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عَبَسَ /

आयत 17

80 : 17
عَبَسَ आयतें 42
सूरह · عَبَسَ
हिन्दी · Omari
80 : 17

قُتِلَ ٱلۡإِنسَٰنُ مَآ أَكۡفَرَهُۥ

सर्वनाश हो मनुष्य का, वह कितना कृतघ्न (नाशुक्रा) है।