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الرُّوم /

आयत 52

30 : 52
الرُّوم आयतें 60
सूरह · الرُّوم
हिन्दी · Omari
30 : 52

فَإِنَّكَ لَا تُسۡمِعُ ٱلۡمَوۡتَىٰ وَلَا تُسۡمِعُ ٱلصُّمَّ ٱلدُّعَآءَ إِذَا وَلَّوۡاْ مُدۡبِرِينَ

निःसंदेह आप मुर्दों को नहीं सुना सकते और न बहरों को (अपनी) पुकार सुना सकते हैं, जब वे पीठ फेरकर लौट जाएँ।

Explanation & meanings · 1
  1. अर्थात जिनकी अंतरात्मा मर चुकी हो और सत्य सुनने के लिए तैयार न हों।