''एक दूसरे को उपहार दिया करो, इससे परस्पर प्रेम बढ़ेगा।''
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है :
''एक दूसरे को उपहार दिया करो, इससे परस्पर प्रेम बढ़ेगा।''
«تَهَادَوا تَحَابُّوا».
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुसलमानों को अपने मुस्लिम भाई के साथ उपहारों का आदान-प्रदान करने पर उभारा है और यह बताया है कि उपहार, मोहब्बत पैदा करने और दिलों को जोड़ने वाली चीज़ों में से एक है।
उपहार देना मुस्तहब है, क्योंकि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इसका आदेश दिया है।
उपहार मोहब्बत का कारण है।
इन्सान को अपनी क्षमता के अनुसार वह सब कुछ करना चाहिए जिससे उसके और लोगों के बीच प्रेम पैदा हो। चाहे यथासंभव उपहार देना हो, या विनम्रतापूर्ण व्यवहार करना हो, या अच्छी बात कहना हो या प्रसन्न चेहरे से मिलना हो।
अल-सुनन अल-कुबरा: (6/ 169).
अधिक (5)
الأدب المفرد للبخاري (ص:208) (594).
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