كيف أكون مسلمًا؟
كيف أكون مسلمًا؟ لدخول الإسلام، ينطق الشخص بالشهادتين: "أشهد أن لا إله إلا الله، وأشهد أن محمدًا رسول الله"، مع الإيمان بقلبه واتباع أوامرهما، يُستحب له الاغتسال، ثم يتعلم تدريجيًا أركان الإسلام الخمسة (الشهادتان، الصلاة، الزكاة، الصوم، الحج) وأركان الإيمان الستة (الإيمان بالله، ملائكته، كتبه، رسله، اليوم الآخر، القدر)، ويبدأ بتطبيقها في حياته اليومية.
मैं मुसलमान कैसे बनूँ?
भाषाः अरबी
जो व्यक्ति इस्लाम धर्म में प्रवेश करना चाहे उसे क्या करना चाहिए जिससे वह मुसलमान बन जाए?
यह बहुत आसान बात है। इसमें कोई जटिलता नहीं है। उसे अपने और अपने रब के बीच किसी को माध्यम बनाने की कोई ज़रूरत नहीं है, और न ही उसे किसी खास रीति-रिवाज के निभाना की आवश्यकता है, ना ही किसी कार्यक्रम के आयोजन की और ना ही इस प्रकार की किसी और चीज की।
उसके लिए बस इतना ही काफी है कि वह दो ऐसे वाक्यों का उच्चारण करे जो इस्लाम के तमाम अर्थों को व्याप्त हैं और वे दो गवाहियाँ हैं। वह कहेगा; "أشهد أن لا إله إلا الله، وأشهد أن محمدًا رسول الله" अर्थात; मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अल्लाह के रसूल हैं।
(أشهد أن لا إله إلا الله) के मायने हैँः मैं अपने दिल की गहराई से इकरार और स्वीकार करता हूँ और जुबान से कहता हूँ कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई और सत्य पूज्य नहीं है। वही ऐसा पूज्य है जो पूजे जाने का हकदार है। रही बात उन पूज्यों की जिनकी लोग पूजा करते हैं तो वे सारे के सारे निराधार और असत्य हैं। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (यह इसलिए कि अल्लाह ही सत्य है, और जिसे वे अल्लाह के सिवा पुकारते हैं, वह हैं, और अल्लाह ही सबसे ऊँचा, सबसे बड़ा है) सूरा अल- हज्जः 62
और (وأشهد أن محمدًا رسول الله) के मायने हैंः मैं दिल से इकरार और स्वीकार करता हूँ कि मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह क़ुरैशी हाशिमी, एक ऐसे रसूल हैं जिन्हें अल्लाह तआला ने समस्त जिन्नों तथा इंसानों की ओर इसलिए प्रेषित किया ताकि वे उन्हें इस बात का आदेश दें कि वे केवल एक अल्लाह की इबादत करें और किसी को उसका साझी न बनाएं। उनपर ईश्वरीय प्रकाशना के द्वारा क़ुरआन उतारा गया जिसमें इस्लामी विधान का उल्लेख है। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (ऐ नबी! आप कह दें कि ऐ मानव जाति के लोगो! निःसंदेह मैं तुम सब की ओर उस अल्लाह का रसूल हूँ, जो आकाशों तथा पृथ्वी के राज्य का स्वामी है। उसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं। वही जीवन देता और मारता है। अतः तुम अल्लाह पर और उसके रसूल निरक्षर नबी पर ईमान लाओ, जो अल्लाह पर और उसकी सभी वाणियों (पुस्तकों) पर ईमान रखता है और उसका अनुसरण करो, ताकि तुम सीधा मार्ग पाओ) सूरा अल-आराफ:158
इस गवाही से लाजिम हो जाता है कि गवाही देने वाला हर उस बात पर पूर्ण विश्वास करे जिसकी सूचना आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दी है, आपके हर आदेश का पालन करे, आपने जिससे मना किया और चेताया है, उससे दूर रहे, आपकी सुन्नत का अनुपालन करे और उनका पूर्णरूपेण अनुसरण करे।
और इस्लाम कबूल करने वाले को नहाना भी चाहिएः
यह वास्तव में इस्लाम के अति सुंदर आदेशों में से एक है, क्योंकि इसलाम पवित्रता तथा स्वच्छता का धर्म है। इसलिए, इस्लाम कबूल करने वाले को इस्लाम में दाखिल होते समय नहा लेना चाहिए। परन्तु याद रहे कि इस्लाम कबूल करने की प्रक्रिया की सटीकता नहाने पर निर्भर नहीं है। नहाए बिना भी इस्लाम कबूल करने की प्रक्रिया सही होगी लेकिन इतनी बात अवश्य है कि उसके लिए अधिक सम्पूर्ण तथा उत्तम यही है कि वह इस्लाम में दाखिल होने से पहले प्रवेश-स्नान कर ले।
उसे इस्लाम मूलाधारों का ज्ञान प्राप्त करना और उनपर अमल करना चाहिएः
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहा है: (इस्लाम यह है कि आप गवाही दें कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सच्चा पूज्य नहीं है तथा मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व् सल्लम) अल्लाह के दूत (रसूल) हैं, नमाज़ स्थापित करें, जकात अदा करें, रमजान के रोजे रखें और यदि सामर्थ्य हो तो अल्लाह के घर का हज्ज करें)
5- ईमान के मूलाधारों का ज्ञान प्राप्त करेः
तो जान लेना चाहिए कि ईमान के मूलाधार छः हैं: अल्लाह पर ईमान लाना, अल्लाह के फ़रिश्तों पर ईमान लाना, उसकी उतारी हुई पुस्तकोंं पर ईमान लाना, उसके रसूलों पर ईमान लाना, आख़िरत के दिन पर ईमान लाना और भली बुरी तक़दीर (भाग्य) पर ईमान लाना।
उसे जो भी धार्मिक कार्य करना अनिवार्य हो उसके बारे में ज्ञान प्राप्त करे;
इसलिए उसे धीरे-धीरे दिनों के गुजरने के साथ-साथ थोड़ा-थोड़ा करके धर्म का ज्ञान प्राप्त कर लेना चाहिए, चुनांचे इस्लाम के अंतर्गत आने वाले आस्था मामलात शिष्टाचार तथा इस्लाम में वर्जित कामों में से जिनका सीखना उसके लिए आवश्यक है उनमें से अति महत्वपूर्ण को पहले सीखे और फिर महत्पूर्ण को। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया हैः (ज्ञान प्राप्त करना, हर मुसलमान पर अनिवार्य है)
कोड स्कैन करें
अन्य भाषाओं में और भी पैम्फलेट डाउनलोड करने हेतु
इस्लाम के बारे में जानें
मैं मुसलमान कैसे बनूँ?