही अक़ीदा और इबादत को सरल और सुलभ बना दिया जाए।
अहले सुन्नत वल-जमाअत का अक़ीदा
लेखक फ़ज़ीलतुश शैख़ अल्लामा मुहम्मद बिन सालेह अल-उसैमीन अल्लाह तआला उनकी तथा उनके माता-पिता और समस्त मुसलमानों की मग़्फ़िरत फ़रमाये * अल्लाह के नाम से (शुरू करता हूँ), जो बड़ा दयालु एवं बेहद दयावान है।
संक्षिप्त इस्लामी अक़ीदा
यह किताब ईमान के मूल सिद्धांतों की व्याख्या करती है, जिनमें अल्लाह, उसके फ़रिश्तों, उसकी किताबों, उसके संदेष्टाओं, अंतिम दिन (परलोक) तथा भली-बुरी तक़दीर पर विश्वास रखना शामिल है। साथ ही किताब उन बुनियादी विषयों को प्रस्तुत करती है जिन पर मुसलमान के लिए विश्वास रखना और उनके अनुसार अमल करना आवश्यक है, और इस बात पर ज़ोर देती है कि इस्लामी अक़ीदे को गहराई से समझ कर अल्लाह से अपने संबंध को मज़बूत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
المنهج لمريد العمرة والحج
كتيب يحتوي على دليل مفصل حول مناسك الحج والعمرة، يشرح بدقة الخطوات والآداب الواجب اتباعها خلال تأدية هذه الشعائر. يبدأ بالتأكيد على أهمية الحج في الإسلام كونه أحد أركان الإسلام الخمسة. ويشدد على ضرورة الإخلاص في النية واتباع سنة النبي محمد صلى الله عليه وسلم في جميع الأفعال والأقوال أثناء تأدية هذه الشعيرة المباركة.
तहारत, नमाज़ और जनाज़े से संबंधित कुछ फिक़्ही अहकाम
शेख अल्लामा मुहम्मद बिन सालेह अल-उसैमीन रहमतुल्लाह अलैहि की किताब "तहारत, नमाज़ और जनाज़े से संबंधित कुछ फिक़्ही अहकाम", किताब और सुन्नत को सामने रख कर, तहारत, नमाज़ और जनाज़े की इबादतों को स्पष्ट रूप से समझाती है। इसका उद्देश्य मुसलमान को नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के तरीक़े के अनुसार अपनी इबादतों को समझ कर अदा करने में सक्षम बनाना है, जिसमें आसानी और पाबंदी का संगम है। यह इखलास और पाबंदी पर जोर देती है ताकि क़ुबूलिय्यत और अल्लाह की क़ुरबत हासिल की जा सके।
स्त्रियों के प्राकृतिक रक्तों से संबंधित पत्रिका
"स्त्रियों के प्राकृतिक रक्तों से संबंधित पत्रिका" नामक पुस्तक, जो महान विद्वान शैख़ मोहम्मद बिन सालेह उसैमीन रहिमहुल्लाह की रचना है, ज्ञान पर आधारित एक ठोस पुस्तक है। इसमें महिलाओं से संबंधित प्राकृतिक रक्तों -हैज़ (माहवारी), इस्तिह़ाज़ा (अति रजस्राव, अत्यार्तव) और निफास (प्रसवोत्तर रक्तस्राव)- का गहराई से अध्ययन किया गया है। यह पुस्तक कुरआन और सुन्नत के आलोक में लिखी गई है और इसमें इन विषयों पर विद्वानों की राय को गहराई और सटीकता के साथ समझाया गया है। इसमें महिलाओं से संबंधित रक्तों के शरई विधानों को स्पष्ट किया गया है और विभिन्न स्थितियों के बीच के बारीक फ़र्क़ को भी समझाया गया है। यह…
दुआ के सद्गुण, शिष्टाचार और वांछित समय
हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है, तथा दया एवं शांति अवतरित हो अल्लाह के रसूल पर। दुआ, अल्लाह की निकटता प्राप्त करने के सबसे महान साधनों में से है। यह बंदे के अपने पालनहार के प्रति अधीनता एवं समर्पण तथा अपने स्वामी के सामने अपनी कमज़ोरी, दरिद्रता और विनय को स्वीकारने का प्रमाण है, और यह कि वह अपने पालनहार की सहायता और संमार्गदर्शन के बिना असहाय है; इसी कारण प्रभुत्वशाली एवं प्रतापवान अल्लाह ने अपने इस कथन में दुआ छोड़ने वाले का चरित्र-चित्रण अहंकार से किया है। फ़रमाया : ''तथा तुम्हारे पालनहार ने कहा है कि मुझसे प्रार्थना करो, मैं तुम्हारी प्रार्थना स्वीकर करूँगा l…
शुद्ध अक़ीदा और उसके विरुद्ध चीजें
लेखक शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम जो, बड़ा दयालु एवं अति कृपावान है। भूमिका सारी प्रशंसा और स्तुति केवल अल्लाह के लिए है, तथा अल्लाह की दया और शांति (दुरूद व सलाम) अवतरित हो अल्लाह के अंतिम संदेष्टा, उनके परिजनों तथा साथियों पर।
किताबुत तौहीद
जो बंदों पर अल्लाह का अधिकार है लेखक शैखुल इस्लाम मुहम्मद बिन अब्दुल वह्हाब 1206 हिजरी तत्वावधान
(नमाज़ के लिए जाने के आदाब)
लेखक : इस्लाम-धर्म के महान ज्ञाता, प्रख्यात विद्वान, इस्लामी जागरण के ध्वजावाहक शैख़ मुहम्मद बिन अब्दुल वह्हाब -रहिमहुल्लाह- इस किताब का संशोधन एवं अल-मकतबा अस-सऊदियह में क्रमांक 86/269 के तहत मौजूद इसकी एक हस्तलिखित प्रति एवं अन्य कई प्रकाशित प्रतियों से तुलनात्मक अध्ययन अब्दुल करीम बिन मुहम्मद अल-लाह़िम , नासिर बिन अब्दुल्लाह अत-तरीम और सुऊद बिन मुहम्मद अल-बिश्र ने किया है। अल्लाह के नाम से (शुरू करता हूँ), जो बड़ा दयालु एवं अति कृपाशील है। (अध्याय : नमाज़ के लिए जाने के आदाब) सुन्नत यह है कि आदमी नमाज़ के लिए वज़ू करके विनम्रतापूर्वक निकले, क्योंकि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम-…
इमाम मुहम्मद बिन अब्दुल वह्हाब का आह्वान तथा जीवन-वृत्त
लेखक : शैख अब्दुल अज़ीज़ बिन अब्दुल्लाह बिन बाज़ समस्त प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है जो समस्त जहानों का पालनहार है, और अल्लाह तआला की असीम कृपा एवं शांति तथा बरकत अवतरित हो उसके बंदे, रसूल और समस्त सृष्टियों में सबसे उत्तम, हमारे स्वामी एवं मार्गदर्शक मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह पर तथा उनके परिवारजनों, सहाबियों और उनके दिखाए हुए पथ के पथिकों पर। तत्पश्चात : ऐ प्रतिष्ठावान भाइयो तथा ऐ प्रिय बेटो! मैं आप सज्जनों के सामने एक संक्षिप्त व्याख्यान प्रस्तुत करने जा रहा हूँ, जिसका उद्देश्य, आपके विचारों को प्रकाशमान करना, वास्तविकताओं को प्रकट करना, अल्लाह और उसके बंदों के लिए शुभचिंतन का दायित्व निभाना है,…
नमाज़ की शर्तें, स्तंभ तथा आवश्यक कार्य
लेखक : प्रकांड इस्लामी विद्वान तथा सुधारक इमाम मुहम्मद बिन अब्दुल बह्हाब (उनपर अल्लाह की कृपा हो) 1115-1206 हिजरी शोधकर्ता, संशोधक एवं इस किताब की हदीसों के संदर्भयुक्त-कर्ता: अल्लाह की दया के मुहताज डॉक्टर सईद बिन वह्फ़ अल- क़हतानी अल्लाह के नाम से (शुरू करता हूँ), जो बड़ा दयालु एवं बेहद कृपालु है।
इस्लाम की श्रेठता
इमाम मुहम्मद बिन अब्दुल वह्हाब अध्याय:इस्लाम को धर्म स्वरूप कबूल करने की अनिवार्यता अल्लाह तआला का फ़रमान है : "जो व्यक्ति इस्लाम के अतिरिक्त कोई अन्य धर्म ढूँढे, उसका धर्म कदापि स्वीकार नहीं किया जाएगा और वह प्रलोक में घाटा उठाने वालों में से होगा।" [1] (सूरा आल-ए-इमरान: आयत संख्या : 85) अल्लाह तआला ने यह भी फ़रमाया है : "और यही धर्म मेरा सीधा मार्ग है। अतः इसी रास्ते पर चलो और दूसरे रास्तों पर न चलो। अन्यथा वह तुम्हें अल्लाह के रास्ते से भटका देंगे।" [1] (सूरा अल-अनआम, आयत संख्या : 153) [1] सूरा आल-ए-इमरान, आयत संख्या : 85 [2] सूरा अल-अनआम, आयत संख्या : 153 मुजाहिद कहते हैं कि इस आयत में…
पवित्र क़ुरआन तथा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत के आलोक में इस्लाम का संक्षिप्त परिचय
इस्लाम यह इस्लाम के संक्षिप्त परिचय पर आधारित, एक अति महत्वपूर्ण पुस्तिका है, जिसमें इस धर्म के अहम उसूलों, शिक्षाओं तथा विशेषताओं का, इस्लाम के दो असली संदर्भों अर्थात क़ुरआन एवं हदीस की रोशनी में, वर्णन किया गया है। यह पुस्तिका परिस्थितियों और हालात से इतर, हर समय और हर स्थान के मुस्लिमों तथा गैर-मुस्लिमों को उनकी ज़ुबानों में संबोधित करती है। (क़ुरआन एवं सुन्नत के तर्कों से सुसज्जित संस्करण) 1- इस्लाम, दुनिया के समस्त लोगों की तरफ अल्लाह का अंतिम एवं अजर अमर पैगाम है, जिसके द्वारा ईश्वरीय धर्मों और संदेशों का समापन कर दिया गया है। इस्लाम, अल्लाह की तरफ से दुनिया के तमाम लोगों की तरफ भेजा…
नव मुस्लिम के लिए संक्षिप्त एवं मुफ़ीद किताब
संकलनकर्ता : मुहम्मद अश-शहरी 1441 हिजरी - 2020 ईस्वी अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है। प्रस्तावना
صفة الوضوء والصلاة (مرئي)
मैं वज़ू कैसे करूँ? क्रमांक आवाज़ 1 अज़ान की आवाज़... 2
इस्लाम में मेरा पहला दिन
शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से, जो बड़ा दयालु एवं अत्यंत दयावान है। प्राक्कथन सभी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने अपने नबी मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को सारे संसारों के लिए रहमत बनाकर भेजा। और मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई पुज्य नहीं है, उसका कोई साझी नहीं है, वह पहले वाले एवं बाद वाले, सब का माबूद व उपास्य है। तथा मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अल्लाह के बंदे एवं उसके रसूल हैं। वह नबियों एवं रसूलों की श्रृंखला की अंतिम कड़ी हैं। क़यामत तक के लिए उनपर दरूद एवं बहुत सारी शांति अवतरित हो। इसके पश्चात् कहना है कि : सभी लोग ख़ुशियों की तलाश में रहते…
सदाचार का प्रतिफल
كتاب جامع لجملة من أحاديث النبي -صلى الله عليه وسلم- الصحيحية في ثواب الأعمال الصالحة كطلب العلم والطهارة والصلاة، وصلاة التطوع، والجمعة والجنائز، والصدقات والصوم والحج والجهاد، وقراءة القرآن، وذكر الرحمن وغيرها.
पवित्र क़ुरआन तथा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत के आलोक में इस्लाम का परिचय प्रस्तुत करने वाली एक संक्षिप्त पुस्तिका
अल्लाह के नाम से (शुरू करता हूँ), जो बड़ा दयालु एवं दयावान है। इस्लाम (तर्क रहित संस्करण) [1] [1] नीचे दी गई वेबसाइट पर इस किताब की एक ऐसी प्रति उपलब्ध है, जिसमें हर मसले पर कुरआन और सुन्नत से तर्क मौजूद हैं : http://islamhouse.com/ar/books/2830071 यह इस्लाम के संक्षिप्त परिचय पर आधारित, एक अति महत्वपूर्ण पुस्तिका है, जिसमें इस धर्म के अहम उसूलों, शिक्षाओं तथा विशेषताओं का, इस्लाम के दो असली संदर्भों अर्थात क़ुरआन एवं हदीस की रोशनी में, वर्णन किया गया है। यह पुस्तिका परिस्थितियों और हालात से इतर, हर समय और हर स्थान के मुस्लिमों तथा गैर-मुस्लिमों को उनकी ज़ुबानों में संबोधित करती है। 1.…
मुसलमान के लिए एक संक्षिप्त एवं लाभकारी पुस्तक
यह पुस्तक इस्लाम धर्म के बुनियादी उसूलों को संक्षिप्त एवं व्यापक रूप में प्रस्तुत करती है, जिसमें पाठकों के लिए सही इबादत की बुनियादी बातों और अल्लाह, उसके फ़रिश्तों, किताबों, रसूलों, अंतिम दिन और भाग्य पर ईमान के अर्थों को स्पष्ट किया गया है। यह पुस्तक इस्लाम की नेमत, अल्लाह की पहचान, उसके गुणों तथा सुंदर नामों की अहमियत को स्पष्ट करने से आरंभ होती है, फिर इस्लाम और ईमान के स्तंभों का उल्लेख करती है और एहसान की अवधारणा तथा मोमिन पर पड़ने वाले उसके प्रभाव की चर्चा करती है। इस पुस्तक की विशेषता यह है कि यह पवित्र क़ुरआन एवं पाक सुन्नत की दलीलों पर आधारित है, जिसकी वजह से मुसलमानों को सरल शैली…
أدلة وجود الله - رسالة الرحمة
अल्लाह के अस्तित्व के प्रमाण भाषाः अरबी इससे पहले कि हम उस पूज्य का निर्धारण करें जो वाकई पूजे जाने के लायक है, हमें इस बात का निर्धारण करना चाहिए कि इस विशाल ब्रह्माण्ड को किसने बनाया है और हम सबको इस बेमिसाल अंदाज़ में और इस असीम रूप से सटीक निपुणता के साथ किसने पैदा किया है? क्योंकि जब हम यह जान लेंगे कि इस ब्राह्मांड को उसकी समस्त कणिकाओं के साथ किसने पैदा किया है, तो हम सब इस बात पर भी सहमत हो जाएँगे कि वही अकेले पूजे जाने का हकदार है, उसका कोई साझी नहीं है। जो लोग जगत-सृष्टा के अस्तित्व को स्वीकारते हैं मगर उसके साथ-साथ दूसरों को भी पूजते हैं, वे वास्तव में अपने इस दृष्टिकोण में एक…
इस्लाम- एक प्राकृतिक धर्म
भाषाः अरबी हर इंसान इस हाल में पैदा होता है कि उसकी आत्मा और दिल में अल्लाह का अंतर्ज्ञान और उसकी तौहीद (एकेश्वरवाद) का बीज अंकुरित होता है। जब वह बड़ा होता है तो कभी उसकी आत्मा में वह बीज अंकुरित ही रहता है और कभी वह अपने माता-पिता के कोरे अनुकरण या दूसरे कारणों से इस्लाम के अलावा दूसरे धर्म में दाखिल हो जाता है। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इस वास्तविकता को स्पष्ट करते हुए फ़रमाया हैः (प्रत्येक पैदा होने वाला शिशु फितरत (इस्लाम) पर जन्म लेता है, फिर उसके माता-पिता उसे यहूदी बना देते हैं या ईसाई बना देते हैं या मजूसी बना देते हैं।) महान इस्लाम धर्म उस प्रकृति से पूरी तरह मेल…
الاسلام والعنصرية
इस्लाम बनाम नस्लवाद भाषाः अरबी इक्कीसवीं शताब्दी ईसवी में विज्ञान, टेक्नोलॉजी और संस्कृति में चौंकाने वाली उन्नति तथा हर जगह मानवाधिकार संगठनों के विस्तार के बावजूद, आज भी नस्लवाद दुनिया के अधिकतम विकसित देशों में मौजूद है। जबकि इस्लाम ने नस्लवाद के सभी रूपों के खिलाफ लड़ाई लड़ी हैः इस्लाम में लोगों के बीच संबंध का आधार, आपसी परिचय और सहयोग है। रंग, भाषा और देश कितने ही भिन्न क्यों न हों, उनके बीच आपसी संबंध का मूल आधार परिचय और सहयोग ही है। अल्लाह तआला ने पवित्र क़ुरआन में फ़रमाया हैः (ऐ मनुष्यो! हमने तुम्हें निस्संदेह एक नर तथा एक नारी से पैदा किया तथा तुम्हारी जातियाँ तथा प्रजातियाँ बना…
इस्लाम के बारे में 5 मिनट में जानें
भाषाः अरबी शायद आप सोच रहे होंगे कि हर जगह फैल रहे इस धर्म रहस्य क्या है? इसकी हकीकत क्या है? वह क्या है जिसके कारण लोग पूरे प्रेम और संतुष्टि के साथ उसकी ओर आकर्षित होते जा रहे हैं? जवाब यह है कि यह अल्लाह का ऐसा धर्म है जो इंसान की प्रकृति से पूरी तरह मेल खाता है और उसकी सभी आध्यात्मिक एवं शारीरिक जरूरतों की पूर्ति करता है। इस्लाम, सम्पूर्ण ब्रह्मांड के रब अल्लाह के सामने पूरी तरह झुक जाने, उसके आदेशों के सामने नतमस्तक हो जाने तथा उसने जिस बात से रोका है, उससे दूर रहने का नाम है। यही वह धर्म है जिसे अल्लाह तआला ने सारे मनुष्यों के लिए, उनके बीच जातियों, रंगों और भाषाओं के अंतर्भेदों को परे…
حاجة البشر إلى رسالة محمد صلى الله عليه وسلم
मानवता को मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ईशदौत्य (पैगम्बरी) की आवश्यकता भाषाः अरबी हे मनुष्य! क्या तुमने अपने-आपसे कभी पूछा है कि तुम्हें किसने पैदा किया है? और तुमको किसलिए पैदा किया गया है? दुनिया की इस जिंदगी में पृथ्वी के ऊपर तुम्हारे अस्तित्व के क्या मायने और उद्देश्य हैं? निस्संदेह, जिसने तुम्हें पैदा किया है, वह अल्लाह है, मूर्तियाँ नहीं हैं, न गाय है, न मसीह हैं, न प्रकृति है और ना ही तुमने खुद को पैदा किया है। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (क्या वे बिना किसी चीज के पैदा किए गए हैं या वे स्वयं ही अपने स्रष्टा हैं?) सूरा अत्-तूर: 35 जब बिना किसी आविष्कारक के उनका वजूद में आना असंभव…
ईसा (अलैहिस्सलाम) इस्लाम की नजर से
भाषा अरबी दुनिया के कोने-कोने में हम उनका नाम सुनते हैं। कुछ लोग उन्हें रब और पूज्य मानते हैं जबकि कुछ लोग उनकी शान में गुस्ताखी करते और उन्हें गालियाँ देते हैं। तो फिर मरियम के पुत्र ईसा मसीह की हकीकत क्या है? क्या वे अल्लाह के बेटे हैं, जैसा कि ईसाई कहते हैं? या वे स्वयं अल्लाह हैं, जैसा कि कुछ ईसाई कहते हैं? या फिर वे व्यभिचार से जन्मे पुत्र हैं, जैसा कि यहूदी कहते हैं? सच्चाई यह है कि मरियम के पुत्र ईसा मसीह (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के नबियों में से एक थे। अल्लाह तआला ने उन्हें चुना और इस्राईल की अवलाद की तरफ, उन्हें एकेशवरवाद तथा सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करने और उसके साथ किसी को शरीक न करने…
मैं मुसलमान कैसे बनूँ?
भाषाः अरबी जो व्यक्ति इस्लाम धर्म में प्रवेश करना चाहे उसे क्या करना चाहिए जिससे वह मुसलमान बन जाए? यह बहुत आसान बात है। इसमें कोई जटिलता नहीं है। उसे अपने और अपने रब के बीच किसी को माध्यम बनाने की कोई ज़रूरत नहीं है, और न ही उसे किसी खास रीति-रिवाज के निभाना की आवश्यकता है, ना ही किसी कार्यक्रम के आयोजन की और ना ही इस प्रकार की किसी और चीज की। उसके लिए बस इतना ही काफी है कि वह दो ऐसे वाक्यों का उच्चारण करे जो इस्लाम के तमाम अर्थों को व्याप्त हैं और वे दो गवाहियाँ हैं। वह कहेगा; "أشهد أن لا إله إلا الله، وأشهد أن محمدًا رسول الله" अर्थात; मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य…
इस्लाम ही क्यों?
भाषाः अरबी सबसे बड़ी विशेषता जिससे मनुष्य शेष सारे जीवों में उत्कृष्ट ठहरता है, वह विवेक है और विवेक एवं बुद्धि का अस्ल काम सोच-विचार करना है। एक गैर-मुस्लिम पूछ सकता हैः मैं इस्लाम धर्म क्यों ग्रहण करूँ? मुझे कौन सी चीज़ अपने धर्म को छोड़ने और इस्लाम धर्म में दाखिल होने के लिए प्रेरित कर सकती है? कौन सी चीज मुझे यह संकल्प लेने पर उत्साहित कर सकती है?
इस्लाम में नारी का स्थान
भाषाः अरबी इसमें कोई शक नहीं कि इस्लाम धर्म ने औरत को बड़ा सम्मान प्रदान किया, उसकी शान बढ़ाई और उसे सम्मान देने वाले को महान पुण्य का भागी घोषित किया है। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने औरतों के साथ सद्व्यवहार करने की वसीयत की है। आपने फ़रमाया हैः (औरतों के बारे में मेरी वसीयत को स्वीकार करो और उनके साथ अच्छा व्यवहार करो।) यहाँ पर हम आपके समक्ष नारी को इस्लाम के द्वारा प्रदान किए गए सम्मान एवं प्रतिष्ठा की कुछ तसवीरें संक्षेप में पेश कर रहे हैंः 1- इस्लाम ने नारी को, धार्मिक ज़िम्मेवारियों में पुरुष के जैसी तथा उसके समान ठहराया है। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने…
सुबह-शाम के अज़कार
अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ, जो बड़ा दयालु एवं अत्यंत दयावान है। (اللَّهُ لا إِلَهَ إِلا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ لا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلا نَوْمٌ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الأَرْضِ مَنْ ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلا بِإِذْنِهِ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلا بِمَا شَاءَ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضَ وَلا يَؤُودُهُ حِفْظُهُمَا وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ), अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हुवल-ह़य्युल क़य्यूमु, ला तअख़ुज़ुहु सिनतूँ व ला नौम, लहु मा फ़िस समावाति व मा फ़िल-अर्ज़, मन ज़ल्लज़ी यशफ़उ इंदहू इल्ला…
क्या क़ुरआन अल्लाह की वाणी है?
भाषा: अरबी बेशक क़ुरआन अल्लाह की वाणी और उसकी प्रकाशना (वह्य) है जिसे उसने अपने नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारा और यह कहते हुए उसकी सुरक्षा की ज़मानत ली: (निस्संदेह हमने ही यह ज़िक्र (क़ुरआन) उतारा है और निस्संदेह हम ही इसकी अवश्य रक्षा करने वाले हैं)। सूरा अल- हिज्र, आयत संख्या- 9 अगर कोई कहे कि मुझे कैसे पता चलेगा कि यह (क़ुरआन) अल्लाह की वाणी है, किसी मानव की वाणी नहीं? इसके जवाब में पाँच ऐसी दलीलें हैं जिनको कोई न्यायप्रिय और समझदार इंसान जान ले तो वह कभी भी इस बात का इंकार नहीं कर सकता कि क़ुरआन वाक़ई अल्लाह की वाणी है: पहली दलील: इंसान का उस जैसी वाणी के लाने में असमर्थ…
वैश्विक धर्म
भाषाः अरबी इस्लाम का संदेश तमाम आसमानी संदेशों का समापन है। इस प्रकार, इस्लाम ही वह धर्म है जिसे अल्लाह तआला ने तमाम लोगों के लिए चुना है। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारे धर्म को सम्पूर्ण कर दिया, तुम पर अपना उपकार पूरा कर दिया और तुम्हारे लिए इस्लाम को धर्म के तौर पर चुन लिया) सूरा अल-माइदा:3 और अल्लाह के रसूल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) नबियों के सिलसिले की अंतिम कड़ी हैं। इसलिए, वह संपूर्ण मानव जाति के लिए दूत हैं। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (आप कह दें कि ऐ लोगो! बेशक मैं तुम सभों की ओर भेजा गया रसूल हूँ) सूरा अल-आराफ:158 अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व…
मुअज़्ज़िन, इमाम, ख़तीब तथा मस्जिदों से संबंधित आदेशों एवं निर्देशों पर आधारित एक संक्षिप्त उपयोगी पुस्तक
यह पुस्तक अज़ान और इक़ामत के अहकाम, नमाज़ की इमामत, जुमे के ख़ुतबे तथा मस्जिद के आदाब (शिष्टाचार) के संबंध में एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इसके अतिरिक्त, यह पुस्तक मुअज़्ज़िनों, इमामों और ख़तीबों के कर्तव्यों पर चर्चा करती है तथा इन कार्यों से संबंधित शरई अहकाम (धार्मिक नियमों) को सीखने के महत्व पर ज़ोर देती है, ताकि उनका सही ढंग से निर्वहन सुनिश्चित किया जा सके। इसमें अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से वर्णित हदीसें भी उनकी व्याख्या के साथ शामिल हैं, ताकि उनकी रोशनी में उपर्युक्त नियमों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
सत्य का सीधा मार्ग
प्रस्तुति :वैज्ञानिक विभाग अंतर्गत; विभिन्न भाषाओं में इस्लामी सामग्री सेवा संगठन 1445 हिजरी भूमिका अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ, जो बड़ा दयालु एवं अत्यंत दयावान है।
मुझे किसने और क्यों पैदा किया?
दुनिया की हर चीज़ पैदा करने वाले के अस्तित्व का प्रमाण प्रस्तुत करती है किसने आकाशों, धरती और उनके बीच मौजूद अनगिनत बड़ी-बड़ी सृष्टियों को पैदा किया है? आकाश एवं धरती की यह सटीक एवं सुदृढ़ व्यवस्था किसने स्थापित की? किसने इन्सान को पैदा किया, उसे सुनने एवं देखने की शक्ति दी, बुद्धि-विवेक दिया और ज्ञान एवं तथ्यों को समझने में सक्षम बनाया? आपके तथा अन्य जीवित प्राणियों के शरीर की प्रणालियों की इस सूक्ष्म कारीगरी की व्याख्या आप कैसे करेंगे? इनको इतने शानदार अंदाज़ में किसने पैदा किया? यह महान ब्रह्माण्ड अपने सूक्ष्म नियतों के साथ इतने लंबे समय से कैसे व्यवस्थित एवं स्थिर रूप में चल रहा है?
इस्लाम अल्लाह के रसूलों (दूतों) का धर्म है
इस्लाम, अल्लाह जो ब्रह्माण्ड का निर्माता और प्रबंधक है उसके प्रति समर्पण, तथा प्रेम एवं श्रद्धा के साथ उसके आगे झुकने का नाम है, इस्लाम का आधार अल्लाह पर ईमान (विश्वास) रखने पर है, और यह आस्था रखना कि वही ख़ालिक़ (रचयिता, सृष्टिकर्ता) है तथा उसके सिवा सभी मख़लूक़ (रचना, सृष्टि) हैं, वह अकेला ही पूजा के योग्य है, उसका कोई साझी नहीं है, उसके अतिरिक्त कोई भी वास्तव में पूजा करने योग्य नहीं है, उसके लिए सबसे सुंदर नाम और उच्चतम गुण हैं, तथा उसके लिए बिना किसी कमी के कमाल -ए- मुत़लक़ (वृहद पूर्णता) है, उसने न तो किसी को जन्म दिया है और न ही उसका जन्म हुआ है और न ही कोई उसके बराबर एवं समान है, और…
इस्लाम सारे संसार के पालनहार का धर्म
अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ, जो बड़ा दयालु एवं अत्यंत दयावान है। तुम्हारा पालनहार कौन है? यह इस संसार का सबसे बड़ा प्रश्न है। यह सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है, जिसका उत्तर हर व्यक्ति को जानना चाहिए। हमारा पालनहार वही है, जिसने आकाशों एवं धरती को पैदा किया, आकाश से बारिश बरसाई एवं उससे फल एवं पौधे उगाए, ताकि हमें तथा उन जानवरों को भोजन प्राप्त हो, जिनसे हम खुराक हासिल करते हैं। उसी ने हमें पैदा किया, हमारे पूर्वजों को पैदा किया और इस संसार की सारी चीज़ों को पैदा किया। उसी ने रात और दिन बनाया। उसी ने रात को सोने और आराम करने तथा दिन को रोज़ी कमाने का समय बनाया। उसी ने सूरज, चाँद, सितारों और…
معلومات وأوصاف التطبيقات في المتاجر
नोबल कुरान विश्वकोश QuranEnc. पवित्र कुरान के अर्थों के विश्वसनीय अनुवाद कई भाषाओं में। आवेदन विवरण दुनिया की भाषाओं में उपलब्ध एक इलेक्ट्रॉनिक संदर्भ, पवित्र कुरान के अर्थों और उसकी व्याख्या के मुफ्त, विश्वसनीय और उन्नत अनुवाद का, अल-रब्वाह आह्वान, मार्गदर्शन तथा सामुदायिक जागरूकता संस्था और भाषाओं में इस्लामिक सामग्री की सेवा करने वाली संस्था की देखरेख में, तैयार किया गया और विकसित किया गया है। अनुप्रयोग सुविधाएँ: उच्च विश्वसनीयता: अहले सुन्नत व जमाअत के यहाँ मान्यता प्राप्त सूत्रों से प्राप्त सटीक मानकों के अनुसार सर्वश्रेष्ठ अनुवादों का चयन करना, फिर उनकी समीक्षा करना और उन्हें विकसित…
إعداد خطيب ماهر
अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ, जो बड़ा दयालु अत्यंत दयावान है हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है। हम उसी की प्रशंसा करते हैं, उसी से सहायता माँगते हैं, उसी से क्षमायाचना करते हैं। हम अपनी आत्मा और अपने कर्मों की बुराइयों से अल्लाह की शरण माँगते हैं। जिसे वह सत्य का मार्ग दिखा दे, उसे कोई पथभ्रष्ट नहीं कर सकता और जिसे वह पथभ्रष्ट कर दे, उसे कोई सत्य का मार्ग दिखा नहीं सकता। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं है और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के बंदे और उसके रसूल हैं। उन पर, उनके परिवारजनों पर, उनके…
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नमाज़ का तरीक़ा
"नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नमाज़ का तरीक़ा" पुस्तक में, सम्माननीय शैख़ अब्दुल अज़ीज़ बिन बाज़ रहिमहुल्लाह ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नमाज़ के तरीक़े को सरल भाषा में और सटीक व सूक्ष्म विधि के साथ संक्षेप में प्रस्तुत किया है। इस किताब में उन्होंने प्रामाणिक साक्ष्यों पर आधारित विवरण दिया है, ताकि यह मुसलमान के लिए उसकी नमाज़ में मार्गदर्शन का साधन बन जाए। उन्होंने इस पुस्तक में वज़ू से लेकर सलाम तक नमाज़ के सभी स्तंभों, सुन्नतों और उसकी संपूर्ण प्रक्रिया को दलील के साथ बयान किया है और इस महानतम इबादत में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के अनुसरण का आह्वान किया है।
हज्ज, उमरा तथा ज़ियारत के अधिकांश मसलों का शोध एवं व्याख्या क़ुरआन एवं हदीस के आलोक में
यह पुस्तक क़ुरआन एवं हदीस के आलोक में हज्ज, उमरा तथा ज़ियारत से संबंधित आदेशों एवं निर्देशों की व्याख्या करती है, और हज्ज तथा उमरा के आवश्यक कार्यों को स्पष्ट करती है, एहराम के दौरान निषेध वस्तुओं को बयान करती है और मस्जिद -ए- नबवी की ज़ियारत के आदाब बताती है तथा इन इबादतों में पाई जाने वाली बिद्अतों से सावधान करती है।
उमरा का संक्षिप्त तरीक़ा और विधि-विधान
सारी प्रशंसा अल्लाह की है, जो समस्त संसार का रब है, तथा दया और शांती (दुरूद व सलाम) अवतरित हो हमारे नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर तथा आपके तमाम परिजनों एवं साथियों पर। सारी प्रशंसा अल्लाह की है, जो सारे संसार का रब है, तथा दया और शांती (दुरूद व सलाम) अवतरित हो हमारे नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर तथा आपके तमाम परिजनों एवं साथियों पर। तत्पश्चात : उमरा और उसके विधि-विधानों से संबंधित यह एक छोटी-सी पुस्तिका है, जिसमें हमने उमरा करने वाले के लिए अधिकांश आवश्यक बातों को स्पष्ट करने का प्रयास किया है। अल्लाह से दुआ है कि इसे अपनी प्रसन्नता की प्राप्ति का विशुद्ध साधन एवं समस्त…
मेरी वसीयत
सारी प्रशंसा अल्लाह की है। दरूद व सलाम उतरे अल्लाह के रसूल पर। इसके बाद अब मूल विषय पर आते हैं। मैं (..........................................................) मेरा आईडी नम्बर .................................. है। मैं अपने पूरे होश व हवास के साथ, जिसे शरीयत ने मद्दे नज़र रखा है, एवं इस बात का ज्ञान रखते हुए कि मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, उसका कोई साझेदार नहीं है, मुहम्मद उसके बंदे और रसूल हैं, ईसा अल्लाह के बंदे, उसके रसूल, उसका शब्द जिसे उसने मरयम तक पहुँचाया था और उसकी ओर से आने वाली एक आत्मा हैं, जन्नत और जहन्नम सत्य है, क़यामत आकर रहेगी और अल्लाह लोगों…
उमरा का तरीक़ा
शैख़ अब्दुल अज़ीज़ बिन बाज़ द्वारा लिखी गई "उमरा का तरीक़ा" नामी यह पुस्तिका स्पष्ट एवं सरल अंदाज़ में हज के दौरान किए जाने वाले कार्यों को बयान करती है। यह पुस्तिका एक तरह से एक व्यवहारिक मार्गदर्शिका है, जो हज के कार्यों को आसानी से संपन्न करने में एक मुसलमान का सहोयग करती है। इसमें प्रत्येक चरण पढ़ी जाने वाली अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से वर्णित अज़कार एवं दुआओं को भी बयान किया गया है।
सारगर्भित दुआएँ[1]
ये कुछ सारगर्भित दुआएँ हैं, जो क़ुरआन करीम में आई हैं या फिर नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से सही तौर पर साबित हैं। इन दुआओं को हर समय और स्थान पर पढ़ा जा सकता है, जिनमें तवाफ़, सई, अरफ़ा और मुज़दलिफ़ा शामिल हैं, लेकिन ये दुआएँ केवल इन्हीं समयों एवं स्थानों के साथ ख़ास नहीं हैं। 1- क़ुरआन से ली गईं दुआएँ ऐ हमारे पालनहार! हमसे स्वीकार कर ले। निःसंदेह तू ही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। तथा हमारी तौबा क़बूल फरमा। निःसंदेह तू बहुत तौबा क़बूल करने वाला, अत्यंत दयावान है। ऐ हमारे पालनहार! हमें दुनिया में भलाई तथा आख़िरत में भी भलाई दे और हमें आग के अज़ाब से बचा। ऐ हमारे पालनहार! हमारी…
ज़कात एवं रोज़े के संबंध में दो संक्षिप्त पुस्तिकाएं
यह पुस्तक ज़कात और रोज़ा —इन दोनों फ़राइज़— पर चर्चा करती है, उनके अहकाम और फ़ायदों को स्पष्ट करती है, साथ ही अल्लाह के अपने बंदों पर हक़ (अधिकारों) की याद दिलाती है। इसमें ज़कात के अहकाम (नियमों) की व्याख्या, ज़कात निकालने योग्य धन के प्रकार, रमज़ान के फ़ज़ाइल (गुणों), रोज़े के अहकाम और उसके आदाब शामिल हैं, और यह सब एक वैज्ञानिक शैली में प्रस्तुत किया गया है जिसमें शरई आधार एवं नैतिक मार्गदर्शन दोनों का समावेश है।
छोटे बच्चों के लिए रमज़ान महीने से संबंधित कुछ प्रश्नोत्तर जो बड़ों के लिए भी आवश्यक हैं
शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा दयालु एवं अत्यंत कृपावान है प्रस्तावना सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमें रमज़ान महीना दिया और उसे शेष महीनों तथा दिनों पर बहुत-सी फ़ज़ीलतें प्रदान कीं। दरूद व सलाम हो मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह, उनके परिजनों और साथियों पर। अब मूल विषय पर आते हैं। रमज़ान महीने से संबंधित कुछ प्रश्नोत्तर प्रस्तुत हैं, जो बच्चों के लिए तैयार किए गए हैं और जो बड़ों के लिए भी ज़रूरी हैं। इनके माध्यम से बताया गया है कि रमज़ान महीने में कौन-कौन से काम ज़रूरी हैं, कौन-कौन से मुसतहब हैं, और रमज़ान महीने के प्रति हमारा रवैया क्या होना चाहिए। अभिभावक बच्चे तथा उसकी आयु को ध्यान…
नास्तिक को एक संक्षिप्त संदेश
यह पुस्तिका नास्तिक के लिए एक संक्षिप्त संदेश है, जो बुद्धि को संबोधित करती है कि ब्रह्मांड की सटीकता और उसकी व्यवस्थित होने की स्थिति संयोग को नकारती है और एक सर्वबुद्धिमान स्रष्टा की ओर संकेत करती है। तो क्या यह तार्किक है कि यह सब कुछ नहीं से आया? अतः अपने हृदय को विचार और चिंतन-मनन के लिए खोलिए, और सत्य की खोज कीजिए, आशा है कि आपको इसतरह एक ऐसा प्रकाश मिल जाए जो आपका मार्गदर्शन करे।
ब्रह्माण्ड की रचना किसने की? मेरी रचना किसने की? और क्यों?
यह पुस्तक ब्रह्माण्ड और मनुष्य की उत्पत्ति पर चर्चा करती है, और यह पुष्टि करती है कि उनका एक महान सृष्टिकर्ता अल्लाह है, जिसने जीवन को नियंत्रित करने वाले नियम निर्धारित किए हैं। यह अल्लाह के गुणों को स्पष्ट करती है और रसूलों तथा आसमानी किताबों पर ईमान की महत्ता को बताती है, और यह भी पुष्टि करती है कि इस्लाम ही वह सच्चा धर्म है जो दुनिया एवं आख़िरत में सच्ची ख़ुशी दिलाता है।
मैं मुसलमान हूँ
इस लेख में इस्लाम की अवधारणा, मुसलमान कौन है, और एक सच्चा मुसलमान कैसे बना जा सकता है, को स्पष्ट किया गया है। इसमें इस्लाम के गुण, कुछ उच्च आदाब और नैतिकताओं, महिलाओं की स्थिति, और क़रीबी, पड़ोसी तथा समाज के अधिकारों का भी उल्लेख किया गया है। यह बताया गया है कि इस्लाम हर अच्छाई की ओर बुलाता है और हर बुराई से रोकता है।
पवित्र क़ुरआन का परिचय
पुस्तक 'पवित्र क़ुरआन का परिचय' बताती है कि पवित्र क़ुरआन अंतिम नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाली अल्लाह की वाणी, एक बेमिसाल चमत्कारिक ग्रंथ, जीवन तथा जीवन चर्या को सुव्यवस्थित करने वाला तथा भलाई का मार्ग दिखाने वाला एवं बुराई से दूर करने वाला विधान है। यह पुस्तक बताती है कि अल्लाह ने पवित्र क़ुरआन को हर प्रकार की विकृति से सुरक्षित रखा है, इसके अर्थों को समझने के लिए अरबी भाषा को सीखने का बड़ा महत्व है और यह दुनिया तथा आख़िरत की ख़ुशियों की प्राप्ति के विषय में एक मार्गदर्शक का भूमिका निभाता है।
इस्लाम एक प्रवृत्तिक, तार्किक एवं कल्याणकारी धर्म है।
यह पुस्तक दर्शाती है कि इस्लाम स्वाभाविक प्रवृत्ति और विवेक के अनुरूप है और दुनिया एवं आख़िरत (लोक-परलोक) में ख़ुशी प्राप्त करने का मार्ग प्रस्तुत करती है। यह स्पष्ट करती है कि सृष्टि का उद्देश्य अल्लाह पर ईमान और केवल उसी एक की इबादत करना है, और यह पुष्टि करती है कि नेक अमल (सदाचार) और ईमान ही लोगों के बीच श्रेष्ठता का आधार हैं।
इस्लाम के रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
पुस्तक "इस्लाम के रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम" में नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के वंश, पालन-पोषण, शुभ विवाह, वह्य के आरंभ और अंतिम संदेश की शुरुआत तक के जीवन का वर्णन है। यह पुस्तक आपकी नुबुव्वत के चमत्कारों और सच्चाई के प्रमाणों को स्पष्ट करती है, और आपके द्वारा लाई गई शरीअत तथा मानव अधिकारों एवं गरिमा की रक्षा में उसकी भूमिका की व्याख्या करती है। साथ ही, यह आपके दुश्मनों के दृष्टिकोण और आपके पक्ष में उनकी गवाहियों को उजागर करते हुए, आपके उन उत्तम सद्गुणों पर भी प्रकाश डालती है, जिन्होंने आपको लोगों के लिए एक आदर्श और सृष्टिकर्ता के तौहीद का प्रचारक बनाया।
उमरा का संक्षिप्त तरीक़ा और विधि-विधान
"उमरा का संक्षिप्त तरीक़ा और विधि-विधान" नामी यह किताब उमरा के तरीक़े, उसके विधि-विधानों और आदाब को सरल अंदाज़ में प्रस्तुत करती है। यह इबादत के क़बूल होने की शर्तों के उल्लेख से शुरू होती है, उमरा के कार्यों को सीखने के महत्व को स्पष्ट करती है, एहराम, तवाफ़, सई से लेकर सर मुंडवाने या बाल छोटे करवाने तक इसके सभी कार्यों को समझाती है, एहराम के दौरान वर्जित कार्यों का विवरण देती है और उमरा के सभी कार्यों का संक्षिप्त और क्रमबद्ध सार प्रस्तुत करती है, ताकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के तरीक़े के अनुसार उमरा करने वालों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका बन सके।
क्या आपने स्वयं अपने आप से कभी पूछा है कि आपको किसने पैदा किया? क्यों पैदा किया? मृत्यु के बाद क्या होगा?
यह पुस्तक अस्तित्व और सृष्टि के प्रश्न को संबोधित करती है, और बुद्धिमत्ता के साथ एक पूर्ण हिकमत और पूर्णता वाले सृष्टिकर्ता के अस्तित्व को प्रमाणित करती है। यह स्पष्ट करती है कि जीवन का उद्देश्य केवल अल्लाह की इबादत करना है, और इस्लाम ही सच्चा और सुरक्षित धर्म है। यह अल्लाह के रसूल मुहम्मद पर ईमान लाने और उनकी शिक्षाओं का पालन करने का आह्वान करती है, शिर्क से चेतावनी देती है और आखिरत में हिसाब और प्रतिफल की पुष्टि करती है।
مصلى الجنائز
"प्रत्येक प्राणी को मौत का स्वाद चखना है।" [सूरा आल-ए-इमरान : 185] नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक जनाज़ा देखा और फरमाया : "आराम पाने वाला और जिससे आराम पाया गया, मोमिन बंदा दुनिया की थकान और तकलीफ से अल्लाह की रहमत की ओर आराम पाता है, और बदकार बंदे से बंदे, देश, पेड़ और जानवर आराम पाते हैं। [सहीह बुख़ारी, हदीस संख्या : 6512] शोक संवेदना अल्लाह आपको सांत्वना दे, आपका दुख दूर करे और आपके मृतक को क्षमा करे। बेशक अल्लाह ही का है जो उसने ले लिया, और उसी का है जो उसने दिया। उसके निकट प्रत्येक वस्तु का समय निर्धारित है। अतः अब आप सब्र करें तथा अल्लाह से प्रतिफल की उम्मीद रखें। (जनाज़े की नमाज़…
अज़ान के शब्दों की व्याख्या
अज़ान के शब्दों की व्याख्या करने वाली यह पुस्तिका ईमान की रोशनी में अज़ान के शब्दों की व्याख्या तथा उनके अक़ीदे से संबंधित और शिक्षाप्रद पहलुओं को उजागर करती है। यह स्पष्ट करती है कि अज़ान केवल नमाज़ के लिए एक पुकार नहीं, बल्कि एकेश्वरवाद और सफलता का एक दैनिक आह्वान है। यह पुस्तिका अज़ान के शब्दों और उनके अर्थों का विस्तार से वर्णन करती है, जिसमें अल्लाह की बड़ाई, एकेश्वरवाद और मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के रसूल होने की गवाही से लेकर नमाज़ और सफलता का आह्वान तथा अंत में अल्लाह की महानता के गुणगान एवं एकेश्वरवाद के साथ समापन तक सब कुछ शामिल है। यह पुस्तिका एक प्रभावशाली अंदाज़ में,…
अज़ान के शब्दों की संक्षिप्त व्याख्या
'अज़ान के शब्दों की व्याख्या का संक्षिप्त संस्करण' दरअसल 'अज़ान के शब्दों की व्याख्या' नामक किताब का एक संक्षिप्त रूप है। यह प्रभावशाली अंदाज़ में अज़ान के शब्दों को ईमानी दृष्टिकोण से समझाती है, उनके अक़ीदे और तर्बियत के पहलुओं को उजागर करती है, तथा अज़ान के शब्दों और उनके अर्थों का विस्तार से वर्णन करती है, जिसमें अल्लाह की महानता, तौह़ीद और रिसालत की गवाही से लेकर नमाज़ और सफलता की दावत, और अंत में तकबीर तथा तौह़ीद के साथ समापन तक सब कुछ शामिल है।