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الزُّخرُف /

आयत 57

43 : 57
الزُّخرُف आयतें 89
सूरह · الزُّخرُف
हिन्दी · Omari
43 : 57

۞ وَلَمَّا ضُرِبَ ٱبۡنُ مَرۡيَمَ مَثَلًا إِذَا قَوۡمُكَ مِنۡهُ يَصِدُّونَ

तथा जब मरयम के पुत्र का उदाहरण दिया गया, तो सहसा आपकी जाति उसपर शोर मचाने लगी।

Explanation & meanings · 1
  1. आयत संख्या 45 में कहा है कि पहले नबियों की शिक्षा पढ़कर देखो कि क्या किसी ने यह आदेश दिया है कि अल्लाह अत्यंत कृपाशील के सिवा दूसरों की इबादत की जाए? इसपर मुश्रिकों ने कहा कि ईसा (अलैहिस्सलाम) की इबादत क्यों की जाती है? क्या हमारे पूज्य उनसे कम हैं?