Skip to content
المَائدة /

आयत 102

5 : 102

आयत 102 of المَائدة (5 : 102). This page carries the verse in the Uthmani script with a translation of its meaning, at a stable URL that can be cited on its own.

المَائدة आयतें 120
सूरह · المَائدة
हिन्दी · Omari
5 : 102

قَدۡ سَأَلَهَا قَوۡمٞ مِّن قَبۡلِكُمۡ ثُمَّ أَصۡبَحُواْ بِهَا كَٰفِرِينَ

निःसंदेह तुमसे पहले कुछ लोगों ने ऐसी ही बातों के बारे में प्रश्न किया, फिर वे इसके कारण काफ़िर हो गए।

Explanation & meanings · 1
  1. अर्थात अपने रसूलों से। आयत का भावार्थ यह है कि धर्म के विषय में कुरेद न करो। जो करना है, अल्लाह ने बता दिया है, और जो नहीं बताया है उसे क्षमा कर दिया है, अतः अपने मन से प्रश्न न करो, अन्यथा धर्म में सुविधा की जगह असुविधा पैदा होगी, और प्रतिबंध अधिक हो जाएँगे, तो फिर तुम उनका पालन न कर सकोगे।