Skip to content
المؤمنُون /

आयत 101

23 : 101
المؤمنُون आयतें 118
सूरह · المؤمنُون
हिन्दी · Omari
23 : 101

فَإِذَا نُفِخَ فِي ٱلصُّورِ فَلَآ أَنسَابَ بَيۡنَهُمۡ يَوۡمَئِذٖ وَلَا يَتَسَآءَلُونَ

फिर जब सूर (नरसिंघा) में फूँक मारी जाएगी, तो उस दिन उनके बीच न कोई रिश्ते-नाते होंगे और न वे एक-दूसरे को पूछेंगे।

Explanation & meanings · 1
  1. अर्थात प्रलय के दिन। उस दिन भय के कारण सबको अपनी चिंता होगी।