أدعية جامعة
सारगर्भित दुआएँ[1] ये कुछ सारगर्भित दुआएँ हैं, जो क़ुरआन करीम में आई हैं या फिर नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से सही तौर पर साबित हैं। इन दुआओं को हर समय और स्थान पर पढ़ा जा सकता है, जिनमें तवाफ़, सई, अरफ़ा और मुज़दलिफ़ा शामिल हैं, लेकिन ये दुआएँ केवल इन्हीं समयों एवं स्थानों के साथ ख़ास नहीं हैं।
सारगर्भित दुआएँ[1] ये कुछ सारगर्भित दुआएँ हैं, जो क़ुरआन करीम में आई हैं या फिर नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से सही तौर पर साबित हैं। इन दुआओं को हर समय और स्थान पर पढ़ा जा सकता है, जिनमें तवाफ़, सई, अरफ़ा और मुज़दलिफ़ा शामिल हैं, लेकिन ये दुआएँ केवल इन्हीं समयों एवं स्थानों के साथ ख़ास नहीं हैं।
1- क़ुरआन से ली गईं दुआएँ
ऐ हमारे पालनहार! हमसे स्वीकार कर ले। निःसंदेह तू ही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। तथा हमारी तौबा क़बूल फरमा। निःसंदेह तू बहुत तौबा क़बूल करने वाला, अत्यंत दयावान है।
ऐ हमारे पालनहार! हमें दुनिया में भलाई तथा आख़िरत में भी भलाई दे और हमें आग के अज़ाब से बचा।
ऐ हमारे पालनहार! हमारी पकड़ न कर यदि हम भूल जाएँ या हमसे चूक हो जाए।
ऐ हमारे पालनहार! और हमपर कोई भारी बोझ न डाल, जैसे तूने उन लोगों पर डाला जो हमसे पहले थे।
ऐ हमारे पालनहार! और हमपर ऐसा बोझ न डाल जिसकी हम में शक्ति न हो। तथा हमें माफ़ कर और हमें क्षमा कर दे और हमपर दया कर। तू ही हमारा स्वामी (संरक्षक) है, इसलिए काफ़िरों पर हमें विजय प्रदान कर।
ऐ हमारे पालनहार! हमें हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को टेढ़ा न कर और हमें अपनी ओर से दया प्रदान कर। निःसंदेह तू सबसे बड़ा दाता है।
ऐ हमारे पालनहार! निःसंदेह हम ईमान लाए। इसलिए हमारे गुनाह माफ़ कर दे और हमें दोज़ख़ के अज़ाब से बचा।
ऐ मेरे पालनहार! मुझे अपनी ओर से एक पवित्र संतान प्रदान कर। निःसंदेह तू प्रार्थना को सुनने वाला है।
ऐ हमारे पालनहार! हम उसपर ईमान लाए, जो तूने उतारा और हमने रसूल का अनुसरण किया, अतः तू हमें गवाही देने वालों में लिख ले।
ऐ हमारे पालनहार! हमारे पापों को और हमारे मामले में हमसे होने वाली अति (ज़्यादती) को क्षमा कर दे। तथा हमारे पैरों को जमाए रख और काफ़िर क़ौम पर हमें विजय प्रदान कर।
ऐ हमारे पालनहार! तूने यह सब कुछ बेकार नहीं रचा है, हम तेरी पवित्रता को बयान करते हैं, अतः हमें आग के अज़ाब से बचा ले।
ऐ हमारे पालनहार! तूने जिसे नरक में डाल दिया, वास्तव में तूने उसे अपमानित कर दिया। और ज़ालिमों का कोई सहायक नहीं है।
ऐ हमारे पालनहार! हमने एक पुकारने वाले को ईमान की ओर बुलाते हुए सुना कि अपने पालनहार पर ईमान लाओ, तो हम ईमान ले आए। ऐ हमारे पालनहार! तो अब तू हमारे पापों को क्षमा कर दे तथा हमारी बुराइयों को हमसे दूर कर दे और हमें सदाचारियों के साथ मृत्यु दे।
ऐ हमारे पालनहार! और हमें वह चीज़ प्रदान कर जिसका तूने अपने रसूलों के द्वारा हमसे वादा किया है तथा क़यामत के दिन हमें अपमानित न कर। वास्तव में तू अपने वादे के विरुद्ध नहीं करता है।
ऐ हमारे पालनहार! हमने अपने आपपर अत्याचार किया है। और यदि तूने हमें क्षमा न किया तथा हमपर दया न की, तो निश्चय हम अवश्य घाटा उठाने वालों में से हो जाएँगे।
ऐ हमारे पालनहार! हमें अत्याचारी लोगों में सम्मिलित न करना।
मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है। उसके सिवा कोई वास्तविक पूज्य नहीं, मैंने उसी पर भरोसा किया है और वही बड़े अर्श का रब है।
ऐ हमारे पालनहार! हमें अत्याचारी लोगों के लिए आज़माइश न बना और अपनी दया से हमें काफ़िर लोगों से मुक्ति प्रदान कर।
ऐ मेरे पालनहार! इस नगर (मक्का) को शांति एवं सुरक्षा वाला बना दे, तथा मुझे और मेरे बेटों को मूर्तियों की पूजा करने से बचा ले।
मेरे पालनहार! मुझे नमाज़ क़ायम करने वाला बना तथा मेरी संतान में से भी। ऐ हमारे पालनहार! और मेरी दुआ स्वीकार कर।
ऐ हमारे पालनहार! मुझे क्षमा कर दे तथा मेरे माता-पिता को और ईमान वालों को, जिस दिन हिसाब लिया जाएगा।
ऐ हमारे पालनहार! हमें अपने पास से दया प्रदान कर और हमारे लिए हमारे मामले में मार्गदर्शन (सीधे रास्ते पर चलने) को आसान कर दे।
ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए मेरा सीना खोल दे और मेरे लिए मेरा काम आसान कर दे।
ऐ मेरे पालनहार! मुझे ज्ञान में बढ़ा दे।
तेरे सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है। तू पवित्र है। निश्चय मैं ही अत्याचारियों में हो गया।
ऐ मेरे पालनहार! मुझे अकेला मत छोड़ और तू सब वारिसों से बेहतर है।
ऐ मेरे पालनहार! मैं शैतानों की उकसाहटों से तेरी शरण चाहता हूँ और मैं तेरी शरण चाहता हूँ, ऐ मेरे पालनहार, इस बात से कि वे मेरे पास आएँ।
ऐ हमारे पालनहार! हम ईमान ले आए। अतः तू हमें क्षमा कर दे और हमपर दया कर। और तू सब दया करने वालों से बेहतर है।
ऐ मेरे पालनहार! क्षमा कर दे और दया कर, और तू सब दया करने वालों में सबसे अधिक दया करने वाला है।
ऐ हमारे पालनहार! हमसे जहन्नम की यातना को हटा दे। निःसंदेह उसकी यातना चिमट जाने वाली है। निःसंदेह वह ठहरने और निवास करने के लिए अत्यंत बुरी है।
ऐ हमारे पालनहार! हमें हमारी पत्नियों तथा संतानों से आँखों की ठंडक प्रदान कर और हमें परहेज़गारों का 'इमाम' बना दे।
ऐ मेरे पालनहार! मुझे सामर्थ्य प्रदान कर कि मैं तेरी उस नेमत का शुक्र अदा करूँ, जो तूने मुझे तथा मेरे माता-पिता को प्रदान की है, और यह कि मैं अच्छा कार्य करूँ, जिसे तू पसंद करे और मुझे अपनी दया से अपने सदाचारी बंदों में शामिल कर ले।
ऐ मेरे पालनहार! निश्चय ही मैंने अपने ऊपर अत्याचार किया है, अतः मुझे क्षमा कर दे।
ऐ मेरे पालनहार! मुझे इन ज़ालिम लोगों से बचा ले।
आशा है कि मेरा पालनहार मुझे सीधे मार्ग पर ले जाए।
ऐ मेरे पालनहार! निःसंदेह मैं, जो भलाई भी तू मुझपर उतार दे, मैं उसका मोहताज हूँ।
ऐ मेरे पालनहार! मुझे एक सदाचारी पुत्र प्रदान कर।
ऐ मेरे पालनहार! मुझे सामर्थ्य प्रदान कर कि मैं तेरी उस अनुकंपा के लिए आभार प्रकट करूँ, जो तूने मुझपर और मेरे माता-पिता पर उपकार किए हैं। तथा यह कि मैं वह सत्कर्म करूँ, जिसे तू पसंद करता है तथा मेरे लिए मेरी संतान को सुधार दे। निःसंदेह मैं तेरी ओर लौट आया तथा निःसंदेह मैं आज्ञाकारियों में से हूँ।
ऐ हमारे पालनहार! हमने तुझी पर भरोसा किया और तेरी ही ओर लौटे और तेरी ही ओर लौटकर आना है।
ऐ हमारे पालनहार! हमें और हमारे उन भाइयों को क्षमा कर दे, जो हमसे पहले ईमान लाए और हमारे दिलों में उन लोगों के लिए कोई द्वेष न रख, जो ईमान लाए। ऐ हमारे पालनहार! तू अति करुणामय अत्यंत दयावान है।
ऐ हमारे पालनहार! हमें काफ़िरों के लिए परीक्षण न बना और ऐ हमारे पालनहार! हमें क्षमा कर दे, निश्चय तू ही प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
ऐ हमारे पालनहार! हमारे लिए हमारे प्रकाश को पूर्ण कर दे तथा हमें क्षमा कर दे। निःसंदेह तू हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
2- सुुन्नत से प्रमाणित दुआएँ
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण माँगता हूँ आग के फ़ितने और आग की यातना से, क़ब्र के फ़ितने और क़ब्र की यातना से, धन के फ़ितने की बुराई से और गरीबी के फ़ितने की बुराई से।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण माँगता हूँ मसीह दज्जाल के फ़ितने से।
ऐ अल्लाह! मेरे दिल को बर्फ और ओले के पानी से धो दे, और मेरे दिल को पापों से ऐसे साफ कर दे जैसे तूने सफेद कपड़े को मैल-कुचैल से साफ किया है। और मेरे तथा मेरे पापों के बीच उतनी दूरी पैदा कर दे, जितनी दूरी तूने पूरब और पश्चिम के बीच रखी है।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण में आता हूँ आलस्य, बुढ़ापे, पाप और क़र्ज़ के बोझ से।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण में आता हूँ विवशता, आलस्य, कायरता, बुढ़ापे तथा कंजूसी से। मैं तेरी शरण में आता हूँ क़ब्र की यातना से और जीवन तथा मृत्यु के फ़ितने की बुराई से।
ऐ अल्लाह! मैं आपदा के कष्ट, दुर्भाग्य के शिकार होने, बुरे भाग्य (तक़दीर) और दुश्मनों के खुश होने से तेरी शरण माँगता हूँ।
ऐ अल्लाह! मेरे लिए मेरे धर्म को सुधार दे, जो कि मेरे मामले का बचाव है और मेरे लिए मेरी दुनिया को सुधार दे, जिसके अंदर मुझे रहना-सहना है, और मेरे लिए मेरी आख़िरत को सुधार दे, जिसकी ओर मुझे लौटना है। मेरे लिए जीवन को प्रत्येक भलाई में वृद्धि का कारण बना दे तथा मृत्यु को मेरे लिए प्रत्येक बुराई से मुक्ति का कारण बना दे।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे मार्गदर्शन, धर्मनिष्ठता, पवित्राचार और बेनियाज़ी माँगता हूँ।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण में आता हूँ विवशता, आलस्य, कायरता, कंजूसी, बुढ़ापे तथा क़ब्र की यातना से।
ऐ अल्लाह! मेरी आत्मा को उसका तक़वा प्रदान कर और उसे पवित्र कर। तू ही सबसे अच्छा पवित्र करने वाला है। तू ही उसका संरक्षक और स्वामी है।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण चाहता हूँ ऐसे ज्ञान से जो लाभदायक न हो, ऐसे दिल से जो भय न खाता हो, ऐसी आत्मा से जो तृप्त (संतुष्ट) न होती हो और ऐसी दुआ से जो स्वीकार न की जाए।
ऐ अल्लाह! मेरा मार्गदर्शन कर और मुझे सही रास्ते पर चला।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह चाहता हूँ तेरी दी हुई नेमत (अनुग्रह) के समाप्त हो जाने से, तेरी दी हुई आफियत के पलट जाने से, तेरे आकस्मिक अज़ाब से तथा तेरे ग़ज़ब (क्रोध) वाले समस्त कार्यों से।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण माँगता हूँ उन बुरे कर्मों से जो मैंने किए हैं और उन बुरे कर्मों से जो मैंने नहीं किए।
अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, जो महान और सहनशील है। अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, जो महान अर्श (सिंहासन) का रब है। अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, जो आकाशों का रब, धरती का रब और सम्मानित सिंहासन (अर्श) का रब है।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी ही दया की आशा रखता हूँ। अतः मुझे पलक झपकने के बराबर भी मेरे नफ़्स के हवाले न कर और मेरे लिए मेरे सारे मामलों को ठीक कर दे। तेरे अतिरिक्त कोई वास्तविक पूज्य नहीं है।
ऐ अल्लाह! मैं तेरा बंदा और तेरे बंदे का बेटा एवं तेरी बंदी का बेटा हूँ। मेरी पेशानी तेरे हाथ में है। मेरे बारे में तेरा आदेश चलता है। मेरे बारे में तेरा निर्णय न्याय पर आधारित है। मैं तुझसे तेरे हर उस नाम का वास्ता देकर माँगता हूँ, जिससे तूने ख़ुद को नामित किया है, या उसे अपनी किसी सृष्टि को सिखाया है, या उसे अपनी किताब में उतारा है या उसे अपने पास अपने परोक्ष ज्ञान में सुरक्षित कर रखा है, कि क़ुरआन को मेरे दिल का वसंत, मेरे सीने की रोशनी, मेरे दुःख का मोचन और मेरी व्याकुलता को समाप्त करने वाला बना दे।
ऐ अल्लाह! दिलों के फेरने वाले! हमारे दिलों को अपनी आज्ञाकारिता की ओर फेर दे।
ऐ दिलों को पलटने वाले! मेरे दिल को अपने दीन पर जमाए रख।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में आफ़ियत (अच्छी स्थिति) की दुआ करता हूँ।
ऐ अल्लाह! हमारे मामलों के अंत को हर तरह से अच्छा कर दे और हमें दुनिया की रुसवाई से तथा आख़िरत के अज़ाब से बचा।
ऐ मेरे रब! मेरी सहायता कर और मेरे विरुद्ध सहायता न कर, मुझे विजय प्रदान करे और मेरे विरुद्ध विजय प्रदान न कर, मेरे लिए योजना बना और मेरे विरुद्ध योजना न बना, मुझे सन्मार्ग दे और मेरे लिए मार्गदर्शन को सुगम कर दे, और जो मुझपर अत्याचार करे उसपर मुझे विजय प्रदान कर।
मेरे पालनहार! मुझे तेरा अत्यधिक शुक्रगुज़ार, तेरा याद करने वाला, तुझसे डरने वाला, तेरा आज्ञाकारी, तेरी ओर झुकने वाला, अत्यधिक विनम्र और तेरी ओर लौटने वाला बना।
ऐ मेरे रब! मेरी तौबा को स्वीकार कर, मेरे पापों को धो दे, मेरी दुआ को स्वीकार कर, मेरी दलील को मजबूत कर, मेरे दिल को हिदायत दे, मेरी ज़बान को सही कर और मेरे दिल की बुराई को निकाल दे।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण में आता हूँ अपनी सुनने की बुराई से, अपनी दृष्टि की बुराई से, अपनी ज़बान की बुराई से, अपने दिल की बुराई से और अपनी इच्छाओं की बुराई से[2]। मज़हरी कहते हैं : "यानी मेरे वीर्य के हावी होने की बुराई से, ताकि मैं व्यभिचार में न पड़ूँ और हराम चीज़ों को न देखूँ।" क़ूतुल मुग़तज़ी अला जामे अल-तिर्मिज़ी (2/860)
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण माँगता हूँ सफेद चर्म रोग, पागलपन, कुष्ठ रोग[3] और बुरी बीमारियों से। एक प्रसिद्ध बीमारी, जो मांस को खाती और बिखेर देती है। अल्लाह तआला हमें इससे महफूज़ रखे। शर्ह सुनन अबू दाऊद, लेखक : इब्न-ए-रस्लान (7/411)
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण माँगता हूँ बुरे व्यवहार, बुरे कर्मों और बुरी आकांक्षाओं से।
ऐ अल्लाह! निश्चय तू क्षमा करने वाला दयालु है, तुझे क्षमा करना पसंद है, अतः मुझे क्षमा कर दे।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे अच्छे कार्य करने, बुराइयों को छोड़ने तथा निर्धनों से प्यार करने का सामर्थ्य माँगता हूँ, और तुझसे क्षमा और दया की याचना करता हूँ। जब तू किसी समुदाय को फितने में डालना चाहे, तो मुझे उसमें डालने से पहले ही मृत्यु दे दे। मैं तुझसे तेरी मोहब्बत और तुझसे मोहब्बत करने वाले की मोहब्बत और तेरी मोहब्बत से निकट करने वाले कार्य से मोहब्बत माँगता हूँ।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तत्काल तथा देर से मिलने वाली हर प्रकार की भलाई माँगता हूँ, जो मैं जानता हूँ और जो नहीं जानता हूँ। और मैं तत्काल तथा देर से आने वाली हर प्रकार की बुराई से तेरी पनाह चाहता हूँ, जो मैं जानता हूँ और जो नहीं जानता हूँ।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे वह भलाई माँगता हूँ, जो तेरे बंदे और तेरे नबी ने तुझसे माँगी है, और मैं उस बुराई से तेरी शरण चाहता हूँ जिससे तेरे बंदे और तेरे नबी ने शरण माँगी है।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे जन्नत तथा उससे निकट करने वाले कार्य एवं कथन माँगता हूँ, तथा मैं जहन्नम और उससे निकट कर देने वाले कार्य एवं कथन से तेरी शरण चाहता हूँ। और मैं तुझसे आग्रह करता हूँ कि तूने मेरे लिए जो भी फैसला किया है, उसे बेहतर कर दे।
ऐ अल्लाह! जब मैं खड़ा रहूँ तो इस्लाम के द्वारा मेरी सुरक्षा कर, जब मैं बैठा रहूँ तो इस्लाम के द्वारा मेरी सुरक्षा कर और जब मैं सोया रहूँ तो इस्लाम के द्वारा मेरी सुरक्षा कर और मुझपर किसी शत्रु या ईर्ष्यालु को हँसने का अवसर न दे।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे हर वह भलाई माँगता हूँ, जिसके कोषागार तेरे हाथ में हैं और हर उस बुराई से तेरी शरण माँगता हूँ, जिसके कोषागार तेरे हाथ में हैं।
ऐ अल्लाह! तू हमें अपना इतना भय प्रदान कर जो हमारे और तेरी अवज्ञा के बीच आड़ बन जाए, तथा हमें अपने आज्ञापालन का सामर्थ्य प्रदान कर जिसके द्वारा तू हमें अपनी जन्नत तक पहुँचा दे और हमें इतना विश्वास प्रदान कर जिसके द्वारा तू हमारे लिए दुनिया की आपदाओं को आसान कर दे।
ऐ अल्लाह! जब तक तू हमें जीवित रख, हमारे कानों, हमारी आँखों और हमारी शक्तियों से हमें लाभान्वित होने की तौफ़ीक़ प्रदान कर, इन चीज़ों को हमारा वारिस बना, हमारा प्रतिशोध उन लोगों तक सीमित कर दे जो हमपर अत्याचार करने वाले हैं, जो हमसे दुश्मनी करे उसके ख़िलाफ़ हमारी मदद कर, हमारे धर्म के मामले में हमें आपदा से ग्रस्त न कर, दुनिया को हमारा सबसे बड़ा उद्देश्य और हमारे ज्ञान की पराकाष्ठा न बना और किसी ऐसे व्यक्ति को हमपर हावी ना कर जो हम पर दया न करे। अर्थात: हमारी श्रवण और दृष्टि की शक्ति को हमारी अन्य इंद्रियों की कमजोरी के बाद मृत्यु तक बनाए रख। अल-मफ़ातीह फ़ी शर्ह अल-मसाबीह (3/248)
ऐ अल्लाह! मैं कायरता से तेरी शरण माँगता हूँ, मैं कंजूसी से तेरी शरण माँगता हूँ, मैं लाचारी की आयु में लौटाए जाने से तेरी शरण माँगता हूँ, और मैं दुनिया के फ़ितने एवं क़ब्र की यातना से तेरी शरण माँगता हूँ।
ऐ अल्लाह! मेरे पाप, मेरी अज्ञानता, मेरी अपने मामले में ज़्यादती और उस चीज़ को जिसे तू मुझसे अधिक जानता है, क्षमा कर दे। ऐ अल्लाह! मेरी इच्छा से होने वाले पाप, मेरे मज़ाक़ के रूप में होने वाले पाप, मेरी गलती तथा मेरे जान-बूझकर होने वाले पाप को क्षमा कर दे। ये सारे पाप मुझसे हुए हैं।
ऐ अल्लाह! मुझे क्षमा प्रदान कर, मुझपर दया कर, मुझे सत्य का मार्ग दिखा, मुझे हर विपत्ति से सुरक्षित रख और मुझे रोज़ी प्रदान कर।
ऐ अल्लाह! मैंने अपने आप पर बड़ा अत्याचार किया है और तेरे सिवा कोई पापों को क्षमा नहीं कर सकता। इसलिए मुझे अपनी ओर से क्षमा प्रदान कर और मुझपर दया कर। निःसंदेह तू ही क्षमा करने वाला, अति दयालु है।
ऐ अल्लाह! मैंने अपने आपको तेरे सामने समर्पित कर दिया, तुझपर ईमान लाया, तुझपर भरोसा किया, तेरी ओर लौटा और तेरी मदद से दुश्मनों से झगड़ा किया।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी इज़्ज़त की शरण माँगता हूँ, तेरे सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, इस बात से कि तू मुझे गुमराह करे। तू सदा जीवित रहने वाला है, जिसे कभी मौत नहीं आती, जबकि जिन्न और इंसान सब मर जाएँगे।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरी दया को अनिवार्य करने वाली चीज़ें, तेरी क्षमा के साधन[6], हर पाप से सुरक्षा, अधिक से अधिक पुण्य का सामर्थ्य, जन्नत की प्राप्ति और जहन्नम से मुक्ति माँगता हूँ। यानी ऐसे कार्य, कथन और गुण जिनके कारण तेरी दया मुझे प्राप्त होती है। (العزائم) : عزيمة का बहुवचन है। वह काम जिसका आदमी दृढ़ संकल्प कर ले यानी दिल में मज़बूत इरादा कर ले। यानी मैं तुझसे अपने लिए उन गुणों की प्रार्थना करता हूँ जिनके कारण मुझे तेरी माफी प्राप्त हो सके। अल-मफ़ातीह फ़ी शर्ह अल-मसाबीह (2/ 304)
ऐ अल्लाह! मेरे गुनाह माफ़ कर दे, मेरे घर में विस्तार कर दे और मेरी रोज़ी में बरकत दे।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरी कृपा और दया माँगता हूँ, क्योंकि यह सब कुछ तेरे सिवा कोई नहीं रखता।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण चाहता हूँ गिरने से, ढहने से, डूबने से, जलने से। और मैं तेरी शरण चाहता हूँ इस बात से कि शैतान मुझे मृत्यु के समय बहका दे। और मैं तेरी शरण चाहता हूँ इस बात से कि मैं तेरे रास्ते में पीठ दिखाते हुए मरूँ।और मैं तेरी शरण चाहता हूँ इस बात से कि मेरी मृत्यु डसने के कारण हो।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण में आता हूँ भूख से, क्योंकि यह बुरा साथी है, और मैं तेरी शरण में आता हूँ विश्वासघात से, क्योंकि यह बुरी संगति है।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण में आता हूँ विवशता, आलस्य, कायरता, कंजूसी, बुढ़ापे, कठोरता, ग़फ़लत, निर्धनता[7], अपमान और दरिद्रता से। मैं तेरी शरण में आता हूँ ग़रीबी, अविश्वास, अवज्ञा, कलह, निफाक़ (पाखंड), दिखावा और रिया से। मैं तेरी शरण में आता हूँ बहरेपन, गूंगेपन, पागलपन, कुष्ठ रोग, सफ़ेद दाग़ के रोग और बुरी बीमारियों से। العيلة : निर्धनता। अल-मोलिम बि-फ़वाइद मुस्लिम (1/279)
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण में आता हूँ ग़रीबी, कमी और अपमान से, और मैं तेरी शरण में आता हूँ कि मैं अत्याचार करूँ या मुझपर अत्याचार किया जाए।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण माँगता हूँ बुरे पड़ोसी से स्थायी निवास में; क्योंकि यात्रा के दौरान का पड़ोसी तो बदल जाता है।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण में आता हूँ ऐसे दिल से जो भय न खाता हो, ऐसे नफ़्स से जो संतुष्ट न होता हो, ऐसी दुआ से जो सुनी न जाए और ऐसे ज्ञान से जो लाभदायक न हो। ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण चाहता हूँ इन चारों से।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण माँगता हूँ बुरे दिन से, बुरी रात से, बुरे क्षण से, बुरे साथी से और स्थायी निवास में बुरे पड़ोसी से।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे जन्नत मांगता हूँ और आग से तेरी शरण में आता हूँ।
ऐ अल्लाह! मुझे धर्म का गहन ज्ञान प्रदान कर।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण में आता हूँ इस बात से कि जान-बूझकर किसी को तेरा साझी बनाऊँ और तुझसे क्षमा माँगता हूँ उस शिर्क के लिए जो अनजाने में हो जाए।
ऐ अल्लाह! तूने मुझे जो कुछ सिखाया है, उसको मेरे लिए लाभदायक बना दे और मुझे ऐसी चीजें सिखा, जो मुझे फायदा दें और मेरे ज्ञान में वृद्धि फ़रमा।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे लाभकारी ज्ञान, स्वच्छ रोज़ी तथा ग्रहणयोग्य अमल माँगता हूँ।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इस बात के आधार पर कि, तू अकेला और बेनियाज़ है, न तेरी कोई संतान है और न तू किसी की संतान है और न कोई तेरा समकक्ष है, विनती करता हूँ कि मेरे गुनाहों को क्षमा कर दे। निःसंदेह तू बहुत क्षमा करने वाला और दयालु है।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इस आधार पर विनती करता हूँ कि सारी प्रशंसा तेरी है, तेरे सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, तू अकेला है, तेरा कोई साझी नहीं है और तू बड़ा उपकारी एवं दाता है। ऐ आकाशों तथा धरती के रचयिता! ऐ महिमा और परोपकार वाले! ऐ जीवित तथा नित्य स्थायी! मैं तुझसे जन्नत माँगता हूँ और जहन्नम से तेरी शरण माँगता हूँ।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे विनती करता हूँ, इस बात को वासता बना कर कि मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, तू अकेला है, बेनियाज़ है, न तेरी कोई संतान है और न तू किसी की संतान है और न कोई तेरा समकक्ष है।
ऐ मेरे रब! मुझे क्षमा कर दे और मेरी तौबा क़बूल कर ले। निश्चय ही तू बहुत ज़्यादा तौबा क़बूल करने वाला और क्षमा करने वाला है।
ऐ अल्लाह! मैं तेरे ग़ैब की बात जानने तथा सृष्टि पर तेरे सामर्थ्य का वास्ता देकर तुझसे विनती करता हूँ कि मुझे उस समय तक जीवित रख जब तक तेरे ज्ञान के अनुसार जीना मेरे लिए अच्छा हो, तथा उस समय मौत दे दे जब तेरे ज्ञान के अनुसार मर जाना ही मेरे लिए अच्छा हो।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरा प्रत्यक्ष एवं परोक्ष भय माँगता हूँ, शांत तथा क्रोधित स्थिति में सत्य बात कहने का सुयोग माँगता हूँ, दरिद्रता तथा संपन्नता जैसी अवस्थाओं में संतुलन माँगता हूँ, ऐसी नेमत माँगता हूँ जो कभी ख़त्म न हो, आँखों की ऐसी ठंडक माँगता हूँ जिसका सिलसिला कभी न टूटे। मैं तेरा निर्णय सामने आने के बाद उससे संतुष्ट रहने का सुयोग माँगता हूँ, मृत्यु के बाद सुखी जीवन माँगता हूँ, तेरे मुखमंडल को देखने का सौभाग्य माँगता हूँ और तुझसे मिलने की अभिलाषा माँगता हूँ। ऐसी अभिलाषा, जिसमें न विनाशकारी हानि हो और न पथभ्रष्ट कर देने वाला फ़ितना।
ऐ अल्लाह! हमें ईमान की शोभा से सुशोभित कर और हमें सत्य मार्ग पर चलने वाले एवं उसकी तरफ बुलाने वाले बना।
ऐ अल्लाह! मुझे अता कर अपनी मोहब्बत और उसकी मोहब्बत, जिसकी मोहब्बत तेरे नज़दीक मेरे लिए लाभदायक हो।
ऐ अल्लाह! तूने मुझे मेरी पसंद की जो चीज़ें दी हैं, उन्हें अपनी पसंद के कामों का माध्यम बना दे।
ऐ अल्लाह! और तूने मेरी पसंद की जो चीज़ें मुझे नहीं दी हैं अथवा ले ली हैं, उनको कारण बना दे तेरे पसंद की चीज़ें में मेरे लग जाना का।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण में आता हूँ कायरता, कंजूसी, बुरी आयु, सीने के फ़ितने तथा क़ब्र की यातना से।
ऐ अल्लाह! ऐ जिबराईल, मीकाईल तथा इसराफ़ील के रब! मैं आग की गर्मी से तेरी शरण चाहता हूँ और क़ब्र के अज़ाब से तेरी शरण चाहता हूँ।
ऐ अल्लाह! मुझे मेरा सही मार्ग दिखा और मुझे मेरे नफ़्स की बुराई से बचा।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे लाभकारी ज्ञान माँगता हूँ और ऐसे ज्ञान से तेरी शरण चाहता हूँ, जो लाभदायक न हो।
ऐ अल्लाह! सातों आकाशों के रब, धरती के रब, महान सिंहासन के रब, हमारे रब और हर चीज़ के रब, दाने एवं गुठली को फाड़ने वाले[8] और तौरात, इंजील तथा क़ुरआन उतारने वाले! मैं हर उस चीज़ की बुराई से तेरी शरण माँगता हूँ, जिसकी पेशानी को तू पकड़े हुए है। ऐ अल्लाह! तू प्रथम है, अतः तुझसे पहले कोई चीज़ नहीं है तथा तू आख़िर (अंतिम) है, अतः तेरे बाद कोई चीज़ नहीं है, तू ज़ाहिर (प्रत्यक्ष एवं उच्च) है, अतः तेरे ऊपर कोई चीज़ नहीं है और तू बातिन (अप्रत्यक्ष एवं गुप्त) है, अतः तुझसे परे कोई चीज़ नहीं है। तू हमारा क़र्ज़ अदा कर दे और हमें निर्धनता से मुक्ति प्रदान कर। अर्थात दाने को फाड़कर उससे बाली निकालने वाले और गुठली को फाड़कर उससे खजूर का पेड़ निकालने वाले। अल-मुफ़हिम लिमा अशकल मिन तलख़ीस किताब मुस्लिम (7/41)
ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को एक कर दे, हमारे आपसी मामलों को सुधार दे, हमें शांति के मार्ग दिखा, हमें अंधकार से प्रकाश की ओर निकाल दे और हमें खुले तथा छुपे सभी प्रकार के अनैतिक कार्यों एवं फितनों से बचा। हमारे कानों, आँखों, दिलों, पत्नियों और संतानों में बरकत दे। हमारी तौबा क़बूल कर, निःसंदेह तू ही तौबा क़बूल करने वाला, अत्यंत दयालु है। हमें अपनी नेमतों का शुक्रगुज़ार बना, उनपर तेरी प्रशंसा करने वाला बना, उन्हें स्वीकार करने वाला बना और उन्हें हम पर पूर्ण कर।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे सबसे अच्छी याचना, सबसे अच्छी दुआ, सबसे अच्छी सफलता, सबसे अच्छा कार्य, सबसे अच्छा प्रतिफल, सबसे अच्छी ज़िंदगी और सबसे अच्छी मौत माँगता हूँ। मुझे स्थिरता प्रदान कर, मेरे तराज़ू को भारी कर, मेरे ईमान को सुदृढ़ कर, मेरे दर्जे ऊँचे कर, मेरी नमाज़ को स्वीकार कर, मेरी गलतियों को माफ़ कर और मैं तुझसे जन्नत के ऊँचे उच्चतम दर्जे माँगता हूँ।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे भलाई की शुरुआत, उसका अंत, उसकी समग्रता, उसका आरंभ, उसका प्रकट और उसका गुप्त रूप, और जन्नत के उच्चतम दर्जे माँगता हूँ।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे उन चीज़ों की भलाई माँगता हूँ जो मैं लाता हूँ, उन चीज़ों की भलाई जो मैं करता हूँ, उन चीज़ों की भलाई जो मैं अमल करता हूँ, और उन चीज़ों की भलाई माँगता हूँ जो छुपी हैं और जो प्रकट हैं, और जन्नत के उच्चतम दर्जे माँगता हूँ।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे प्रार्थना करता हूँ कि तू मेरी प्रतिष्ठा को ऊँचा कर, मेरे बोझ को हल्का कर, मेरे मामलों को सुधार दे, मेरे दिल को पवित्र कर, मेरे गुप्तांग की रक्षा कर, मेरे दिल को रौशन कर, मेरे पापों को क्षमा कर और मैं तुझसे जन्नत के उच्चतम दर्जे माँगता हूँ।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे प्रार्थना करता हूँ कि तू मेरी आत्मा, मेरी सुनने की शक्ति, मेरी देखने की शक्ति, मेरे प्राण, मेरी सृष्टि, मेरे चरित्र, मेरे परिवार, मेरे जीवन, मेरी मृत्यु और मेरे कार्यों में बरकत दे। मेरी अच्छाइयों को स्वीकार कर और मैं तुझसे जन्नत के उच्चतम दर्जे की प्रार्थना करता हूँ।
ऐ अल्लाह! मुझे बुरे व्यवहार, बुरे कर्मों, बुरी आकांक्षाओं और बुरी बीमारियों से बचा।
ऐ अल्लाह! जो तूने मुझे प्रदान किया है उसमें मुझे संतुष्ट कर दे, और उसमें मेरे लिए बरकत प्रदान कर, और मुझे हर अनुपस्थित चीज़ के (अर्थात: जो मुझे मिला नहीं उसके के बदले) में अच्छी चीज़ प्रदान कर।
ऐ अल्लाह! मुझसे सरल हिसाब लेना।
ऐ अल्लाह! अपने ज़िक्र, शुक्र और अच्छी तरह इबादत करने के संबंध में मेरी मदद फ़रमा।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे ऐसा ईमान माँगता हूँ जो कभी न पलटे, ऐसा सुख माँगता हूँ जो कभी समाप्त न हो और हमेशगी की जन्नत के सबसे ऊँचे स्थान में तेरे नबी मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की संगति माँगता हूँ।
ऐ अल्लाह! मुझे मेरी आत्मा की बुराई से बचा और मेरे मामले में सही निर्णय लेने की क्षमता मुझे प्रदान कर। ऐ अल्लाह! मेरे उन पापों को क्षमा कर जो मैंने छिपाकर किए, जो मैंने दिखाकर किए, जो मैंने अनजाने में किए, जो मैंने जान-बूझकर किए, जिन्हें मैं जानता हूँ और जिन्हें मैं नहीं जानता।
ऐ अल्लाह! क़र्ज़ के बोझ तथा शत्रुओं के हावी होने और दुश्मनों के हँसने से, मैं तेरी पनाह चाहता हूँ।
ऐ अल्लाह! मुझे क्षमा प्रदान कर, मुझे सत्य का मार्ग दिखा, मुझे रोज़ी प्रदान कर, मुझे हर विपत्ति से सुरक्षित रख। मैं क़यामत के दिन की तंगी से अल्लाह की शरण माँगता हूँ।
ऐ अल्लाह! मुझे मेरे सुनने और देखने की शक्तियों से लाभान्वित कर, और इन्हें मेरे (बुढ़ापे में भी) बाक़ी रख, और मेरी मदद कर उन लोगों के ख़िलाफ़ जो मुझ पर अत्याचार करते हैं, और उनसे मेरा प्रतिशोध ले।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे पवित्र जीवन, संतुलित मृत्यु और ऐसा पुनरागमन माँगता हूँ जो न अपमानजनक हो और न ही लज्जाजनक।
ऐ अल्लाह! तूने मेरी शक्ल-सूरत अच्छी बनाई है, तो मेरे अख़लाक़ भी अच्छे बना दे।
ऐ अल्लाह! ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों को क्षमा कर दे।
ऐ अल्लाह! मुझे सुदृढ़ रख और मुझे सत्य मार्ग पर चलने वाला एवं उसकी तरफ बुलाने वाला बना।
ऐ अल्लाह! मुझे वह तत्वज्ञान प्रदान कर जो जिसे भी दिया गया, उसे बहुत अधिक भलाई दे दी गई।
अल्लाह ही बेहतर जानने वाला है। दरूद व सलाम हो हमारे नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर।