Skip to content
المَاعُون /

आयत 4

107 : 4

आयत 4 of المَاعُون (107 : 4). This page carries the verse in the Uthmani script with a translation of its meaning, at a stable URL that can be cited on its own.

المَاعُون आयतें 7
सूरह · المَاعُون
हिन्दी · Omari
107 : 4

فَوَيۡلٞ لِّلۡمُصَلِّينَ

तो विनाश है उन नमाज़ियों के लिए,

Explanation & meanings · 1
  1. इन आयतों में उन मुनाफ़िक़ों की दशा का वर्णन किया गया है, जो ऊपर से मुसलमान हैं परंतु उनके दिलों में परलोक और प्रतिकार का विश्वास नहीं है। इन दोनों प्रकारों के आचरण और स्वभाव को बयान करने से अभिप्राय यह बताना है कि इनसान में सदाचार की भावना परलोक पर विश्वास के बिना उत्पन्न नहीं हो सकती। और इस्लाम परलोक का सह़ीह विश्वास देकर इनसानों में अनाथों और ग़रीबों की सहायता की भावना पैदा करता है और उसे उदार तथा परोपकारी बनाता है।