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آل عِمران /

आयत 128

3 : 128
آل عِمران आयतें 200
सूरह · آل عِمران
हिन्दी · Omari
3 : 128

لَيۡسَ لَكَ مِنَ ٱلۡأَمۡرِ شَيۡءٌ أَوۡ يَتُوبَ عَلَيۡهِمۡ أَوۡ يُعَذِّبَهُمۡ فَإِنَّهُمۡ ظَٰلِمُونَ

(ऐ नबी!) इस मामले में आपको कोई अधिकार नहीं, अल्लाह चाहे तो उनकी तौबा क़बूल करे या उन्हें दंड दे, क्योंकि वे अत्याचारी हैं।

Explanation & meanings · 3
  1. नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम फ़ज्र की नमाज़ में रुकूअ के पश्चात यह प्रार्थना करते थे कि हे अल्लाह! अमुक को अपनी दया से दूर कर दे। इसी पर यह आयत उतरी। (सह़ीह़ बुखारी : 4559)
  2. अर्थात उन्हें मार्गदर्शन दे।
  3. यदि वे काफ़िर ही रह जाएँ।