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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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"जिस दिन भी बंदे सुबह करते हैं, दो फ़रिश्ते उतरते हैं; एक कहता है : ऐ अल्लाह ख़र्च करने वाले को उत्तम प्रतिफल प्रदान कर। जबकि दूसरा कहता है : ऐ अल्लाह, रोकने वाले (कंजूस) का विनाश कर।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
हे अल्लाह के रसूल! साद की माता मृत्यु को प्राप्त हो चुकी है। ऐसे में कौन-सा सदक़ा सर्वश्रेष्ठ है? फ़रमाया : "पानी।" कहते हैं कि उन्होंने एक कुआँ खुदवा दिया और कह दिया कि यह कुआँ साद की माता के लिए है।
सभी सनदों के आधार पर ह़सन इस ह़दीस़ को अबू दावूद, नसई और इब्न-ए-माजह ने रिवायत किया है
''तुममें से हर एक के साथ अल्लाह बात करेगा, इस तरह कि उसके और उसके रब के बीच कोई अनुवादक न होगा। वह अपने दायीं ओर देखेगा तो अपने भेजे हुए अमल को देखेगा और बायीं ओर देखेगा तो अपने आगे भेजे हुए अमल को पाएगा और अपने सामने देखेगा तो आग ही आग पाएगा। आग से डरो, चाहे एक खजूर के टुकड़े द्वारा क्यों न हो।''
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"अमल छह प्रकार के हैं और लोग चार प्रकार के हैं। रही बात छह आमाल की, तो उनमें से दो प्रकार के अमल वाजिब करने वाले हैं, दो प्रकार के अमल बराबर-बराबर हैं, एक प्रकार का अमल ऐसा नेक अमल है कि उसका सवाब दस गुना मिलता है और एक प्रकार का अमल ऐसा नेक अमल है कि उसका सवाब सात सौ गुना मिलता है। जहाँ तक दो वाजिब करने वाले अमल की बात है, तो जो व्यक्ति इस अवस्था में दुनिया से मृत्यु को प्राप्त हुआ कि किसी को अल्लाह का साझी नहीं ठहराया, वह जन्नत में जाएगा और जो इस अवस्था में दुनिया से मृत्यु पाया कि किसी को अल्लाह का साझी ठहराया, वह जहन्नम में जाएगा। जहाँ तक बराबर-बराबर वाले दो अमल की बात है, तो ध्यान में रहे कि जिसने किसी नेकी के काम की इस तरह नीयत कर ली कि उसके दिल ने उसे महसूस किया और अल्लाह ने उसकी नीयत को जाना, तो उसके लिए एक नेकी लिखी जाएगी। इसी तरह जिसने कोई बुरा काम किया, उसके लिए एक गुनाह लिखा जाएगा। पाँचवें प्रकार का अमल यह है कि जिसने कोई नेकी का काम कर लिया, उसे उस नेकी के काम का सवाब दस गुना दिया जाएगा। और छठे प्रकार का अमल यह है कि जिसने अल्लाह के रास्ते में कोई चीज़ खर्च की, उसे इस एक अच्छे काम का सवाब सात सौ गुना मिलेगा। जहाँ तक चार प्रकार के लोगों की बात है, तो कुछ लोग दुनिया में खुशहाल हैं और आख़िरत में कंगाल होंगे, कुछ लोग दुनिया में कंगाल हैं और आख़िरत में खुशहाल होंगे, कुछ लोग दुनिया में भी कंगाल हैं और आख़िरत में भी कंगाल होंगे, जबकि कुछ लोग दुनिया में भी खुशहाल हैं और आख़िरत में भी खुशहाल होंगे।
ह़सन इसे अह़मद ने रिवायत किया है
"अल्लाह फ़रमाता है : ऐ आदम की संतान! व्यय (खर्च) करो, तुमपर व्यय किया जाएगा।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
“सदक़ा करने से किसी का माल कम नहीं होता है, बंदो को क्षमा करने से अल्लाह माफ़ करने वाले के आदर-सम्मान को और बढ़ा देता है और जो व्यक्ति अल्लाह के लिए विनम्रता धारण करता है, अल्लाह उसका स्थान ऊँचा कर देता है।”
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कुछ सहाबा ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा : हे अल्लाह के रसूल, धनवान लोग सवाब (पुण्य) ले गए; वे हमारी तरह नमाज़ पढ़ते हैं, हमारी तरह रोज़ा रखते हैं, और अपनी अतिरिक्त संपत्ति से सदक़ा (दान) करते हैं। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : ‎“‎क्या अल्लाह ने तुम्हारे लिए वह चीज़ें नहीं बनाई हैं, जिनसे तुम सदक़ा कर सकते हो? हर तस्बीह (सुब्हानल्लाह कहना) सदक़ा है, हर तकबीर (अल्लाहु अकबर कहना) सदक़ा है, हर तहमीद (अल्ह़म्दु लिल्लाह कहना) सदक़ा है, हर तहलील (ला इलाहा इल्लल्लाह कहना) सदक़ा है, भलाई का आदेश देना सदक़ा है, बुराई से रोकना सदक़ा है, और तुम्हारे किसी के साथ वैवाहिक संबंध बनाना भी सदक़ा है।‎”‎ सहाबा ने पूछा : हे अल्लाह के रसूल, क्या हम अपनी कामवासना पूरी करते हैं तो उसमें भी सवाब (पुण्य) मिलता है? नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा : “तुम्हारा क्या विचार है यदि वह इस कामवासना को हराम (अवैध) रूप से पूरी करता है, तो क्या उसे इस पर गुनाह नहीं होता? तो इसी तरह, जब वह इस कामवासना को हलाल (वैध) रूप से पूरी करताता है, तो उसे उस पर पुण्य मिलता है।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है