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لُقمَان /

आयत 20

31 : 20

आयत 20 of لُقمَان (31 : 20). This page carries the verse in the Uthmani script with a translation of its meaning, at a stable URL that can be cited on its own.

لُقمَان आयतें 34
सूरह · لُقمَان
हिन्दी · Omari
31 : 20

أَلَمۡ تَرَوۡاْ أَنَّ ٱللَّهَ سَخَّرَ لَكُم مَّا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِ وَأَسۡبَغَ عَلَيۡكُمۡ نِعَمَهُۥ ظَٰهِرَةٗ وَبَاطِنَةٗۗ وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يُجَٰدِلُ فِي ٱللَّهِ بِغَيۡرِ عِلۡمٖ وَلَا هُدٗى وَلَا كِتَٰبٖ مُّنِيرٖ

क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने, जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, सबको तुम्हारे लिए वशीभूत कर दिया है, तथा तुमपर अपनी खुली तथा छिपी नेमतें पूर्ण कर दी हैं?! और कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अल्लाह के विषय में बिना किसी ज्ञान, बिना किसी मार्गदर्शन और बिना किसी रोशन पुस्तक के विवाद करते हैं।

Explanation & meanings · 2
  1. अर्थात तुम्हारी सेवा में लगा रखा है।
  2. अर्थात उसके अस्तित्व और उसके अकेले पूज्य होने के विषय में।