حاجة البشر إلى رسالة محمد صلى الله عليه وسلم
मानवता को मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ईशदौत्य (पैगम्बरी) की आवश्यकता भाषाः अरबी हे मनुष्य! क्या तुमने अपने-आपसे कभी पूछा है कि तुम्हें किसने पैदा किया है? और तुमको किसलिए पैदा किया गया है? दुनिया की इस जिंदगी में पृथ्वी के ऊपर तुम्हारे अस्तित्व के क्या मायने और उद्देश्य हैं? निस्संदेह, जिसने तुम्हें पैदा किया है, वह अल्लाह है, मूर्तियाँ नहीं हैं, न गाय है, न मसीह हैं, न प्रकृति है और ना ही तुमने खुद को पैदा किया है। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (क्या वे बिना किसी चीज के पैदा किए गए हैं या वे स्वयं ही अपने स्रष्टा हैं?) सूरा अत्-तूर: 35 जब बिना किसी आविष्कारक के उनका वजूद में आना असंभव…
मानवता को मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ईशदौत्य (पैगम्बरी) की आवश्यकता
भाषाः अरबी
हे मनुष्य! क्या तुमने अपने-आपसे कभी पूछा है कि तुम्हें किसने पैदा किया है? और तुमको किसलिए पैदा किया गया है? दुनिया की इस जिंदगी में पृथ्वी के ऊपर तुम्हारे अस्तित्व के क्या मायने और उद्देश्य हैं?
निस्संदेह, जिसने तुम्हें पैदा किया है, वह अल्लाह है, मूर्तियाँ नहीं हैं, न गाय है, न मसीह हैं, न प्रकृति है और ना ही तुमने खुद को पैदा किया है। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (क्या वे बिना किसी चीज के पैदा किए गए हैं या वे स्वयं ही अपने स्रष्टा हैं?) सूरा अत्-तूर: 35
जब बिना किसी आविष्कारक के उनका वजूद में आना असंभव है और उनका खुद को पैदा करना भी असंभव है तो इससे साबित हो जाता है कि स्रष्टा केवल अल्लाह है।
बहुत से लोग ईमान (विश्वास) के इन तथ्यों से गाफिल हैं।
वे इस बात से गाफिल हैं कि अल्लाह ही उनका रब और रचनाकार है और उनका माबूद (पूज्य) है उन पर जरूरी है कि केवल उसी की इबादत करें।
बेशक अल्लाह ने ही तुम्हें पैदा किया और तुम्हें रोज़ी दी ताकि तुम बस उसी की उपासना करो और उसके साथ किसी को साझी न बनाओ। महान अल्लाह कहता हैः (और जिन्नों तथा मनुष्यों को मैंने केवल इसलिए पैदा किया है कि वे मेरी इबादत करें) (मैं उनसे रोज़ी नहीं माँगता और न यह चाहता हूँ कि वे मुझे खिलाएँ) सूर अज़-ज़ारियातः 56-57
जब तुम्हें यकीन हो गया कि तुम्हारा स्रष्टा अल्लाह है और उसने तुम्हें अपनी इबादत का आदेश दिया है तो जान लो कि तुम्हें एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो तुम्हारे सामने स्पष्ट करे कि तुम अपने रब की इबादत कैसे करोगे और उसको किस तरह प्रसन्न करोगे। इसीलिए, अल्लाह तआला ने अपने अंतिम दूत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को तुम्हारे लिए प्रेषित किया। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (ऐ नबी! आप कह दें कि ऐ मानव जाति के लोगो! निःसंदेह मैं तुम सब की ओर उस अल्लाह का रसूल हूँ, जिसकी बादशाहत आकाशों तथा धरती में है। उसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं। वही जीवन देता और मारता है। अतः तुम अल्लाह पर और उसके रसूल निरक्षर नबी पर ईमान लाओ, जो अल्लाह पर और उसकी सभी वाणियों (पुस्तकों) पर ईमान रखता है और उसका अनुसरण करो, ताकि तुम सीधा मार्ग पाओ) सूरा अल-आराफ:158
मनुष्यों को एक ऐसे संदेष्टा की जरूरत है जो उन्हें अच्छे ढंग और विवेकशीलता के साथ उनके रब की ओर बुलाए ताकि उनके दिल में (इसलाम के लिए) नफ़रत न पैदा हो। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (ऐ नबी! आप उन्हें अपने रब के मार्ग (इस्लाम) की ओर हिकमत तथा सदुपदेश के साथ बुलाएँ और उनसे ऐसे ढंग से वाद-विवाद करें, जो सबसे उत्तम है। निःसंदेह आपका रब उसे सबसे अधिक जानने वाला है, जो उसके मार्ग से भटक गया और वही सीधे मार्ग पर चलने वालों को भी अधिक जानने वाला है) सूरा अन-नह़्लः 125
सारे जहानों के रब अल्लाह की तरफ से केवल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ही आह्वानकर्ता हैं, इसलिए अल्लाह को क्या पसंद है और क्या नापसंद, इसे जानने-पहचानने का उन के सिवा कोई और माध्यम है ही नहीं। आपने इसे अपने इस कथन में स्पष्ट कर दिया हैः (ऐ लोगो! हर वह चीज जो तुम्हें जन्नत से करीब और जहन्नम की आग से दूर कर सकती है, मैंने उसे करने का तुम्हें आदेश दे दिया है और हर वह चीज जो तुम्हें जहन्नम की आग से करीब और जन्नत से दूर कर सकती है, मैंने उससे तुम्हें मना कर दिया है)
इंसानों के लिए कोई न कोई ऐसा मार्ग जरूरी है जिसपर वे अपनी ज़िंदगी में चलते हुए अपनी ज़िंदगी और अपने मामलात को सुव्यवस्थित कर सकें और जो भी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की लाई हुई शरीयत और उसके विधानों तथा शिक्षाओं पर चिंतन-मनन करेगा, वह उसे उसकी व्यापकता, करुणा और सटीकता के कारण, एक ऐसा सच्चा चमत्कार पाएगा जो बंदों की समस्त सुविधाओं और उनकी हर जरूरत की पूर्ति का साधन समेटे हुए है।
मिसाल के तौर पर, एक पड़ोसी के साथ दूसरे पड़ोसी के संबंध के बारे में दिए गए मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के निर्देशों पर चिंतन-मनन कर लीजिएः
पड़ोसी के बारे में वसीयत को बयान करते हुए अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया है: (जिब्रील (अलैहिस्सलाम) पड़ोसी के बारे में मुझे लगातार वसीयत करते रहे, यहाँ तक कि मुझे लगने लगा कि वे उसे वारिस बना देंगे)
पड़ोसी को सम्मान देने के बारे में अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया है: (जो अल्लाह एवं आख़िरत के दिन पर विश्वास रखता हो, वह अपने पड़ोसी को सम्मान दे)
पड़ोसी को कष्ट न देने के बारे में आपने फरमाया: (जो अल्लाह एवं आख़िरत के दिन पर विश्वास रखता हो, वह अपने पड़ोसी को कष्ट न दे)
उसकी खबर-खैरियत लेने और यदि वह मोहताज हो तो उसकी मदद करने के बारे में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया हैः (जो तृप्त अवस्था में इस हाल में रात बिताए कि उसका पड़ोसी उसकी बगल में भूखा हो और वह इस बात को जानता भी हो तो (पूर्ण रूप से) वह मुझपर ईमान नहीं लाया)
क्या पृथ्वी के किसी संविधान और मानव संगठन के चार्टर में पड़ोसी के लिए इन मुहम्मदी वसीयतों की तरह का कोई सम्मानसूचक प्रावधान है?
सारे इंसान अपने जैसे एक ऐसे इंसान के जरूरतमंद हैं जो उनके लिए आदर्श बन सके और वे उसके कर्मों की तरफ देखते हुए, सत्कर्मों में उसका अनुसरण करें और उन्हें पुण्य के कामों का प्रोत्साहन मिले और जाहिर है कि अल्लाह के नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पूरी मानवता के लिए हर युग में अद्वितीय आदर्श हैं। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (निःसंदेह तुम्हारे लिए अल्लाह के रसूल में उत्तम आदर्श है। उसके लिए, जो अल्लाह और अंतिम दिन की आशा रखता हो, तथा अल्लाह को अत्यधिक याद करता हो)। सूरा अल-अहज़ाब: 21
यद्यपि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) शारीरिक तौर पर हमारे साथ नहीं हैं, मगर अपनी हदीसों तथा शिक्षाओं के माध्यम से हमारे साथ हैं। दूसरी तरफ, मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का तरीका सबसे उत्तम तरीका है, इसलिए उनके निर्देशों की ओर लौटना और उनके उत्तम तरीके का अनुपालन करना हमारे लिए अपरिहार्य है।
बेशक मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हर उस व्यक्ति के लिए आचरणीय उच्चता के शिखर पर विराजमान हैं जो उनका अनुसरण करना चाहे।
बेशक वे सच्चाई, अमानतदारी, दानशीलता, बहादुरी, क्षमता रखने के बावजूद क्षमादान करने, लज्जा, पाकदामनी, धैर्य,ज़ोहद (दुनिया को आखिरत की तुलना में महत्व न देना और दुनिया से दिल न लगाना), शांतिप्रियता और हर प्रकार के सदाचरण में मिसाल थे। उनके अनुयाइयों से पहले, उनके दुश्मनों ने इस बात की गवाही दी है। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः (अगर तुम लोग उसका अनुसरण करोगे तो सच्चा मार्ग पा लोगे और रसूल पर बस खुले तौर पर बात पहुंचा देने की जिम्मेदारी है) सूरा अन-नूर: 54
कोड को स्कैन करें
अन्य भाषाओं में और भी पैम्फलेट डाउनलोड करने हेतु
इस्लाम के बारे में जानें
मानवता को मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ईशदौत्य (पैगम्बरी) की आवश्यकता