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النِّسَاء /

आयत 112

4 : 112
النِّسَاء आयतें 176
सूरह · النِّسَاء
हिन्दी · Omari
4 : 112

وَمَن يَكۡسِبۡ خَطِيٓـَٔةً أَوۡ إِثۡمٗا ثُمَّ يَرۡمِ بِهِۦ بَرِيٓـٔٗا فَقَدِ ٱحۡتَمَلَ بُهۡتَٰنٗا وَإِثۡمٗا مُّبِينٗا

और जो व्यक्ति कोई ग़लती अथवा पाप करे, फिर उसका आरोप किसी निर्दोष पर लगा दे, तो उसने मिथ्या दोषारोपण तथा खुले पाप का बोझ उठा लिया।

Explanation & meanings · 1
  1. अर्थात स्वयं पाप करके दूसरे पर आरोप लगाना दोहरा पाप है।