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111

المَسَد

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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

تَبَّتۡ يَدَآ أَبِي لَهَبٖ وَتَبَّ مَآ أَغۡنَىٰ عَنۡهُ مَالُهُۥ وَمَا كَسَبَ سَيَصۡلَىٰ نَارٗا ذَاتَ لَهَبٖ وَٱمۡرَأَتُهُۥ حَمَّالَةَ ٱلۡحَطَبِ فِي جِيدِهَا حَبۡلٞ مِّن مَّسَدِۭ

Ayah 1

تَبَّتۡ يَدَآ أَبِي لَهَبٖ وَتَبَّ

हिन्दी

अबू लहब के दोनों हाथ नाश हो जाएँ! और वह (स्वयं) विनष्ट हो गया।[1]

[1] अबू लहब का अर्थ शोला वाला है। वह अति सुंदर और गोरा था। उसका नाम वास्तव में 'अब्दुल उज़्ज़ा' था, अर्थात उज़्ज़ा का भक्त और दास। 'उज़्ज़ा' उनकी एक देवी का नाम था। परंतु वह अबू लहब के नाम से जाना जाता था। इसलिए क़ुरआन ने उसका यही नाम प्रयोग किया है और इसमें उसके नरक की ज्वाला में पड़ने का संकेत भी है।