Skip to content
الذَّاريَات /

आयत 18

51 : 18

आयत 18 of الذَّاريَات (51 : 18). This page carries the verse in the Uthmani script with a translation of its meaning, at a stable URL that can be cited on its own.

الذَّاريَات आयतें 60
सूरह · الذَّاريَات
हिन्दी · Omari
51 : 18

وَبِٱلۡأَسۡحَارِ هُمۡ يَسۡتَغۡفِرُونَ

तथा रात्रि की अंतिम घड़ियों में वे क्षमा याचना करते थे।

Explanation & meanings · 1
  1. ह़दीस में है कि अल्लाह प्रत्येक रात में जब तिहाई रात रह जाए, तो संसार के आकाश की ओर उतरता है। और कहता है : है कोई जो मुझे पुकारे, तो मैं उसकी पुकार सुनूँ? है कोई जो माँगे, तो मैं उसे दूँ? है कोई जो मुझ से क्षमा माँगे, तो मैं उसे क्षमा कर दूँ? ( बुख़ारी : 1145, मुस्लिम : 758)