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वह वचन, जो हमारे और उनके बीच है, नमाज़ है। जिसने इसे छोड़ दिया, उसने कुफ़्र किया।

बुरैदा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया :

"वह वचन, जो हमारे और उनके बीच है, नमाज़ है। जिसने इसे छोड़ दिया, उसने कुफ़्र किया।"

«إِنَّ الْعَهْدَ الَّذِي بَيْنَنَا وَبَيْنَهُمُ الصَّلَاةُ، فَمَنْ تَرَكَهَا فَقَدْ كَفَرَ».

इसे तिर्मिज़ी, नसई, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
स्पष्टीकरण

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि मुसलमानों और दूसरों अर्थाथ काफ़िरों और मुनाफ़िकों के बीच जो वचन है, वह नमाज़ है। जिसने नमाज़ छोड़ दी, उसने कुफ़्र किया।

शब्दों के अर्थ

...:

हदीस के कुछ फ़ायदे

नमाज़ का महत्व तथा यह कि नमाज़ मोमिन तथा काफ़िर के बीच अंतर करने वाली चीज़ है।

इस्लाम के अहकाम इन्सान के ज़ाहिरी हाल से साबित होंगे, बातिन से नहीं।

समीक्षक

सुनन नसई (1/ 231) (463).

सुनन तिर्मिज़ी (4/ 365) (2621).

सुनन इब्ने माजह (2/ 181) (1079).

मुसनद अह़मद (38/ 20) (22937).

अधिक (2)

فيض القدير (4/ 395).

ذخيرة العقبى في شرح المجتبى (6/ 192) (6/ 193).