इस्लाम- एक प्राकृतिक धर्म भाषाः अरबी हर इंसान इस हाल में पैदा होता है कि उसकी आत्मा और दिल में अल्लाह का अंतर्ज्ञान और उसकी तौहीद (एकेश्वरवाद) का बीज अंकुरित होता है। जब वह बड़ा होता है तो कभी उसकी आत्मा में वह बीज अंकुरित ही रहता है और कभी वह अपने माता-पिता के कोरे अनुकरण या दूसरे कारणों से इस्लाम के अलावा दूसरे धर्म में दाखिल हो जाता है। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इस वास्तविकता को स्पष्ट करते हुए फ़रमाया हैः (प्रत्येक पैदा होने वाला शिशु फितरत (इस्लाम) पर जन्म लेता है, फिर उसके माता-पिता उसे यहूदी बना देते हैं या ईसाई बना देते हैं या मजूसी बना देते हैं।) महान इस्लाम धर्म…
हर इंसान इस हाल में पैदा होता है कि उसकी आत्मा और दिल में अल्लाह का अंतर्ज्ञान और उसकी तौहीद (एकेश्वरवाद) का बीज अंकुरित होता है। जब वह बड़ा होता है तो कभी उसकी आत्मा में वह बीज अंकुरित ही रहता है और कभी वह अपने माता-पिता के कोरे अनुकरण या दूसरे कारणों से इस्लाम के अलावा दूसरे धर्म में दाखिल हो जाता है। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इस वास्तविकता को स्पष्ट करते हुए फ़रमाया हैः(प्रत्येक पैदा होने वाला शिशु फितरत (इस्लाम) पर जन्म लेता है, फिर उसके माता-पिता उसे यहूदी बना देते हैं या ईसाई बना देते हैं या मजूसी बना देते हैं।)
महान इस्लाम धर्म उस प्रकृति से पूरी तरह मेल खाता है, जिसपर इंसान को पैदा किया गया है। इसलिए सच्चाई यही है कि वही प्राकृतिक धर्म है। इसकी दलीलें निम्नवत हैंः
1- अल्लाह का एकत्व (तौहीद)
एक अल्लाह जिसे पूरा कमाल हासिल है, जो रचयिता है, रोजी दाता है, अमर है, जिसको कभी मौत नहीं आने वाली है, उसीकी इबादत व बंदगी अविकृत प्रवृत्ति से पूरी तरह मेल खाती है।अगर इंसान और उसके सोच-विचार को उसकी हालत पर छोड़ दिया जाए और उसे किसी भ्रष्ट आस्था का प्रबोधन न कराया जाए तो वह अपनी प्रवृत्ति के प्रकाश में एकेश्वरवाद के मार्ग पर ही चलेगा। अल्लाह तआला ने फ़रमाया हैः(उस फ़ितरत पर, जिसपर अल्लाह ने लोगों को पैदा किया है। अल्लाह की रचना में कोई बदलाव नहीं हो सकता। यही सीधा धर्म है, लेकिन अधिकांश लोग नहीं जानते।)सूरा रूम: 30
2- भलाई से प्रेम और बुराई से घृणाः
मनुष्य की प्रवृत्ति में भलाई से प्रेम और बुराई से घृणा मौजूद है। इसीलिए आप देखते हैं कि जब वह कोई धर्मार्थ कार्य, जैसे गरीबों में मानवीय सहायता का वितरण, करता है तो वह बेहद खुश होता है और उसके ज़मीर को सुकून हासिल होता है।
इस के विपरीत उसका अंतर्मन उसे झंझोड़ता है जब वह कोई बुरा काम, जैसे दूसरे पर अत्याचार, करता है, क्योंकि उसकी जन्मजात प्रवृत्ति बुरे काम से मेल नहीं खाती है।
और दूसरा धर्म जो गंदगी का आदेश देता हो।तो वह दोनों में से किसे चुनेगा?
बेशक वह अपनी अविकृत प्रवृत्ति के कारण उसी धर्म को चुनेगा जो सफाई का आदेश देता है और इस्लाम सफाई पर उभारता है। अल्लाह तआला का फ़रमान हैः(निस्संदेह, अल्लाह तौबा करने वालों और सफाई रखने वालों से प्रेम करता है।)सूरा अल-बक़रा: 222और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया है:(पाँच चीज़ें फ़ितरत का हिस्सा हैंः ख़तना करना, शर्मगाह के आस-पास के बाल साफ़ करना, मूँछें कतरना, नाखून काटना और बगल के बाल उखाड़ना।)
5- विवाहः
दोनों में से कौनसी चीज़ प्रवृत्ति से ज्यादा करीब हैः नर-नारी के दरमियान विवाह या विवाह से बाहर का रिश्ता या समलैंगिक विवाह?
अगर इंसान बाहरी प्रभाव एवं दबाव से मुक्त रहे जो उसके इरादे और अख़्तियार को प्रभावित करते हैं तो वह निस्संदेह इस्लाम को ही चुनेगा, क्योंकि यह प्राकृतिक धर्म है जो विवेक और आत्मा के अनुकूल है।
इस्लाम एक प्रवृत्तिक, तार्किक एवं कल्याणकारी धर्म है।
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इस्लाम एक प्रवृत्तिक, तार्किक एवं कल्याणकारी धर्म है।
यह पुस्तक दर्शाती है कि इस्लाम स्वाभाविक प्रवृत्ति और विवेक के अनुरूप है और दुनिया एवं आख़िरत (लोक-परलोक) में ख़ुशी प्राप्त करने का मार्ग प्रस्तुत करती है। यह स्पष्ट करती है कि सृष्टि का उद्देश्य अल्लाह पर ईमान और केवल उसी एक की इबादत करना है, और यह पुष्टि करती है कि नेक अमल (सदाचार) और ईमान ही लोगों के बीच श्रेष्ठता का आधार हैं।
भाषाः अरबी शायद आप सोच रहे होंगे कि हर जगह फैल रहे इस धर्म रहस्य क्या है? इसकी हकीकत क्या है? वह क्या है जिसके कारण लोग पूरे प्रेम और संतुष्टि के साथ उसकी ओर आकर्षित होते जा रहे हैं? जवाब यह है कि यह अल्लाह का ऐसा धर्म है जो इंसान की प्रकृति से पूरी तरह मेल खाता है और उसकी सभी आध्यात्मिक एवं शारीरिक जरूरतों की पूर्ति करता है। इस्लाम, सम्पूर्ण ब्रह्मांड के रब अल्लाह के सामने पूरी तरह झुक जाने, उसके आदेशों के सामने नतमस्तक हो जाने तथा उसने जिस बात से रोका है, उससे दूर रहने का नाम है। यही वह धर्म है जिसे अल्लाह तआला ने सारे मनुष्यों के लिए, उनके बीच जातियों, रंगों और भाषाओं के अंतर्भेदों को परे…
इस्लाम, अल्लाह जो ब्रह्माण्ड का निर्माता और प्रबंधक है उसके प्रति समर्पण, तथा प्रेम एवं श्रद्धा के साथ उसके आगे झुकने का नाम है, इस्लाम का आधार अल्लाह पर ईमान (विश्वास) रखने पर है, और यह आस्था रखना कि वही ख़ालिक़ (रचयिता, सृष्टिकर्ता) है तथा उसके सिवा सभी मख़लूक़ (रचना, सृष्टि) हैं, वह अकेला ही पूजा के योग्य है, उसका कोई साझी नहीं है, उसके अतिरिक्त कोई भी वास्तव में पूजा करने योग्य नहीं है, उसके लिए सबसे सुंदर नाम और उच्चतम गुण हैं, तथा उसके लिए बिना किसी कमी के कमाल -ए- मुत़लक़ (वृहद पूर्णता) है, उसने न तो किसी को जन्म दिया है और न ही उसका जन्म हुआ है और न ही कोई उसके बराबर एवं समान है, और…
अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ, जो बड़ा दयालु एवं अत्यंत दयावान है। तुम्हारा पालनहार कौन है? यह इस संसार का सबसे बड़ा प्रश्न है। यह सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है, जिसका उत्तर हर व्यक्ति को जानना चाहिए। हमारा पालनहार वही है, जिसने आकाशों एवं धरती को पैदा किया, आकाश से बारिश बरसाई एवं उससे फल एवं पौधे उगाए, ताकि हमें तथा उन जानवरों को भोजन प्राप्त हो, जिनसे हम खुराक हासिल करते हैं। उसी ने हमें पैदा किया, हमारे पूर्वजों को पैदा किया और इस संसार की सारी चीज़ों को पैदा किया। उसी ने रात और दिन बनाया। उसी ने रात को सोने और आराम करने तथा दिन को रोज़ी कमाने का समय बनाया। उसी ने सूरज, चाँद, सितारों और…