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الإسرَاء /

आयत 30

17 : 30
الإسرَاء आयतें 111
सूरह · الإسرَاء
हिन्दी · Omari
17 : 30

إِنَّ رَبَّكَ يَبۡسُطُ ٱلرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقۡدِرُۚ إِنَّهُۥ كَانَ بِعِبَادِهِۦ خَبِيرَۢا بَصِيرٗا

निःसंदेह आपका पालनहार जिसके लिए चाहता है, रोज़ी विस्तृत कर देता है, और (जिसके लिए चाहता है) तंग कर देता है। निःसंदेह वह अपने बंदों की पूरी ख़बर रखने वाला, सब कुछ देखने वाला है।

Explanation & meanings · 2
  1. अर्थात वह सब की दशा और कौन किसके योग्य है, देखता और जानता है।
  2. ह़दीस में है शिर्क के बाद सबसे बड़ा पाप अपनी संतान को खिलाने के भय से मार डालना है। (बुख़ारी : 4477, मुस्लिम : 86)