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जब तुम सजदा करो, तो अपनी हथेलियों को ज़मीन पर रख दिया करो और अपनी कोहनियों को ऊपर उठाए रखो।

बरा बिन आज़िब रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :

"जब तुम सजदा करो, तो अपनी हथेलियों को ज़मीन पर रख दिया करो और अपनी कोहनियों को ऊपर उठाए रखो।"

«إِذَا سَجَدْتَ، فَضَعْ كَفَّيْكَ وَارْفَعْ مِرْفَقَيْكَ».

इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
स्पष्टीकरण

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि नमाज़ के दौरान सजदे की हालत में दोनों हाथों को किस तरह रखना चाहिए। बताया कि दोनों हथेलियों को ज़मीन पर अच्छे से रख दिया जाए, उंगलियाँ आपस में मिली हुई और क़िबला की ओर हों, दोनों कोहनियाँ ज़मीन से अलग उठी हुई और पहलुओं से हटी हुई हों।

हदीस के कुछ फ़ायदे

(सजदे की हालत में) नमाजी को दोनों हथेलियों को ज़मीन पर रखना वाजिब है। दरअसल दोनों हथेलियाँ सजदे के सात अंगों में से दो अंग हैं।

ज़मीन से दोनों बाज़ुओं को उठाए रखना मुसतहब और उन्हें दरिंदों की तरह फ़ैलाना मकरूह है।

इबादत में फुर्तीलापन, शक्ति और चाहत झलकनी चाहिए।

जब नमाज़ी सजदे के सारे अंगों को ज़मीन पर रख देता है, तो हर अंग इबादत में से अपना हिस्सा पा लेता है।

समीक्षक

सह़ीह़ मुस्लिम (1/ 356) (494).

अधिक (6)

سبل السلام شرح بلوغ المرام.

لمحمد الصنعاني (1/ 273).

توضيح الأحكام مِن بلوغ المرام.

لعبد الله البسام (2/ 235).

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام.

لعبد الله البسام (ص162).