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المُطَففين /

आयत 28

83 : 28
المُطَففين आयतें 36
सूरह · المُطَففين
हिन्दी · Omari
83 : 28

عَيۡنٗا يَشۡرَبُ بِهَا ٱلۡمُقَرَّبُونَ

वह एक स्रोत है, जिससे समीपवर्ती लोग पिएँगे।

Explanation & meanings · 1
  1. (18-28) इन आयतों में बताया गया है कि सदाचारियों के कर्म ऊँचे पत्रों में अंकित किए जा रहे हैं जो फ़रिश्तों के पास सुरक्षित हैं। और वे स्वर्ग में सुख के साथ रहेंगे। "इल्लिय्यीन" से अभिप्राय, जन्नत में एक जगह है। जहाँ पर नेक लोगों के कर्म पत्र तथा प्राण एकत्र किए जाते हैं। वहाँ पर समीपवर्ती फ़रिश्ते उपस्थित रहते हैं।