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الفَجر /

आयत 17

89 : 17
الفَجر आयतें 30
सूरह · الفَجر
हिन्दी · Omari
89 : 17

كَلَّاۖ بَل لَّا تُكۡرِمُونَ ٱلۡيَتِيمَ

हरगिज़ ऐसा नहीं, बल्कि तुम अनाथ का सम्मान नहीं करते।