"जिसने हमारे इस धर्म में कोई ऐसी चीज़ पैदा की, जो धर्म का भाग नहीं है, तो वह अमान्य एवं अस्वीकृत है
मोमिनों की माता, उम्म-ए-अब्दुल्लाह आइशा रज़ियल्लाहु अनहा कहती हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है :
"जिसने हमारे इस धर्म में कोई ऐसी चीज़ पैदा की, जो धर्म का भाग नहीं है, तो वह अमान्य एवं अस्वीकृत है।" तथा मुस्लिम की एक रिवायत में है : “जिसने कोई ऐसा कार्य किया, जिसके बारे में हमारा आदेश नहीं है, तो वह ग्रहणयोग्य नहीं है।”
«مَنْ أَحْدَثَ فِي أَمْرِنَا هَذَا مَا لَيْسَ مِنْهُ فَهُوَ رَدٌّ». وَفِي رِوَايَةٍ لِمُسْلِمٍ: «مَنْ عَمِلَ عَمَلًا لَيْسَ عَلَيْهِ أَمْرُنَا فَهُوَ رَدٌّ».
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि जिसने दीन के अंदर कोई नई चीज़ बनाई या ऐसा कोई काम किया, जो क़ुरआन एवं हदीस से प्रमाणित न हो, तो उसे उसी के मुँह पर मार दिया जाएगा और वह अल्लाह के यहाँ क़बूल नहीं किया जाएगा।
इबादतों का आधार क़ुरआन एवं हदीस है। अतः हम अल्लाह की इबादत क़ुरआन एवं हदीस के बताए हुए तरीक़े के मुताबिक़ ही करेंगे। बिदअतों और इबादत के नित-नए रूपों से हर हाल में दूर रहेंगे।
दीन का आधार मत एवं अच्छा लगना नहीं है। इसका आधार अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अनुसरण है।
यह हदीस दीन के संपूर्ण होने की दलील है।
बिदअत हर उस आस्था, कथन या अमल को कहते हैं, जिसे दीन के एक अंग के रूप में बनाया गया हो और वह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आपके सहाबा के ज़माने में मौजूद न रहा हो।
यह हदीस इस्लाम का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रस्तुत करती है। यह दरअसल कर्मों की कसौटी की हैसियत रखती है। जिस तरह जब किसी अमल का उद्देश्य अल्लाह की प्रसन्नता की प्राप्ति न हो, तो करने वाले को उसका कोई सवाब नहीं मिलता, उसी तरह जो अमल अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की शिक्षाओं के अनुसार न किया जाए, उसे करने वाले के मुँह पर मार दिया जाता है।
यह हदीस दीन के नाम पर सामने आने वाली नित-नई तथा ग़लत चीज़ों का खंडन करने के संबंध एक सिद्धांत की हैसियत रखती है।
मना केवल उन नई चीज़ों से किया गया है, जिनका संबंध दीन से हो, उनसे नहीं, जिनका संबंध दुनिया से हो।
सह़ीह़ बुख़ारी (3/ 184) (2697).
सह़ीह़ मुस्लिम (3/ 1343) (1718).
अधिक (5)
التحفة الربانية في شرح الأربعين حديثًا النووية (ص16).
شرح الأربعين النووية.
لابن عثيمين (ص96).
فتح القوي المتين في شرح الأربعين وتتمة الخمسين.
للعباد (ص38).
पुस्तकों में उद्धृत
23 पुस्तकें- हज्ज, उमरा तथा ज़ियारत के अधिकांश मसलों का शोध एवं व्याख्या क़ुरआन एवं हदीस के आलोक मेंالتحقيق والإيضاح لكثير من مسائل الحج والعمرة والزيارة - النسخة المعتمدة"जिसने हमारे इस धर्म में कोई ऐसी चीज़ पैदा की, जो धर्म का भाग नहीं है, तो वह अमान्य एवं अस्वीकृत है।"[30]
- हज्ज, उमरा तथा ज़ियारत के अधिकांश मसलों का शोध एवं व्याख्या क़ुरआन एवं हदीस के आलोक मेंالتحقيق والإيضاح لكثير من مسائل الحج والعمرة والزيارة - النسخة المعتمدة"जिसने हमारे इस धर्म में कोई ऐसी चीज़ पैदा की, जो धर्म का भाग नहीं है, तो वह अमान्य एवं अस्वीकृत है।" [124]
- इस्लाम की श्रेठता"जिसने हमारे इस धर्म में कोई ऐसी चीज़ पैदा की, जो धर्म का भाग नहीं है, तो वह अमान्य एवं अस्वीकृत है।" [3]
अधिक (20)
- حراسة التوحيدإقامة البراهين على حكم من استغاث بغير الله«مَنْ أَحْدَثَ فِي أَمْرِنَا هَذَا مَا لَيْسَ مِنْهُ فَهُوَ رَدٌّ».
- حراسة التوحيدالتحذير من البدع«مَنْ أَحْدَثَ فِي أَمْرِنَا هَذَا مَا لَيْسَ مِنهُ فَهُوَ رَدٌّ».
- حراسة التوحيدالتحذير من البدع«مَنْ أَحْدَثَ فِي أَمْرِنَا هَذَا مَا لَيْسَ مِنْهُ فَهُوَ رَدٌّ».
- خذ عقيدتك من الكتاب والسنة الصحيحة«من أحدث في أمرنا هذا ما ليس منه فهو رَدٌّ»
- رياض الصالحينرياض الصالحين مع فوائد وهدايات - 1 «مَنْ أَحْدَثَ في أَمْرِنا هَذَا مَا لَيْسَ مِنْهُ فَهُوَ رَدّ».
- شرح الأربعين النووية«مَنْ أَحْدَثَ فِي أَمْرِنَا هَذَا مَا لَيْسَ مِنْهُ فَهُوَ رَدٌّ».
- شرح الأصول الثلاثة«مَنْ أَحْدَثَ فِي أَمْرِنَا هَذَا مَا لَيْسَ مِنْهُ فَهُوَ رَدٌّ» [35]
- عقيدة الأئمة الأربعة«مَنْ أَحْدَثَ فِي أَمْرِنَا هَذَا مَا لَيْسَ مِنْهُ فَهُوَ رَدٌّ»
- عقيدة التوحيد(من أحدث في أمرنا هذا ما ليس منه فهو رد)
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- عقيدة التوحيد(من أحدث في أمرنا هذا ما ليس منه فهو رد)
- فهم السلف الصالح للنصوص الشرعية والرد على الشبهات حوله"من أحدث في أمرنا ما ليس منه فهو رد"[2].
- قاموس الكبائر موسوعة الكبائر - المجموعة الأولى«مَنْ أَحْدَثَ فِي أَمْرِنَا هَذَا مَا لَيْسَ مِنْهُ فَهُوَ رَدٌّ» [41].
- قاموس الكبائر«مَنْ أَحْدَثَ فِي أَمْرِنَا هَذَا مَا لَيْسَ مِنْهُ فَهُوَ رَدٌّ» [41].
- كامل الصورة (1و2) لتعزيز اليقين وتثبيت الثوابتكامل الصورة (1,2) لتعزيز اليقين وتثبيت الثوابتمنْ أَحْدَثَ فِي أَمْرِنَا هَذَا مَا لَيْسَ مِنْهُ فَهُوَ رَدٌّ»
- مادة العقيدة الإسلامية(من أحدث في أمرنا هذا ما ليس منه فهو رد)[12].
- مجموعة زاد الفقه (2)الفقه للمستوى الثاني ( مجموعة زاد )«من أحدث في أمرنا هذا ما ليس منه فهو رد».
- مجموعة زاد العقيده (4)العقيدة 4«مَنْ أَحْدَثَ في أَمْرِنا هَذا ما لَيْسَ منْهُ فَهُوَ رَدٌّ».
- مطوية الرقيةالرقية الشرعية - 1" مَن أحدث في أمرنا هذا ما ليس منه فهو رد".
- وثيقة منهج نبراس لمدارس نهاية الأسبوع1"من أحدث في أمرنا هذا ما ليس منه فهو رد"