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طه /

आयत 89

20 : 89
طه आयतें 135
सूरह · طه
हिन्दी · Omari
20 : 89

أَفَلَا يَرَوۡنَ أَلَّا يَرۡجِعُ إِلَيۡهِمۡ قَوۡلٗا وَلَا يَمۡلِكُ لَهُمۡ ضَرّٗا وَلَا نَفۡعٗا

तो क्या वे देखते नहीं कि वह न उनकी किसी बात का उत्तर देता है और न वह उनके किसी नुक़सान का मालिक है और न किसी लाभ का।

Explanation & meanings · 1
  1. फिर वह पूज्य कैसे हो सकता है?