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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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أبو موسى8 أبو موسى الأشعري7 النعمان بن بشير6 عبد الله بن عمرو بن العاص6 علي6 أبو ذر5 ‌أبي هريرة5 حذيفة5 عقبة بن عامر5 معاذ بن جبل5 ‌ابن عباس4 أبو الدرداء4 جرير بن عبد الله4 أبو بكرة3 أبو قتادة3 أبو مسعود3 أبو أمامة2 أبو أيوب الأنصاري2 أبو هريرة قال2 أسامة بن زيد2 البراء2 العباس بن عبد المطلب2 المقدام بن معدي كرب2 النبي صلى الله عليه وسلم قال2 النواس بن سمعان الأنصاري2 أم عطية2 بريدة2 تميم الداري2 ثوبان2 سعد2 سعد بن أبي وقاص2 سهل بن سعد2 شداد بن أوس2 صهيب2 ‌عائشة2 عبادة بن الصامت2 عبد الله بن بسر2 عثمان2 عقبة بن عامر الجهني2 عمران بن حصين2 أبان بن عثمان قال1 إبراهيم النخعي عن همام بن الحارث قال1 ‌ابن أبي أوفى1 ابن أبي مليكة1 ‌ابن عمر1 أبو الحوراء السعدي قال1 أبو العباس سهل بن سعد الساعدي1 أبو الهياج الأسدي قال1 أبو أمامة الباهلي1 أبو أمامة قال1 أبو أيوب1 أبو برزة الأسلمي1 أبو بشير الأنصاري1 أبو بكر الصديق1 أبو بن كعب1 أبو ثعلبة الخشني جرثوم بن ناشر1 أبو حازم بن دينار1 أبو حمزة أنس بن مالك1 أبو رقية تميم بن أوس الداري1 أبو زهير عمارة بن رؤيبة1 أبو سعيد1 أبو سعيد الخدري قال1 أبو سعيد الخدري وأبي هريرة1 أبو سعيد الخدري وعن أبي هريرة1 أبو سعيد سعد بن مالك بن سنان الخدري1 أبو صرمة1 أبو طلحة1 أبو عبد الرحمن السلمي رحمه الله قال1 أبو عبد الرحمن عبد الله بن عمر بن الخطاب1 أبو عبد الله النعمان بن بشير1 أبو عبد الله جابر بن عبد الله الأنصاري1 أبو عبس عبد الرحمن بن جبر1 أبو عمرو- وقيل1 أبو مالك الأشعري1 أبو مالك الحارث بن عاصم الأشعري1 أبو محمد عبد الله بن عمرو بن العاص1 أبو مرثد الغنوي1 أبو مسعود الأنصاري1 أبو مسعود عقبة بن عمرو الأنصاري البدري1 أبو نجيح العرباض بن سارية1 أبو هريرة رضي لله عنه قال1 أبو هريرة عبد الرحمن بن صخر1 أبو واقد الليثي1 أبو يعلى شداد بن أوس1 ‌أبي الزبير قال1 ‌أبي بن كعب1 ‌أبي حميد أو عن ‌أبي أسيد قال1 ‌أبي قتادة السلمي1 أبيه أبي موسى الأشعري1 أبيه قال1 أسماء بنت أبي بكر1 البراء بن عازب1 الحسين بن علي بن أبي طالب1 ‌الزبير بن العوام قال1 العرباض بن سارية1 المغيرة1 المقداد بن عمرو الكندي1 المقدام بن معديكرب1 النواس بن سمعان1 أم المؤمنين أم عبد الله عائشة1 أم حبيبة1 أم سلمة أم المؤمنين1 أم قيس بنت محصن1 أمير المؤمنين أبي حفص عمر بن الخطاب1 ‌أنس بن مالك1 بريدة بن الحصيب1 جابر بن سمرة1 جبير بن مطعم1 جرير1 جندب1 جندب بن عبد الله1 جندب بن عبد الله القسري1 حارثة بن وهب الخزاعي1 ‌حطان بن عبد الله الرقاشي قال1 حكيم بن حزام1 خريم بن فاتك1 خولة الأنصارية1 خولة بنت حكيم السلمية قالت1 رسول الله صلى الله عليه وسلم أنه قال1 رسول الله صلى الله عليه وسلم قال1 زر بن حبيش قال1 زياد بن لبيد1 زيد بن خالد1 زيد بن خالد الجهني1 زينب بنت جحش1 سالم بن أبي الجعد قال1 سعد بن عبادة1 سفيان بن عبد الله الثقفي1 سفينة1 سلمة بن الأكوع1 سليمان بن صرد1 سمرة بن جندب1 سمرة بن جندب والمغيرة بن شعبة1 سهل بن حنيف1 سهل بن معاذ بن أنس عن أبيه قال1 شريح بن هانئ قال1 صفوان بن محرز قال1 طارق بن أشيم الأشجعي1 طاوس أنه قال1 طلحة بن عبيد الله1 عائشة وعبد الله بن عباس1 عبادة1 عبد الرحمن بن أبي ليلى قال1 عبد الرحمن بن سمرة1 عبد الله بن الشخير1 عبد الله بن خبيب1 ‌عبد الله بن زيد1 عبد الله بن سلام1 ‌عبد الله بن عمرو بن العاص1 عبد الله بن مالك ابن بحينة1 عبد الله بن مسعود قال1 عبد الله بن مغفل1 عبد الله بن يزيد الخطمي قال1 عبيد الله بن عدي بن الخيار قال1 عثمان بن أبي العاص1 عثمان بن أبي العاص الثقفي1 عثمان بن عفان1 عدي بن حاتم1 عرفجة1 عكرمة1 علي بن أبي طالب1 علي قال1 عمار بن ياسر1 عمر1 عمر بن أبي سلمة1 عمرو بن سليم الأنصاري قال1 عمرو بن شعيب عن أبيه عن جده قال1 عمرو بن عامر عن ‌أنس بن مالك قال1 ‌قتادة رحمه الله قال1 قتادة قال1 قيس بن عاصم1 كعب بن عجرة1 مالك بن أوس بن الحدثان أنه قال1 ‌محمود بن لبيد1 محمود بن لبيد1 مطر بن عكامس1 معاوية1 معاوية القشيري1 معدان بن أبي طلحة اليعمري قال1 معقل بن يسار المزني1 ميمونة أم المؤمنين1 وائل الحضرمي قال1 وائل بن حجر1 وابصة1 ‌وراد كاتب المغيرة بن شعبة قال1 يحيى بن عمارة المازني قال1
"अगर तुम अल्लाह पर वैसा ही भरोसा करने लगो, जैसा भरोसा होना चाहिए, तो वह तुम्हें उसी तरह रोज़ी दे, जैसे चिड़ियों को रोज़ी देता है; वह सुबह को खाली पेट निकलती हैं और शाम को पेट भरकर लौटती हैं।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को इमाम अह़मद, तिर्मिज़ी, नसई, इब्न-ए-माजह तथा इब्न-ए-ह़िब्बान ने अपनी स़ह़ीह़ में एवं ह़ाकिम ने रिवायत किया है
“नेकी उत्तम आचरण है, तथा गुनाह वह है जो तुम्हारे हृदय में खटकता रहे और तुम यह नापसंद करो कि लोग उसे जानें।”
स़ह़ीह़ पहली ह़दीस़ मुस्लिम ने और दूसरी ह़दीस़ अह़मद तथा दारिमी ने रिवायत की है
नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनको यमन की ओर भेजा और उन्होंने आपसे कुछ पीने की चीज़ों के बारे में पूछा जो वहाँ बनाई जाती थीं, तो आपने फ़रमाया : “वह क्या हैं?” उन्होंने कहा : बित्अ तथा मिज़्र। (बाद में) अबू बुरदा से इन दोनों शब्दों का अर्थ पूछा गया, तो उन्होंने फ़रमाया : बित्अ से मुराद शहद से बनने वाली नबीज़ और मिज़्र से मुराद जौ से बनने वाली नबीज़ है। चुनांचे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “हर नशे वाली वस्तु हराम है।” इस हदीस को इमाम बुख़ारी ने रिवायत किया है।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"तेरी ज़बान हमेशा अल्लाह के ज़िक्र से तर रहे।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अह़मद, तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और इब्न-ए-ह़िब्बान ने रिवायत किया है
“चार बातें ऐसी हैं कि जिस व्यक्ति के अंदर यह बातें होंगी, वह मुनाफ़िक़ होगा तथा यदि उसके अंदर उनमें से कोई एक बात होगी, तो उसके अंदर निफ़ाक़ की एक विशेषता होगी, यहाँ तक कि उसे छोड़ दे; जब बात करे तो झूठ बोले, जब वादा करे तो तोड़ दे, जब किसी से झगड़ा करे तो गाली बके और जब वचन दे तो धोखा दे।”
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
जब अल्लाह ने जन्नत एवं जहन्नम को पैदा किया, तो जिबरील अलैहिस्सलाम को जन्नत की ओर भेजा और फ़रमाया : जन्नत को और जन्नत के अंदर जन्नत वासियों के लिए मैंने जो कुछ तैयार किया है, उसे देख आओ। चुनांचे जिबरील ने जन्नत को देखा, वापस आए और कहा : तेरी प्रतिष्ठा की क़सम, जन्नत के बारे में जो भी सुनेगा, वह उसमें दाखिल हो ही जाएगा। चुनांचे अल्लाह ने आदेश दिया और उसे अप्रिय वस्तुओं से घेर दिया गया। इसके बाद फिर जिबरील से कहा : जन्नत की ओर जाओ और उसे तथा उसके अंदर जन्नत वासियों के लिए मैंने जो कुछ तैयार किया है, उसे देख आओ। इस बार देखा तो पाया कि उसे अप्रिय वस्तुओं से घेर दिया गया है। अतः उन्होंने कहा : तेरी प्रतिष्ठा की क़सम, मुझे इस बात का डर लग रहा है कि इसमें कोई दाख़िल ही नहीं हो सकेगा। इसके बाद अल्लाह ने उनसे कहा : जाओ और जहन्नम को तथा उसके अंदर मैंने जहन्नम वासियों के लिए जो कुछ तैयार किया है, उसे देख आओ। चुनांचे उन्होंने देखा तो पाया कि जहन्नम का एक भाग दूसरे भाग पर चढ़े जा रहा है। अतः वह लौट आए और बोले : तेरी प्रतिष्ठा की क़सम, उसमें कोई दाख़िल ही नहीं होगा। चुनांचे अल्लाह ने आदेश दिया और उसे आकांक्षाओं से घेर दिया गया। इसके बाद अल्लाह ने कहा : दोबारा जाओ और उसे देख लो। उन्होंने इस बार देखा तो पाया कि उसे आकांक्षाओं से भर दिया गया है। अतः वापस हुए और बोले : तेरी प्रतिष्ठा की क़सम, मुझे इस बात का डर है कि उसमें कोई दाखिल होने से बच ही नहीं सकेगा।"
ह़सन इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और नसई ने रिवायत किया है
"जिसने किसी मोमिन से दुनिया की परेशानियों में से कोई परेशानी दूर की, अल्लाह उससे क़यामत के दिन की परेशानियों में से किसी परेशानी को दूर करेगा। जिसने तंगी में पड़े हुए किसी व्यक्ति के साथ आसानी बरती, अल्लाह दुनिया एवं आख़िरत में उसके साथ आसानी करेगा। जिसने किसी मुसलमान की कमी एवं अवगुण को छुपाया, अल्लाह दुनिया और आख़िरत में उसके अवगुण एवं कमियों को छुपाएगा। अल्लाह अपने बंदे की मदद में रहता है, जब तक बंदा अपने भाई की मदद में रहता है। जो ज्ञान अर्जित करने के लिए किसी मार्ग पर चलता है, अल्लाह इसके बदले में उसके लिए जन्नत का मार्ग आसान कर देता है। जब कुछ लोग अल्लाह के किसी घर में एकत्र होकर अल्लाह की किताब की तिलावत हैं और उसे आपस में समझने एवं समझाने का कार्य करते हैं, तो उनपर शांति अवतरित होती है, उन्हें अल्लाह की कृपा ढाँप लेती है, फ़रिश्ते घेरे रहते हैं और अल्लाह उनकी चर्चा उनके बीच करता है, जो उसके पास हैं (अर्फ़थात: रिश्तों के सामने)। जिसका कर्म उसे पीछे छोड़ दे, उसका कुल उसे आगे नहीं ले जा सकता।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"आदमी का जमात के साथ नमाज़ पढ़ना बाज़ार या घर में नमाज़ पढ़ने की तुलना में (पुण्य के मामले में) बीस से अधिक दर्जा बढ़ा हुआ होता है। इसका कारण यह है कि जब तुममें से कोई अच्छी तरह वज़ू करता है, फिर नमाज़ के इरादे से मस्जिद आता है और नमाज़ के सिवा कोई चीज़ उसे घर से नहीं निकालती, तो मस्जिद पहुँचने तक वह जो भी क़दम उठाता है, उसके बदले में उसका एक दर्जा ऊँचा होता है और एक गुनाह मिटाया जाता है। फिर जब मस्जिद में प्रवेश करता है तो जब तक नमाज़ उसे रोके रखती है, वह नमाज़ में होता है। तथा फ़रिश्ते तुममें से किसी के लिए रहमत की दुआ करते रहते हैं, जब तक वह उस जगह में होता है, जहाँ नमाज़ पढ़ी है। वे कहते रहते हैं : ऐ अल्लाह! इसपर दया कर, ऐ अल्लाह! इसे क्षमा कर दे और ऐ अल्लाह! इसकी तौबा कबूल कर। यह सिलसिला उस समय तक जारी रहता है, जब तक वहाँ किसी को कष्ट न दे, जब तक वहाँ उसका वज़ू टूट न जाए।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है