एक आदमी ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा कि इस्लाम का कौन-सा कार्य सबसे अच्छा है? आपने उत्तर दिया : "यह कि तुम खाना खिलाओ और जाने-पहचाने तथा अनजान सबको सलाम करो।
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा से रिवायत है कि
एक आदमी ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा कि इस्लाम का कौन-सा कार्य सबसे अच्छा है? आपने उत्तर दिया : "यह कि तुम खाना खिलाओ और जाने-पहचाने तथा अनजान सबको सलाम करो।"
أَنَّ رَجُلًا سَأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: أَيُّ الإِسْلاَمِ خَيْرٌ؟ قَالَ: «تُطْعِمُ الطَّعَامَ، وَتَقْرَأُ السَّلاَمَ عَلَى مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لَمْ تَعْرِفْ».
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा गया कि इस्लाम का कौन-सा काम सबसे अच्छा है, तो आपने दो कामों का ज़िक्र किया : 1- ग़रीबों को ज़्यादा से ज़्यादा खाना खिलाना। इसमें सदक़ा, भेंट, निमंत्रण और वलीमा सब शामिल है। खाना खिलाने का महत्व उस समय और बढ़ जाता है, जब भुखमरी और महंगाई हो। 2- हर मुसलमान को सलाम करना। चाहे परिचित हो या अपरिचित।
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सहाबा ऐसे कार्यों को जानने के इच्छुक रहा करते थे, जो दुनिया और आख़िरत में लाभदायक हों।
खाना खिलाना और सलाम करना इस्लाम की नज़र में सबसे अच्छे कामों में से दो काम हैं। क्योंकि एक तो यह सवाब के काम हैं और दूसरे इन्सान को हर समय इनकी ज़रूरत रहती है।
इन दोनों में कार्य में एहसान एवं कथन में एहसान दोनों एकत्र हो जाते हैं, जो कि एहसान का सबसे संपूर्ण रूप है।
ये वह काम हैं, जिनका संबंध मुसलमानों के आपसी बर्ताव से है। जबकि कुछ कार्य ऐसे भी हैं, जिनका संबंध बंदे के अपने रब के साथ बर्ताव से है।
सलाम करने में पहल करने की बात मुसलमानों तक सीमित है। काफ़िरों (अधर्मियों) को सलाम करने में पहल नहीं की जाएगी।
सह़ीह़ बुख़ारी (1/ 12) (12).
सह़ीह़ मुस्लिम (1/ 65) (39).
अधिक (4)
بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين.
لسليم الهلالي (1/ 604).
مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح.
لعلي القاري (7/ 2936).
पुस्तकों में उद्धृत
15 पुस्तकें- पवित्र क़ुरआन तथा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत के आलोक में इस्लाम का संक्षिप्त परिचयअब्दुल्लाह बिन अम्र -रज़ियल्लाहु अनहुमा- से रिवायत है कि एक आदमी ने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पूछा कि इस्लाम का कौन-सा कार्य सबसे अच्छा है ? आपने फ़रमाया : "तुम भूखों को खाना खिलाओ और परिचित और अपरिचित हर एक को सलाम करो।"
- हिस़्न अल-मुस्लिम (क़ुरआन एवं हदीस की दुआएँ)حصن المسلم"तुम खाना खिलाओ और सलाम करो। जिसे जानते हो उसे भी और जिसे न जानते हो उसे भी।" [272]
अधिक (13)
- الحديث زاد 4الحديث 4«تُطْعِمُ الطَّعامَ وَتَقْرَأُ السَّلامَ على مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لَمْ تَعْرِفْ».
- الذكر والدعاء والعلاج بالرقي من الكتاب والسنة"تُطِعم الطعام، وتقرأُ السلام على من عرفت ومن لم تعرف" .
- تحفة الأخيار تحفة الأخيار (ببيان جملة نافعة مما ورد في الكتاب والسنة من الأدعية والأذكار)«تُطْعِمُ الطَّعَامَ، وَتَقْرَأُ السَّلَامَ عَلَى مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لَمْ تَعْرِفْ» [90]
- رسالة موجزة عن الإسلام كما جاء في القرآن الكريم والسنة النبوية (مشتملة على الأدلة)رِسَالَةٌُ مُوجَزَةٌُ عَنِ الْإِسْلَامِ كَمَا جَاءَ فِي الْقُرْآنِ الْكَرِيمِ وَالسَّنَةِ النَّبَوِيَّة-مشتملة على الأدلة -للحرمين-«تُطْعِمُ الطَّعَامَ، وَتَقْرَأُ السَّلاَمَ عَلَى مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لَمْ تَعْرِفْ» [54].
- رياض الصالحينرياض الصالحين مع فوائد وهدايات - 3« تُطْعِمُ الطَّعَامَ، وَتَقْرَأُ السَّلامَ عَلىٰ مَنْ عَرَفتَ وَمَن لَمْ تَعْرِفْ ».
- رياض الصالحينرياض الصالحين مع فوائد وهدايات - 5«تُطْعِمُ الطَّعَامَ، وَتَقْرَأُ السَّلامَ عَلىٰ مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لَمْ تَعْرِفْ».
- ما لا يسع أطفال المسلمين جهله«تُطْعِمُ الطَّعَامَ، وَتَقْرَأُ السَّلَامَ عَلَى مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لَمْ تَعْرِفْ»[131].
- مشروع المنهج التعليميمادة الحديث مستوى 1«تُطْعِمُ الطّعامَ، وَتَقْرَأُ السّلامَ عَلَى مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لم تَعْرِفْ»
- مشروع المنهج التعليميمادة الحديث مستوى 1«وَتَقْرَأُ السّلامَ عَلَى مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لم تَعْرِفْ»
- مشروع المنهج التعليميمادة الدعوة«وَتَقْرَأُ السّلامَ عَلَى مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لم تَعْرِفْ»
- نبراس طالب (2)نبراس طالب (2) «تُطْعِمُ الطَّعَامَ، وَتَقْرَأُ السَّلاَمَ عَلَى مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لَمْ تَعْرِفْ»
- نبراس طالب (2)نبراس طالب (2) «تُطْعِمُ الطَّعَامَ، وَتَقْرَأُ السَّلاَمَ عَلَى مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لَمْ تَعْرِفْ»
- نبراس طالب (2)نبراس طالب (2) «تُطْعِمُ الطَّعَامَ، وَتَقْرَأُ السَّلاَمَ عَلَى مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لَمْ تَعْرِفْ».