मानवता को मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ईशदौत्य (पैगम्बरी) की आवश्यकता भाषाः अरबी हे मनुष्य! क्या तुमने अपने-आपसे कभी पूछा है कि तुम्हें किसने पैदा किया है? और तुमको किसलिए पैदा किया गया है? दुनिया की इस जिंदगी में पृथ्वी के ऊपर तुम्हारे अस्तित्व के क्या मायने और उद्देश्य हैं? निस्संदेह, जिसने तुम्हें पैदा किया है, वह अल्लाह है, मूर्तियाँ नहीं हैं, न गाय है, न मसीह हैं, न प्रकृति है और ना ही तुमने खुद को पैदा किया है। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (क्या वे बिना किसी चीज के पैदा किए गए हैं या वे स्वयं ही अपने स्रष्टा हैं?) सूरा अत्-तूर: 35 जब बिना किसी आविष्कारक के उनका वजूद में आना असंभव…
मानवता को मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ईशदौत्य (पैगम्बरी) की आवश्यकता
भाषाः अरबी
हे मनुष्य! क्या तुमने अपने-आपसे कभी पूछा है कि तुम्हें किसने पैदा किया है?और तुमको किसलिए पैदा किया गया है?दुनिया की इस जिंदगी में पृथ्वी के ऊपर तुम्हारे अस्तित्व के क्या मायने और उद्देश्य हैं?
सारे जहानों के रब अल्लाह की तरफ से केवल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ही आह्वानकर्ता हैं, इसलिए अल्लाह को क्या पसंद है और क्या नापसंद, इसे जानने-पहचानने का उन के सिवा कोई और माध्यम है ही नहीं। आपने इसे अपने इस कथन में स्पष्ट कर दिया हैः(ऐ लोगो! हर वह चीज जो तुम्हें जन्नत से करीब और जहन्नम की आग से दूर कर सकती है, मैंने उसे करने का तुम्हें आदेश दे दिया है और हर वह चीज जो तुम्हें जहन्नम की आग से करीब और जन्नत से दूर कर सकती है, मैंने उससे तुम्हें मना कर दिया है)
इंसानों के लिए कोई न कोई ऐसा मार्ग जरूरी है जिसपर वे अपनी ज़िंदगी में चलते हुए अपनी ज़िंदगी और अपने मामलात को सुव्यवस्थित कर सकें और जो भी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की लाई हुई शरीयत और उसके विधानों तथा शिक्षाओं पर चिंतन-मनन करेगा, वह उसे उसकी व्यापकता, करुणा और सटीकता के कारण, एक ऐसा सच्चा चमत्कार पाएगा जो बंदों की समस्त सुविधाओं और उनकी हर जरूरत की पूर्ति का साधन समेटे हुए है।
मिसाल के तौर पर, एक पड़ोसी के साथ दूसरे पड़ोसी के संबंध के बारे में दिए गए मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के निर्देशों पर चिंतन-मनन कर लीजिएः
पड़ोसी के बारे में वसीयत को बयान करते हुए अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया है:(जिब्रील (अलैहिस्सलाम) पड़ोसी के बारे में मुझे लगातार वसीयत करते रहे, यहाँ तक कि मुझे लगने लगा कि वे उसे वारिस बना देंगे)
पड़ोसी को सम्मान देने के बारे में अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया है:(जो अल्लाह एवं आख़िरत के दिन पर विश्वास रखता हो, वह अपने पड़ोसी को सम्मान दे)
पड़ोसी को कष्ट न देने के बारे में आपने फरमाया:(जो अल्लाह एवं आख़िरत के दिन पर विश्वास रखता हो, वह अपने पड़ोसी को कष्ट न दे)
उसकी खबर-खैरियत लेने और यदि वह मोहताज हो तो उसकी मदद करने के बारे में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया हैः(जो तृप्त अवस्था में इस हाल में रात बिताए कि उसका पड़ोसी उसकी बगल में भूखा हो और वह इस बात को जानता भी हो तो (पूर्ण रूप से) वह मुझपर ईमान नहीं लाया)
क्या पृथ्वी के किसी संविधान और मानव संगठन के चार्टर में पड़ोसी के लिए इन मुहम्मदी वसीयतों की तरह का कोई सम्मानसूचक प्रावधान है?
यद्यपि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) शारीरिक तौर पर हमारे साथ नहीं हैं, मगर अपनी हदीसों तथा शिक्षाओं के माध्यम से हमारे साथ हैं। दूसरी तरफ, मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का तरीका सबसे उत्तम तरीका है, इसलिए उनके निर्देशों की ओर लौटना और उनके उत्तम तरीके का अनुपालन करना हमारे लिए अपरिहार्य है।
बेशक मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हर उस व्यक्ति के लिए आचरणीय उच्चता के शिखर पर विराजमान हैं जो उनका अनुसरण करना चाहे।
बेशक वे सच्चाई, अमानतदारी, दानशीलता, बहादुरी, क्षमता रखने के बावजूद क्षमादान करने, लज्जा, पाकदामनी, धैर्य,ज़ोहद (दुनिया को आखिरत की तुलना में महत्व न देना और दुनिया से दिल न लगाना), शांतिप्रियता और हर प्रकार के सदाचरण में मिसाल थे।उनके अनुयाइयों से पहले, उनके दुश्मनों ने इस बात की गवाही दी है। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः(अगर तुम लोग उसका अनुसरण करोगे तो सच्चा मार्ग पा लोगे और रसूल पर बस खुले तौर पर बात पहुंचा देने की जिम्मेदारी है)सूरा अन-नूर: 54
कोड को स्कैन करें
अन्य भाषाओं में और भी पैम्फलेट डाउनलोड करने हेतु
इस्लाम के बारे में जानें
मानवता को मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ईशदौत्य (पैगम्बरी) की आवश्यकता
अल्लाह के अस्तित्व के प्रमाण भाषाः अरबी इससे पहले कि हम उस पूज्य का निर्धारण करें जो वाकई पूजे जाने के लायक है, हमें इस बात का निर्धारण करना चाहिए कि इस विशाल ब्रह्माण्ड को किसने बनाया है और हम सबको इस बेमिसाल अंदाज़ में और इस असीम रूप से सटीक निपुणता के साथ किसने पैदा किया है? क्योंकि जब हम यह जान लेंगे कि इस ब्राह्मांड को उसकी समस्त कणिकाओं के साथ किसने पैदा किया है, तो हम सब इस बात पर भी सहमत हो जाएँगे कि वही अकेले पूजे जाने का हकदार है, उसका कोई साझी नहीं है। जो लोग जगत-सृष्टा के अस्तित्व को स्वीकारते हैं मगर उसके साथ-साथ दूसरों को भी पूजते हैं, वे वास्तव में अपने इस दृष्टिकोण में एक…
भाषाः अरबी इस्लाम का संदेश तमाम आसमानी संदेशों का समापन है। इस प्रकार, इस्लाम ही वह धर्म है जिसे अल्लाह तआला ने तमाम लोगों के लिए चुना है। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारे धर्म को सम्पूर्ण कर दिया, तुम पर अपना उपकार पूरा कर दिया और तुम्हारे लिए इस्लाम को धर्म के तौर पर चुन लिया) सूरा अल-माइदा:3 और अल्लाह के रसूल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) नबियों के सिलसिले की अंतिम कड़ी हैं। इसलिए, वह संपूर्ण मानव जाति के लिए दूत हैं। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (आप कह दें कि ऐ लोगो! बेशक मैं तुम सभों की ओर भेजा गया रसूल हूँ) सूरा अल-आराफ:158 अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व…
पुस्तक "इस्लाम के रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम" में नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के वंश, पालन-पोषण, शुभ विवाह, वह्य के आरंभ और अंतिम संदेश की शुरुआत तक के जीवन का वर्णन है। यह पुस्तक आपकी नुबुव्वत के चमत्कारों और सच्चाई के प्रमाणों को स्पष्ट करती है, और आपके द्वारा लाई गई शरीअत तथा मानव अधिकारों एवं गरिमा की रक्षा में उसकी भूमिका की व्याख्या करती है। साथ ही, यह आपके दुश्मनों के दृष्टिकोण और आपके पक्ष में उनकी गवाहियों को उजागर करते हुए, आपके उन उत्तम सद्गुणों पर भी प्रकाश डालती है, जिन्होंने आपको लोगों के लिए एक आदर्श और सृष्टिकर्ता के तौहीद का प्रचारक बनाया।
दुनिया की हर चीज़ पैदा करने वाले के अस्तित्व का प्रमाण प्रस्तुत करती है किसने आकाशों, धरती और उनके बीच मौजूद अनगिनत बड़ी-बड़ी सृष्टियों को पैदा किया है? आकाश एवं धरती की यह सटीक एवं सुदृढ़ व्यवस्था किसने स्थापित की? किसने इन्सान को पैदा किया, उसे सुनने एवं देखने की शक्ति दी, बुद्धि-विवेक दिया और ज्ञान एवं तथ्यों को समझने में सक्षम बनाया? आपके तथा अन्य जीवित प्राणियों के शरीर की प्रणालियों की इस सूक्ष्म कारीगरी की व्याख्या आप कैसे करेंगे? इनको इतने शानदार अंदाज़ में किसने पैदा किया? यह महान ब्रह्माण्ड अपने सूक्ष्म नियतों के साथ इतने लंबे समय से कैसे व्यवस्थित एवं स्थिर रूप में चल रहा है?