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النَّبَإ /

आयत 20

78 : 20
النَّبَإ आयतें 40
सूरह · النَّبَإ
हिन्दी · Omari
78 : 20

وَسُيِّرَتِ ٱلۡجِبَالُ فَكَانَتۡ سَرَابًا

और पर्वत चलाए जाएँगे, तो वे मरीचिका बन जाएँगे।

Explanation & meanings · 1
  1. (17-20) इन आयतों में बताया जा रहा है कि निर्णय का दिन अपने निश्चित समय पर आकर रहेगा, उस दिन आकाश तथा धरती में एक बड़ी उथल-पुथल होगी। इसके लिए सूर में एक फूँक मारने की देर है। फिर जिसकी सूचना दी जा रही है तुम्हारे सामने आ जाएगी। तुम्हारे मानने या न मानने का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। और सब अपना ह़िसाब देने के लिए अल्लाह के न्यायालय की ओर चल पड़ेंगे।