ईसा (अलैहिस्सलाम) इस्लाम की नजर से भाषा अरबी दुनिया के कोने-कोने में हम उनका नाम सुनते हैं। कुछ लोग उन्हें रब और पूज्य मानते हैं जबकि कुछ लोग उनकी शान में गुस्ताखी करते और उन्हें गालियाँ देते हैं। तो फिर मरियम के पुत्र ईसा मसीह की हकीकत क्या है? क्या वे अल्लाह के बेटे हैं, जैसा कि ईसाई कहते हैं? या वे स्वयं अल्लाह हैं, जैसा कि कुछ ईसाई कहते हैं? या फिर वे व्यभिचार से जन्मे पुत्र हैं, जैसा कि यहूदी कहते हैं? सच्चाई यह है कि मरियम के पुत्र ईसा मसीह (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के नबियों में से एक थे। अल्लाह तआला ने उन्हें चुना और इस्राईल की अवलाद की तरफ, उन्हें एकेशवरवाद तथा सिर्फ एक अल्लाह की इबादत…
दुनिया के कोने-कोने में हम उनका नाम सुनते हैं। कुछ लोग उन्हें रब और पूज्य मानते हैं जबकि कुछ लोग उनकी शान में गुस्ताखी करते और उन्हें गालियाँ देते हैं।
तो फिर मरियम के पुत्र ईसा मसीह की हकीकत क्या है?क्या वे अल्लाह के बेटे हैं, जैसा कि ईसाई कहते हैं?या वे स्वयं अल्लाह हैं, जैसा कि कुछ ईसाई कहते हैं?या फिर वे व्यभिचार से जन्मे पुत्र हैं, जैसा कि यहूदी कहते हैं?
सच्चाई यह है कि मरियम के पुत्र ईसा मसीह (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के नबियों में से एक थे। अल्लाह तआला ने उन्हें चुना और इस्राईल की अवलाद की तरफ, उन्हें एकेशवरवाद तथा सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करने और उसके साथ किसी को शरीक न करने का आह्वान देने के लिए भेजा था।
अल्लाह तआला ने उन्हें विशेष रूप से पैदा किया था। वे बिन बाप के माँ के पेट से पैदा हुए थे। उसमें यह हिकमत निहित थी कि अल्लाह तआला हमें अपनी असीम शक्ति दिखाए।अल्लाह ने आदम (अलैहिस्सलाम) को बिन माँ-बाप के पैदा किया, तथा हव्वा को बिन माँ के और ईसा (अलैहिस्सलाम) को बिन बाप के माँ के पेट से, और शेष सारे इंसानों को माँ-बाप दोनों के मेल से पैदा किया है।
उनकी माँ इमरान की बेटी मरियम थीं जो एक ज़ाहिदा (ज़ोहद की विशेषता रखने वाली) आबिदा (उपासक) थीं।उन्होंने खुद को बैतुल मक़्दिस में इबादत के लिए समर्पित कर दिया था। वे मस्जिद की पूर्वी दिशा में बैठ गईं, अपने समुदाय के लोगों से पर्दा कर लिया और सिर्फ अल्लाह की इबादत के लिए लोगों से अलग हो गईं।
फिर अल्लाह तआला ने जिब्रील (अलैहिस्सलाम) को उनके पास भेजा। वे मानव का रूप धारण कर उनके सामने आए तो वे डर गईं और सोचा कि यह आदमी मेरे साथ बुरा काम करने की नीयत से आया है। उन्होंने जिब्रील से कहाः(मैं शरण माँगती हूँ अत्यंत कृपाशील की तुझ से, यदि तुझे अल्लाह का कुछ भी भय हो)सूरा मरियमः 18अर्थात यदि तुम्हारे अंदर अल्लाह का जरा भी डर है तो बुरे इरादे से मेरे पास मत आओ।यह सुनकर फ़रिश्ते ने उन्हें इत्मीनान दिलाते हुए कहाः(मैं तेरे रब का भेजा हुआ हूँ, ताकि तुझे एक पुनीत बालक प्रदान कर दूँ)सूरा मरियमः 19
अर्थात ऐसा बालक प्रदान करने आया हूँ जो पापों से मुक्त होगा और पुण्य तथा भलाई के साथ परवरिश पाएगा।
आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया है:(जिसने गवाही दी कि एक अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, उसका कोई साझी नहीं, बेशक मुहम्मद उसके बन्दे और उसके रसूल हैं, बेशक ईसा अल्लाह के बन्दे और उसके रसूल एवं उसके वह शब्द हैं जिसे उसने उनकी माँ मरियम की ओर डाला तथा वह अल्लाह के पास की आत्मा हैं, निस्संदेह जन्नत सत्य है और जहन्नम भी सत्य है, तो अल्लाह उसे जन्नत के आठ दरवाज़ों में से जिससे चाहेगा उस से प्रवेश देगा)
चूँकि ईसा मसीह (अलैहिस्सलाम) बिन बाप के पैदा किए गए थे, इसलिए ईसाइयों ने यह धारणा बना ली कि वे अल्लाह के बेटे हैं। उनकी इस कुधारणा का खंडन अल्लाह तआला ने अपनी किताब में कायल करने वाली अकली दलीलों से किया है जो इस प्रकार हैंः
मालूम हुआ कि अल्लाह तआला अपने अलावा हर चीज़ से बेनियाज़ है। हर चीज उसकी मोहताज है। आसमानों और ज़मीन में जो कुछ भी है, सब उसी का है तो फिर सृष्टि में से कोई उसका बेटा कैसे हो सकता है जबकि हर चीज उसकी गुलाम और दास है?
वह तो इंसान है जो बेटे का मोहताज है जो बुढ़ापे में उसके साथ रहे या काम में उसका सहायक हो सके या बुढ़ापे में उसका खर्च चलाए या उसकी मौत के बाद उसका नाम जिंदा रख सके।
जबकि अल्लाह तआला तो ऐसी हर चीज से बेनियाज़ है, वह जीवित रहने वाला, अमर है, उसे कदापि मौत नहीं आने वाली है, तो फिर वह किसी बेटे का मोहताज कैसे हो सकता है?
फिर उसका कोई बेटा कैसे हो सकता है जबकि उसकी कोई बीवी ही नहीं है? संतान तो दो संगत चीजों के मिलन से पैदा होती है और अल्लाह तआला की सृष्टि में उसके योग्य और समान कोई वस्तु सिरे से है ही नहीं, क्योंकि वही हर वस्तु का रचयिता है इसीलिए न उसकी कोई बीवी है और न ही संतान। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः(तथा यह कि हमारे रब की महिमा बहुत ऊँची है। उसने न (अपनी) कोई संगिनी (पत्नी) बनाई है और न कोई संतान)सूरा अल-जिन्न: 3
यदि ईसा का बिन बाप के पैदा होना, उनके ईश्वर होने को उचित ठहराता हो तो आदम का, जो माँ-बाप दोनों के बिना पैदा किए गए थे, ईश्वर होना अधिक मान्य होना चाहिए। लेकिन जब वे आपके स्वीकार तथा सहमति के अनुसार ईश्वर नहीं हो सकते हैं तो फिर ईसा का ईश्वर ना होना और अधिक मान्य हो जाता है।
ईसा मसीह (अलैहिस्सलाम) को जिंदा आसमान पर उठा लिया गया। हुआ यह कि जब रूमियों ने उन्हें गिरफ्तार करना चाहा तो अल्लाह तआला ने उन्हीं में से एक व्यक्ति को मसीह का समरूप बना दिया, फिर उन्हें आसमान पर जिंदा उठा लिया गया। इस प्रकार, न उनकी हत्या की जा सकी और न उनको सूली चढ़ाया जा सका, बल्कि उनके हमशक्ल को उनके स्थान पर मार डाला गया। अल्लाह तआला ने फ़रमाया हैः(निस्संदेह, वे उनको नहीं मार सके)(बल्कि अल्लाह ने उन्हें अपनी ओर उठा लिया तथा अल्लाह सदा से हर चीज़ पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है)सूरा अन-निसा: 157-158वे दुनिया के अंतकाल में आसमान से उतरेंगे और मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की शरीयत के अनुसार फैसले करेंगे।
इस्लाम, अल्लाह जो ब्रह्माण्ड का निर्माता और प्रबंधक है उसके प्रति समर्पण, तथा प्रेम एवं श्रद्धा के साथ उसके आगे झुकने का नाम है, इस्लाम का आधार अल्लाह पर ईमान (विश्वास) रखने पर है, और यह आस्था रखना कि वही ख़ालिक़ (रचयिता, सृष्टिकर्ता) है तथा उसके सिवा सभी मख़लूक़ (रचना, सृष्टि) हैं, वह अकेला ही पूजा के योग्य है, उसका कोई साझी नहीं है, उसके अतिरिक्त कोई भी वास्तव में पूजा करने योग्य नहीं है, उसके लिए सबसे सुंदर नाम और उच्चतम गुण हैं, तथा उसके लिए बिना किसी कमी के कमाल -ए- मुत़लक़ (वृहद पूर्णता) है, उसने न तो किसी को जन्म दिया है और न ही उसका जन्म हुआ है और न ही कोई उसके बराबर एवं समान है, और…
भाषाः अरबी सबसे बड़ी विशेषता जिससे मनुष्य शेष सारे जीवों में उत्कृष्ट ठहरता है, वह विवेक है और विवेक एवं बुद्धि का अस्ल काम सोच-विचार करना है। एक गैर-मुस्लिम पूछ सकता हैः मैं इस्लाम धर्म क्यों ग्रहण करूँ? मुझे कौन सी चीज़ अपने धर्म को छोड़ने और इस्लाम धर्म में दाखिल होने के लिए प्रेरित कर सकती है? कौन सी चीज मुझे यह संकल्प लेने पर उत्साहित कर सकती है?
पुस्तक "इस्लाम के रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम" में नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के वंश, पालन-पोषण, शुभ विवाह, वह्य के आरंभ और अंतिम संदेश की शुरुआत तक के जीवन का वर्णन है। यह पुस्तक आपकी नुबुव्वत के चमत्कारों और सच्चाई के प्रमाणों को स्पष्ट करती है, और आपके द्वारा लाई गई शरीअत तथा मानव अधिकारों एवं गरिमा की रक्षा में उसकी भूमिका की व्याख्या करती है। साथ ही, यह आपके दुश्मनों के दृष्टिकोण और आपके पक्ष में उनकी गवाहियों को उजागर करते हुए, आपके उन उत्तम सद्गुणों पर भी प्रकाश डालती है, जिन्होंने आपको लोगों के लिए एक आदर्श और सृष्टिकर्ता के तौहीद का प्रचारक बनाया।
मानवता को मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ईशदौत्य (पैगम्बरी) की आवश्यकता भाषाः अरबी हे मनुष्य! क्या तुमने अपने-आपसे कभी पूछा है कि तुम्हें किसने पैदा किया है? और तुमको किसलिए पैदा किया गया है? दुनिया की इस जिंदगी में पृथ्वी के ऊपर तुम्हारे अस्तित्व के क्या मायने और उद्देश्य हैं? निस्संदेह, जिसने तुम्हें पैदा किया है, वह अल्लाह है, मूर्तियाँ नहीं हैं, न गाय है, न मसीह हैं, न प्रकृति है और ना ही तुमने खुद को पैदा किया है। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (क्या वे बिना किसी चीज के पैदा किए गए हैं या वे स्वयं ही अपने स्रष्टा हैं?) सूरा अत्-तूर: 35 जब बिना किसी आविष्कारक के उनका वजूद में आना असंभव…