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الرَّحمٰن /

आयत 30

55 : 30
الرَّحمٰن आयतें 78
सूरह · الرَّحمٰن
हिन्दी · Omari
55 : 30

فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?