“संदेह में डालने वाली चीज़ों को छोड़कर संदेह में न डालने वाली चीज़ों को अपनाओ।"
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के नवासे और प्रिय हसन बिन अली बिन अबू तालिब -रज़ियल्लाहु अनहुमा- कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से यह बात याद की है :
“संदेह में डालने वाली चीज़ों को छोड़कर संदेह में न डालने वाली चीज़ों को अपनाओ।"
«دَعْ مَا يَرِيبُك إلَى مَا لَا يَرِيبُكَ».
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ऐसी बातें कहने और ऐसे कार्य करने से दूर रहने का आदेश दिया है, जिनके बारे में संदेह हो कि वो निषिद्ध हैं या नहीं? हलाल हैं या हराम? इन्सान को ऐसी बातें और ऐसे कार्य करने चाहिए, जिनके अच्छे और हलाल होने का विश्वास हो।
मुसलमान पर लाज़िम है कि अपने तमाम मामलात की बुनियाद यक़ीन पर रखे और सूझ-बूझ एवं आगही के साथ दीन पर अमल करे।
संदिग्ध चीज़ों में पड़ने की मनाही।
अगर आप इत्मीनान और सुकून चाहते हैं, तो संदिग्ध चीज़ों से बचें।
अल्लाह सर्वशक्तिमान अपने बन्दों के प्रति दयालु और कृपालु है, क्योंकि उसने उन्हें ऐसे काम करने का आदेश दिया है जो मन और दिल को शांति प्रदान करते हैं और उन्हें ऐसे काम करने से मना किया है जो बेचैनी और भ्रम का कारण बनते हैं।
सुनन नसई (8/ 327) (5711).
सुनन तिर्मिज़ी (4/ 286) (2518).
मुसनद अह़मद (3/ 248) (1723).
अधिक (5)
التحفة الربانية في شرح الأربعين حديثًا النووية.
لإسماعيل الأنصاري (ص29).
شرح الأربعين النووية.
لابن عثيمين (ص153).
فتح القوي المتين في شرح الأربعين وتتمة الخمسين للنووي وابن رجب (ص56).
पुस्तकों में उद्धृत
7 पुस्तकें- हज्ज, उमरा तथा ज़ियारत के अधिकांश मसलों का शोध एवं व्याख्या क़ुरआन एवं हदीस के आलोक मेंالتحقيق والإيضاح لكثير من مسائل الحج والعمرة والزيارة - النسخة المعتمدة"जिस कार्य में तुझे संदेह हो, उसे छोड़कर वह कार्य करो, जिसमें तुझे संदेह न हो।" [43]
- ज़कात एवं रोज़े के संबंध में दो संक्षिप्त पुस्तिकाएंفي فضل صيام رمضان وقيامه "जिस कार्य में तुम्हें संदेह हो, उसे छोड़कर वह कार्य करो, जिसमें तुम्हें संदेह न हो।"
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- الخطب المنبريةموسوعة الخطب المنبرية (القسم الثالث)«دَعْ مَا يَرِيبُكَ إِلَى مَا لَا يَرِيبُكَ»
- رياض الصالحينرياض الصالحين مع فوائد وهدايات - 3«دَعْ مَا يرِيبُكَ إلىٰ مَا لا يرِيبُكَ».
- مجموعة زاد التربية الإسلامية (2)1«دعْ ما يريبُك إلى ما لا يريبُك».
- مجموعة زاد الحديث(2)1قُلْتُ لِلْحَسَنِ بْنِ عَلِيٍّ رضي الله عنهما: مَا حَفِظْتَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ ﷺ ؟ قَالَ: حَفِظْتُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ ﷺ :«دَعْ مَا يَرِيبُكَ إِلَى مَا لَا يَرِيبُكَ»
- مجموعة زاد الحديث(2)1(دَعْ مَا يَرِيبُكَ إِلَى مَا لَا يَرِيبُكَ...)