20 : 130
فَٱصۡبِرۡ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحۡ بِحَمۡدِ رَبِّكَ قَبۡلَ طُلُوعِ ٱلشَّمۡسِ وَقَبۡلَ غُرُوبِهَاۖ وَمِنۡ ءَانَآيِٕ ٱلَّيۡلِ فَسَبِّحۡ وَأَطۡرَافَ ٱلنَّهَارِ لَعَلَّكَ تَرۡضَىٰ
अतः जो कुछ वे कहते हैं, उसपर सब्र करें तथा सूर्य उगने से पहले और उसके डूबने से पहले अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता बयान करें, और रात की कुछ घड़ियों में भी पवित्रता बयान करें, और दिन के किनारों में, ताकि आप प्रसन्न हो जाएँ।
Explanation & meanings · 4
- अर्थात फ़ज्र की नमाज में।
- अर्थात अस्र की नमाज़ में।
- अर्थात इशा की नमाज़ में।
- अर्थात ज़ुह्र तथा मग़्रिब की नमाज़ में।