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القِيَامة /

आयत 2

75 : 2
القِيَامة आयतें 40
सूरह · القِيَامة
हिन्दी · Omari
75 : 2

وَلَآ أُقۡسِمُ بِٱلنَّفۡسِ ٱللَّوَّامَةِ

तथा मैं क़सम खाता हूँ निंदा करने वाली अंतरात्मा की।

Explanation & meanings · 1
  1. मनुष्य की अंतरात्मा की यह विशेषता है कि वह बुराई करने पर उसकी निंदा करती है।