मैं मुसलमान कैसे बनूँ? भाषाः अरबी जो व्यक्ति इस्लाम धर्म में प्रवेश करना चाहे उसे क्या करना चाहिए जिससे वह मुसलमान बन जाए? यह बहुत आसान बात है। इसमें कोई जटिलता नहीं है। उसे अपने और अपने रब के बीच किसी को माध्यम बनाने की कोई ज़रूरत नहीं है, और न ही उसे किसी खास रीति-रिवाज के निभाना की आवश्यकता है, ना ही किसी कार्यक्रम के आयोजन की और ना ही इस प्रकार की किसी और चीज की। उसके लिए बस इतना ही काफी है कि वह दो ऐसे वाक्यों का उच्चारण करे जो इस्लाम के तमाम अर्थों को व्याप्त हैं और वे दो गवाहियाँ हैं। वह कहेगा; "أشهد أن لا إله إلا الله، وأشهد أن محمدًا رسول الله" अर्थात; मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के…
जो व्यक्ति इस्लाम धर्म में प्रवेश करना चाहे उसे क्या करना चाहिए जिससे वह मुसलमान बन जाए?
यह बहुत आसान बात है। इसमें कोई जटिलता नहीं है। उसे अपने और अपने रब के बीच किसी को माध्यम बनाने की कोई ज़रूरत नहीं है, और न ही उसे किसी खास रीति-रिवाज के निभाना की आवश्यकता है, ना ही किसी कार्यक्रम के आयोजन की और ना ही इस प्रकार की किसी और चीज की।
उसके लिए बस इतना ही काफी है कि वह दो ऐसे वाक्यों का उच्चारण करे जो इस्लाम के तमाम अर्थों को व्याप्त हैं और वे दो गवाहियाँ हैं।वह कहेगा; "أشهد أن لا إله إلا الله، وأشهد أن محمدًا رسول الله" अर्थात; मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अल्लाह के रसूल हैं।
इस गवाही से लाजिम हो जाता है कि गवाही देने वाला हर उस बात पर पूर्ण विश्वास करे जिसकी सूचना आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दी है, आपके हर आदेश का पालन करे, आपने जिससे मना किया और चेताया है, उससे दूर रहे, आपकी सुन्नत का अनुपालन करे और उनका पूर्णरूपेण अनुसरण करे।
और इस्लाम कबूल करने वाले को नहाना भी चाहिएः
यह वास्तव में इस्लाम के अति सुंदर आदेशों में से एक है, क्योंकि इसलाम पवित्रता तथा स्वच्छता का धर्म है। इसलिए, इस्लाम कबूल करने वाले को इस्लाम में दाखिल होते समय नहा लेना चाहिए। परन्तु याद रहे कि इस्लाम कबूल करने की प्रक्रिया की सटीकता नहाने पर निर्भर नहीं है। नहाए बिना भी इस्लाम कबूल करने की प्रक्रिया सही होगी लेकिन इतनी बात अवश्य है कि उसके लिए अधिक सम्पूर्ण तथा उत्तम यही है कि वह इस्लाम में दाखिल होने से पहले प्रवेश-स्नान कर ले।
उसे इस्लाम मूलाधारों का ज्ञान प्राप्त करना और उनपर अमल करना चाहिएः
तो जान लेना चाहिए कि ईमान के मूलाधार छः हैं: अल्लाह पर ईमान लाना, अल्लाह के फ़रिश्तों पर ईमान लाना, उसकी उतारी हुई पुस्तकोंं पर ईमान लाना, उसके रसूलों पर ईमान लाना, आख़िरत के दिन पर ईमान लाना और भली बुरी तक़दीर (भाग्य) पर ईमान लाना।
उसे जो भी धार्मिक कार्य करना अनिवार्य हो उसके बारे में ज्ञान प्राप्त करे;
इसलिए उसे धीरे-धीरे दिनों के गुजरने के साथ-साथ थोड़ा-थोड़ा करके धर्म का ज्ञान प्राप्त कर लेना चाहिए, चुनांचे इस्लाम के अंतर्गत आने वाले आस्था मामलात शिष्टाचार तथा इस्लाम में वर्जित कामों में से जिनका सीखना उसके लिए आवश्यक है उनमें से अति महत्वपूर्ण को पहले सीखे और फिर महत्पूर्ण को। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया हैः(ज्ञान प्राप्त करना, हर मुसलमान पर अनिवार्य है)
यह किताब ईमान के मूल सिद्धांतों की व्याख्या करती है, जिनमें अल्लाह, उसके फ़रिश्तों, उसकी किताबों, उसके संदेष्टाओं, अंतिम दिन (परलोक) तथा भली-बुरी तक़दीर पर विश्वास रखना शामिल है। साथ ही किताब उन बुनियादी विषयों को प्रस्तुत करती है जिन पर मुसलमान के लिए विश्वास रखना और उनके अनुसार अमल करना आवश्यक है, और इस बात पर ज़ोर देती है कि इस्लामी अक़ीदे को गहराई से समझ कर अल्लाह से अपने संबंध को मज़बूत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
लेखक शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम जो, बड़ा दयालु एवं अति कृपावान है। भूमिका सारी प्रशंसा और स्तुति केवल अल्लाह के लिए है, तथा अल्लाह की दया और शांति (दुरूद व सलाम) अवतरित हो अल्लाह के अंतिम संदेष्टा, उनके परिजनों तथा साथियों पर।
इस्लाम, अल्लाह जो ब्रह्माण्ड का निर्माता और प्रबंधक है उसके प्रति समर्पण, तथा प्रेम एवं श्रद्धा के साथ उसके आगे झुकने का नाम है, इस्लाम का आधार अल्लाह पर ईमान (विश्वास) रखने पर है, और यह आस्था रखना कि वही ख़ालिक़ (रचयिता, सृष्टिकर्ता) है तथा उसके सिवा सभी मख़लूक़ (रचना, सृष्टि) हैं, वह अकेला ही पूजा के योग्य है, उसका कोई साझी नहीं है, उसके अतिरिक्त कोई भी वास्तव में पूजा करने योग्य नहीं है, उसके लिए सबसे सुंदर नाम और उच्चतम गुण हैं, तथा उसके लिए बिना किसी कमी के कमाल -ए- मुत़लक़ (वृहद पूर्णता) है, उसने न तो किसी को जन्म दिया है और न ही उसका जन्म हुआ है और न ही कोई उसके बराबर एवं समान है, और…
भाषाः अरबी शायद आप सोच रहे होंगे कि हर जगह फैल रहे इस धर्म रहस्य क्या है? इसकी हकीकत क्या है? वह क्या है जिसके कारण लोग पूरे प्रेम और संतुष्टि के साथ उसकी ओर आकर्षित होते जा रहे हैं? जवाब यह है कि यह अल्लाह का ऐसा धर्म है जो इंसान की प्रकृति से पूरी तरह मेल खाता है और उसकी सभी आध्यात्मिक एवं शारीरिक जरूरतों की पूर्ति करता है। इस्लाम, सम्पूर्ण ब्रह्मांड के रब अल्लाह के सामने पूरी तरह झुक जाने, उसके आदेशों के सामने नतमस्तक हो जाने तथा उसने जिस बात से रोका है, उससे दूर रहने का नाम है। यही वह धर्म है जिसे अल्लाह तआला ने सारे मनुष्यों के लिए, उनके बीच जातियों, रंगों और भाषाओं के अंतर्भेदों को परे…