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عَبَسَ /

आयत 42

80 : 42

आयत 42 of عَبَسَ (80 : 42). This page carries the verse in the Uthmani script with a translation of its meaning, at a stable URL that can be cited on its own.

عَبَسَ आयतें 42
सूरह · عَبَسَ
हिन्दी · Omari
80 : 42

أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡكَفَرَةُ ٱلۡفَجَرَةُ

वही काफ़िर और कुकर्मी लोग हैं।

Explanation & meanings · 1
  1. (33-42) इन आयतों का भावार्थ यह है कि संसार में किसी पर कोई आपदा आती है, तो उसके अपने लोग उसकी सहायता और रक्षा करते हैं। परंतु प्रलय के दिन सबको अपनी-अपनी पड़ी होगी और उसके कर्म ही उसकी रक्षा करेंगे।