Skip to content
لُقمَان /

आयत 18

31 : 18
لُقمَان आयतें 34
सूरह · لُقمَان
हिन्दी · Omari
31 : 18

وَلَا تُصَعِّرۡ خَدَّكَ لِلنَّاسِ وَلَا تَمۡشِ فِي ٱلۡأَرۡضِ مَرَحًاۖ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخۡتَالٖ فَخُورٖ

और (घमंड के कारण) लोगों से अपना मुँह न फेर और धरती में अकड़कर न चल। निःसंदेह अल्लाह किसी अकड़ने वाले, गर्व करने वाले से प्रेम नहीं करता।

Explanation & meanings · 1
  1. सह़ीह़ ह़दीस में कहा गया है कि : वह व्यक्ति स्वर्ग में नहीं जाएगा जिसके दिल में राई के दाने के बराबर भी अहंकार हो। (मुसनद अहमद : 1/412)