31 : 17
يَٰبُنَيَّ أَقِمِ ٱلصَّلَوٰةَ وَأۡمُرۡ بِٱلۡمَعۡرُوفِ وَٱنۡهَ عَنِ ٱلۡمُنكَرِ وَٱصۡبِرۡ عَلَىٰ مَآ أَصَابَكَۖ إِنَّ ذَٰلِكَ مِنۡ عَزۡمِ ٱلۡأُمُورِ
ऐ मेरे बेटे! नमाज़ क़ायम कर, भलाई का आदेश दे और बुराई से रोक, तथा जो कष्ट तुझे पहुँचे, उसपर धैर्य से काम ले। निश्चय यह अनिवार्य कामों में से है।