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الفُرقَان /

आयत 19

25 : 19

आयत 19 of الفُرقَان (25 : 19). This page carries the verse in the Uthmani script with a translation of its meaning, at a stable URL that can be cited on its own.

الفُرقَان आयतें 77
सूरह · الفُرقَان
हिन्दी · Omari
25 : 19

فَقَدۡ كَذَّبُوكُم بِمَا تَقُولُونَ فَمَا تَسۡتَطِيعُونَ صَرۡفٗا وَلَا نَصۡرٗاۚ وَمَن يَظۡلِم مِّنكُمۡ نُذِقۡهُ عَذَابٗا كَبِيرٗا

तो उन्होंने तुम्हें उस बात में झुठला दिया, जो तुम कहते हो। अतः तुम न किसी तरह (यातना) हटाने की शक्ति रखते हो और न किसी मदद की। और तुममें से जो अत्याचार करेगा, हम उसे बहुत बड़ी यातना चखाएँगे।

Explanation & meanings · 2
  1. यह अल्लाह का कथन है, जो वह मिश्रणवादियों से कहेगा कि तुम्हारे पूज्यों ने स्वयं अपने पूज्य होने को नकार दिया।
  2. अत्याचार से तात्पर्य शिर्क (मिश्रणवाद) है। (सूरत-लुक़मान, आयत : 13)