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الرَّحمٰن /

आयत 29

55 : 29

आयत 29 of الرَّحمٰن (55 : 29). This page carries the verse in the Uthmani script with a translation of its meaning, at a stable URL that can be cited on its own.

الرَّحمٰن आयतें 78
सूरह · الرَّحمٰن
हिन्दी · Omari
55 : 29

يَسۡـَٔلُهُۥ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ كُلَّ يَوۡمٍ هُوَ فِي شَأۡنٖ

उसी से माँगता है, जो कोई आकाशों तथा धरती में है। वह प्रतिदिन एक (नए) कार्य में है।

Explanation & meanings · 1
  1. अर्थात वह अपनी उत्पत्ति की आवश्यकताएँ पूरी करता, प्रार्थनाएँ सुनता, सहायता करता, रोगी को निरोग करता, अपनी दया प्रदान करता, तथा अपमान-सम्मान और विजय-प्राजय देता और अनगिनत कार्य करता है।