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العَصر /

आयत 2

103 : 2
العَصر आयतें 3
सूरह · العَصر
हिन्दी · Omari
103 : 2

إِنَّ ٱلۡإِنسَٰنَ لَفِي خُسۡرٍ

निःसंदेह इनसान घाटे में है।

Explanation & meanings · 1
  1. (1-2) 'अस्र' का अर्थ निचोड़ना है। युग तथा संध्या के समय के भाग के लिए भी इसका प्रयोग होता है। और यहाँ इसका अर्थ युग और दिन का अंतिम समय दोनों लिया जा सकता है। इस युग की गवाही इस बात पर पेश की गई है कि इनसान जब तक ईमान (सत्य विश्वास) के गुणों को नहीं अपनाता, विनाश से सुरक्षित नहीं रह सकता। इसलिए कि इनसान के पास सबसे मूल्यवान पूँजी समय है, जो तेज़ी से गुज़रता है। इसलिए यदि वह परलोक का सामान न करे, तो अवश्य क्षति में पड़ जाएगा।