Skip to content
621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

परिणाम फ़िल्टर करें

621 में से 5 कार्ड

फ़िल्टर हटाएँ

हदीस का दर्जा

मैं एक यात्रा में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ था। मैंने आपके मोज़े उतारने के लिए हाथ बढ़ाए, तो आपने फ़रमाया : "इन्हें रहने दो; क्योंकि मैंने इन्हें वज़ू की हालत में पहने थे।" फिर आपने उनपर मसह किया।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जब तुममें से कोई वज़ू करे और उसके बाद मोज़े पहने, तो उनको पहनकर नमाज़ पढ़े और उनपर मसह करे और चाहे तो उन्हें जुनबी हो जाने के सिवा किसी परिस्थिति में न उतारे।"
स़ह़ीह़ इसे दाराक़ुतनी ने रिवायत किया है
मैं मोज़ों पर मसह के विषय में पूछने के लिए सफ़वान बिन अस्साल मुरादी के पास गया। उन्होंने आने का कारण जानना चाहा तो मैंने बताया कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए आया हूँ। इसपर वह बोले : ज्ञान प्राप्त करने वाले से प्रसन्न होकर फ़रिश्ते उसके सम्मान में अपने पंख बिछा देते हैं। मैंने कहा : मेरे दिल में पेशाब और पाखाने के बाद मोज़ों पर मसह के बारे में संदेह पैदा हो गया है। चूँकि आप नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सहाबा में से हैं, इसलिए आपके पास यह पूछने के लिए आया हूँ कि क्या आपने इस बारे में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कुछ कहते हुए सुना है? कहा : हाँ, आप हमें आदेश देते कि जब हम सफ़र में हों तो तीन दिन और तीन रात पेशाब, पाखाना और नींद के बाद अपने मोज़े न उतारें, मगर जनाबत की बात दूसरी है। मैंने कहा कि क्या आपने नबी को प्रेम के बारे में कुछ कहते सुना है? कहा : हाँ, हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ एक सफ़र में थे। हम आपके पास ही थे कि एक देहाती ने ऊँची आवाज़ में आपसे कहा कि 'ऐ मुहम्मद!' अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने भी उसे उसी जैसी आवाज़ में उत्तर दिया कि 'हाँ, बोलो।' हमने उससे कहा : तेरा बुरा हो, ज़रा धीमी आवाज़ में बात कर ले, तू नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास है और तुझे इससे मना किया गया है। उस देहाती ने कहा : अल्लाह की क़सम! मैं धीमी आवाज़ में बात नहीं करूँगा। देहाती ने कहा : आदमी कुछ लोगों से प्रेम करता है और (कर्म के मामले में) उनके निकट पहुँच नहीं पाता? तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा : आदमी क़यामत के दिन उसी के साथ होगा, जिससे प्रेम करता है। इस तरह, वह हमें हदीस सुनाते गए, यहाँ तक कि उन्होंने पश्चिम की ओर स्थित एक द्वार का ज़िक्र किया, जिसकी चौड़ाई इतनी है कि एक सवार उसकी चौड़ाई में चालीस या सत्तर साल चलता रहे।
स़ह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ मौजूद था। आप एक ऐसी जगह पहुँचे, जहाँ लोग कूड़ा-करकट फेंका करते हैं और आपने खड़े होकर पेशाब किया। मैं ज़रा दूर हटकर खड़ा हो गया, तो फ़रमाया : "करीब आ जाओ।" तब मैं क़रीब आकर आपकी दोनों एड़ियों के पास खड़ा हो गया। इसके बाद आपने वज़ू किया और दोनों मोज़ों पर मसह किया।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
जरीर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने पेशाब किया, फिर वज़ू किया और अपने मोज़ों पर मसह किया, तो उनसे पूछा गया : आप ऐसा करते हैं? उन्होंने कहा : हाँ, मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को देखा है कि आपने पेशाब किया, फिर वज़ू किया और अपने मोज़ों पर मसह किया। आमश ने कहा कि इब्राहीम कहते थे : लोगों को यह हदीस बहुत पसंद थी; क्योंकि जरीर (रज़ियल्लाहु अन्हु) सूरा माइदा के उतरने के बाद इस्लाम लाए थे।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है