वैश्विक धर्म भाषाः अरबी इस्लाम का संदेश तमाम आसमानी संदेशों का समापन है। इस प्रकार, इस्लाम ही वह धर्म है जिसे अल्लाह तआला ने तमाम लोगों के लिए चुना है। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारे धर्म को सम्पूर्ण कर दिया, तुम पर अपना उपकार पूरा कर दिया और तुम्हारे लिए इस्लाम को धर्म के तौर पर चुन लिया) सूरा अल-माइदा:3 और अल्लाह के रसूल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) नबियों के सिलसिले की अंतिम कड़ी हैं। इसलिए, वह संपूर्ण मानव जाति के लिए दूत हैं। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (आप कह दें कि ऐ लोगो! बेशक मैं तुम सभों की ओर भेजा गया रसूल हूँ) सूरा अल-आराफ:158 अल्लाह के रसूल…
इस्लाम का संदेश तमाम आसमानी संदेशों का समापन है। इस प्रकार, इस्लाम ही वह धर्म है जिसे अल्लाह तआला ने तमाम लोगों के लिए चुना है। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः(आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारे धर्म को सम्पूर्ण कर दिया, तुम पर अपना उपकार पूरा कर दिया और तुम्हारे लिए इस्लाम को धर्म के तौर पर चुन लिया)सूरा अल-माइदा:3
और अल्लाह के रसूल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) नबियों के सिलसिले की अंतिम कड़ी हैं। इसलिए, वह संपूर्ण मानव जाति के लिए दूत हैं। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः(आप कह दें कि ऐ लोगो! बेशक मैं तुम सभों की ओर भेजा गया रसूल हूँ)सूरा अल-आराफ:158अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया है:(मुझे पाँच ऐसी चीज़ें दी गई हैं जो मुझसे पहले किसी को नहीं दी गई थीं, (जिनमें से एक यह है कि) हर नबी को सिर्फ उसकी कौम की तरफ भेजा गया लेकिन मुझे दुनिया की तमाम कौमों की तरफ भेजा गया है...)
मालूम हुआ कि इस्लाम का संदेश मानव समाज की सभी जातियों के लिए है, चाहे वे अरबी हों, बर्बर हों, मंगोल हों, क़ौक़ाज़ी हों, अफ्रीकी हों, अमेरिकी हों या अन्य किसी भी जाति से ताल्लुक रखते हों।
यह हकीकत है कि इस्लाम धर्म ने घमंड और नस्लवाद से जंग करने में बेहतरीन मिसाल क़ायम की है। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने विदाई हज के अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए फ़रमाया थाः(लोगो! तुम्हारा रब एक है और तुम्हारा पिता एक है। सुनो, तक़वा (धर्मपरायणता) के अलावा किसी और आधार पर किसी अरबी को अजमी (जो अरबी न हो) पर, अजमी को अरबी पर, लाल को काले अथवा काले को लाल पर कोई प्रधानता प्राप्त नहीं है)
जब अबू ज़र और बिलाल हब्शी (रज़ियल्लाहु अन्हु) के बीच झगड़ा हुआ तो बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) को अबू ज़र (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने कह दियाःऐ काली औरत के बेटे! इसपर बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से शिकायत कर दी तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अबू ज़र से कहाः ऐ अबू ज़र! क्या तुमने बिलाल को उसकी माँ का नाम लेकर गाली दी है? तुम एक ऐसे आदमी हो जिसमें अब भी जाहिलीयत (इस्लाम से पूर्व अज्ञानता के समय का चरित्र) बाकी है।अर्थात बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु.) को उनकी माँ के रंग का उलाहना देना, अज्ञानता-युग का आचरण है, इस्लामी आचरण नहीं है।
इस्लाम का कोई भी निर्णय या आदेश, चमड़ी के रंग को आधार बनाकर नहीं दिया गया है।
बिलाल हब्शी (रज़ियल्लाहु अन्हु) को, एक काला हब्शी गुलाम होने के बावजूद, उच्चतम कोटि के सहाबा में गिना जाता है। इसीलिए, उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने फ़रमाया थाः"अबू बक्र हमारे आक़ा हैं और उन्होंने हमारे एक अन्य आक़ा को आजाद किया है"।यानी बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) को।
और यह है अबू लह्ब जो कुल के हिसाब से सर्वोत्तम मनुष्य था। वह अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का चचा था और अपने समय का सबसे सुंदर आदमी था, फिर भी जहन्नम में गया क्योंकि वह अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान नहीं लाया।
इस्लाम का संदेश सारे मनुष्यों के लिए है, चाहे वे अरबी भाषी हों, अंग्रेजी भाषी हों, फ्रेंच भाषी हों, उर्दू भाषी हों या दुनिया की कोई अंतर्राष्ट्रीय या क्षेत्रीय भाषा बोलते हों।
इस्लाम का संदेश मानव समाज के लिए समय के हर कालखंड में है। ऐसा नहीं है कि वह केवल नुबूवतकाल तक सीमित था। बल्कि वह रहती दुनिया तक बाकी रहने वाला संदेश है।
और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने यह भी कहा है:(अल्लाह तआला उस व्यक्ति का चेहरा खिला-खिला रखे जिसने मेरी कोई बात (हदीस) सुनी, उसको याद किया और फिर उसे दूसरों तक पहुँचा दिया। कुछ विधानवाहक (हदीस को उस में मौजूद विधान के साथ पहुँचाने वाला) अपने से बड़े विधानविद तक पहुँचाएंगे, और कुछ विधानवाहक वास्तव में विधानविद नहीं होंगे।)
इस्लाम का संदेश हर स्थान के लोगों के लिए है।यही कारण है कि वह हर महाद्वीप में फैला, यहाँ तक कि ऊँची ऊँची इमारतों तक, पहाड़ों की गुफाओं तक, जंगलों और मरुभूमियों के निवासियों तक पहुँच गया। महान अल्लाह का कथन है;(और (कह दो कि) यह क़ुरआन मेरी तरफ वह्य किया गया है ताकि मैं तुम्हें और जिन लोगों तक यह पहुँच सके, सबको उसके ज़रिए डराऊँ)सूरा अल-अन्आम:19यानी हर जगह और हर जमाने के जिस भी आदमी तक क़ुरआन की आवाज़ पहुँचे।
यही कारण है कि सहाबा और ताबिईन जिनके जमाने में सम्पर्क-साधन बिल्कुल प्राथमिक थे और लोगों से सम्पर्क साधने का सबसे तेज माध्यम ऊँट और घोड़े थे उन्होंने इस्लाम की रौशनी हिंद, सिंध, चीन, पूर्वी एशिया, पश्चिमी अफ्रीका और यूरोप के कई भागों में फैला दिया।
और पृथ्वी के अंदर कोई जगह ऐसी बाकी नहीं रहेगी, जहाँ तक इस्लाम न पहुँचे। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का फ़रमान हैः(यह धर्म वहाँ तक ज़रूर पहुँचेगा, जहाँ दिन और रात पहुँचती है। अल्लाह किसी नगर तथा गाँव और देहात तथा रेगिस्तान का कोई घर नहीं छोड़ेगा, जहाँ इस धर्म को दाख़िल न कर दे। इस प्रकार, सम्मानित व्यक्ति को सम्मान मिलेगा और अपमानित व्यक्ति का अपमान होगा। ऐसा सम्मान, जो अल्लाह इस्लाम के आधार पर प्रदान करेगा तथा ऐसा अपमान जिससे अल्लाह कुफ़्र को अपमानित करेगा।)
यानी, ताकि लोगों का एक-दूसरे से परिचय हो और फिर भलाई के कामों में आपसी सहयोग दे सकें।
इस्लामी शरीयत और उसके निर्देश तमाम इंसानों के लिए दुरुस्त हैं, क्योंकि वे तमाम खूबियों जैसे न्याय, करुणा तथा हितों का ध्यान रखना आदि सबको व्याप्त हैं। इसमें ऐसा लचीलापन है जो हर तरह के हालात के दरमियान सामंजस्य बिठा सकता है। वास्तव में इस्लाम कोई कट्टर (कि उस में किसी भी परिवर्तन की अनुमति नहीं) धर्म नहीं है कि जिसकी वजह से लोगों की मसलहतें (हित) अपंग हो जाएँ।
मालूम हुआ कि इस्लामी संदेश हर जमाने, हर जगह और सारे लोगों के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संदेश है जो विवेक और दिल दोनों को अपील करता है, आत्मा और शरीर दोनों को सुधारता है और जिसमें दुनिया एवं आख़िरत दोनों की तमाम मसलहतों का समावेश है।
इस्लाम बनाम नस्लवाद भाषाः अरबी इक्कीसवीं शताब्दी ईसवी में विज्ञान, टेक्नोलॉजी और संस्कृति में चौंकाने वाली उन्नति तथा हर जगह मानवाधिकार संगठनों के विस्तार के बावजूद, आज भी नस्लवाद दुनिया के अधिकतम विकसित देशों में मौजूद है। जबकि इस्लाम ने नस्लवाद के सभी रूपों के खिलाफ लड़ाई लड़ी हैः इस्लाम में लोगों के बीच संबंध का आधार, आपसी परिचय और सहयोग है। रंग, भाषा और देश कितने ही भिन्न क्यों न हों, उनके बीच आपसी संबंध का मूल आधार परिचय और सहयोग ही है। अल्लाह तआला ने पवित्र क़ुरआन में फ़रमाया हैः (ऐ मनुष्यो! हमने तुम्हें निस्संदेह एक नर तथा एक नारी से पैदा किया तथा तुम्हारी जातियाँ तथा प्रजातियाँ बना…
मानवता को मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ईशदौत्य (पैगम्बरी) की आवश्यकता भाषाः अरबी हे मनुष्य! क्या तुमने अपने-आपसे कभी पूछा है कि तुम्हें किसने पैदा किया है? और तुमको किसलिए पैदा किया गया है? दुनिया की इस जिंदगी में पृथ्वी के ऊपर तुम्हारे अस्तित्व के क्या मायने और उद्देश्य हैं? निस्संदेह, जिसने तुम्हें पैदा किया है, वह अल्लाह है, मूर्तियाँ नहीं हैं, न गाय है, न मसीह हैं, न प्रकृति है और ना ही तुमने खुद को पैदा किया है। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (क्या वे बिना किसी चीज के पैदा किए गए हैं या वे स्वयं ही अपने स्रष्टा हैं?) सूरा अत्-तूर: 35 जब बिना किसी आविष्कारक के उनका वजूद में आना असंभव…
इस्लाम, अल्लाह जो ब्रह्माण्ड का निर्माता और प्रबंधक है उसके प्रति समर्पण, तथा प्रेम एवं श्रद्धा के साथ उसके आगे झुकने का नाम है, इस्लाम का आधार अल्लाह पर ईमान (विश्वास) रखने पर है, और यह आस्था रखना कि वही ख़ालिक़ (रचयिता, सृष्टिकर्ता) है तथा उसके सिवा सभी मख़लूक़ (रचना, सृष्टि) हैं, वह अकेला ही पूजा के योग्य है, उसका कोई साझी नहीं है, उसके अतिरिक्त कोई भी वास्तव में पूजा करने योग्य नहीं है, उसके लिए सबसे सुंदर नाम और उच्चतम गुण हैं, तथा उसके लिए बिना किसी कमी के कमाल -ए- मुत़लक़ (वृहद पूर्णता) है, उसने न तो किसी को जन्म दिया है और न ही उसका जन्म हुआ है और न ही कोई उसके बराबर एवं समान है, और…
पवित्र क़ुरआन तथा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत के आलोक में इस्लाम का संक्षिप्त परिचय
63 भाषाएँ
पवित्र क़ुरआन तथा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत के आलोक में इस्लाम का संक्षिप्त परिचय
इस्लाम यह इस्लाम के संक्षिप्त परिचय पर आधारित, एक अति महत्वपूर्ण पुस्तिका है, जिसमें इस धर्म के अहम उसूलों, शिक्षाओं तथा विशेषताओं का, इस्लाम के दो असली संदर्भों अर्थात क़ुरआन एवं हदीस की रोशनी में, वर्णन किया गया है। यह पुस्तिका परिस्थितियों और हालात से इतर, हर समय और हर स्थान के मुस्लिमों तथा गैर-मुस्लिमों को उनकी ज़ुबानों में संबोधित करती है। (क़ुरआन एवं सुन्नत के तर्कों से सुसज्जित संस्करण) 1- इस्लाम, दुनिया के समस्त लोगों की तरफ अल्लाह का अंतिम एवं अजर अमर पैगाम है, जिसके द्वारा ईश्वरीय धर्मों और संदेशों का समापन कर दिया गया है। इस्लाम, अल्लाह की तरफ से दुनिया के तमाम लोगों की तरफ भेजा…