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المُلك /

आयत 28

67 : 28
المُلك आयतें 30
सूरह · المُلك
हिन्दी · Omari
67 : 28

قُلۡ أَرَءَيۡتُمۡ إِنۡ أَهۡلَكَنِيَ ٱللَّهُ وَمَن مَّعِيَ أَوۡ رَحِمَنَا فَمَن يُجِيرُ ٱلۡكَٰفِرِينَ مِنۡ عَذَابٍ أَلِيمٖ

आप कह दें : भला बताओ तो सही, यदि अल्लाह मुझे और उनको, जो मेरे साथ हैं, विनष्ट कर दे या हम पर दया करे, तो काफ़िरों को दर्दनाक यातना से कौन शरण देगा?

Explanation & meanings · 1
  1. अर्थात तुम हमारा बुरा तो चाहते हो, परंतु अपनी चिंता नहीं करते।