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آل عِمران /

आयत 118

3 : 118

आयत 118 of آل عِمران (3 : 118). This page carries the verse in the Uthmani script with a translation of its meaning, at a stable URL that can be cited on its own.

آل عِمران आयतें 200
सूरह · آل عِمران
हिन्दी · Omari
3 : 118

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَتَّخِذُواْ بِطَانَةٗ مِّن دُونِكُمۡ لَا يَأۡلُونَكُمۡ خَبَالٗا وَدُّواْ مَا عَنِتُّمۡ قَدۡ بَدَتِ ٱلۡبَغۡضَآءُ مِنۡ أَفۡوَٰهِهِمۡ وَمَا تُخۡفِي صُدُورُهُمۡ أَكۡبَرُۚ قَدۡ بَيَّنَّا لَكُمُ ٱلۡأٓيَٰتِۖ إِن كُنتُمۡ تَعۡقِلُونَ

ऐ ईमान वालो! तुम अपनों के सिवा किसी दूसरे को अपना अंतरंग मित्र न बनाओ, वे तुम्हें बर्बाद करने में कोई कमी नहीं करते। उन्हें वही बात भाती है, जिससे तुम्हें कष्ट पहुँचे। उनके मुखों से शत्रुता प्रकट हो चुकी है तथा जो उनके दिल छुपा रखे हैं, वह इससे बढ़कर है। हमने तुम्हारे लिए आयतों का वर्णन कर दिया है, यदि तुम समझबूझ रखते हो।

Explanation & meanings · 1
  1. अर्थात वे ग़ैर मुस्लिम जिनपर तुम को विश्वास नहीं कि वे तुम्हारे लिए किसी प्रकार की अच्छी भावना रखते हों।