Skip to content
الرُّوم /

आयत 55

30 : 55
الرُّوم आयतें 60
सूरह · الرُّوم
हिन्दी · Omari
30 : 55

وَيَوۡمَ تَقُومُ ٱلسَّاعَةُ يُقۡسِمُ ٱلۡمُجۡرِمُونَ مَا لَبِثُواْ غَيۡرَ سَاعَةٖۚ كَذَٰلِكَ كَانُواْ يُؤۡفَكُونَ

और जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी, अपराधी क़समें खाएँगें कि वे घड़ी भर से अधिक नहीं ठहरे। इसी तरह वे बहकाए जाते थे।

Explanation & meanings · 1
  1. अर्थात संसार में।