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الأنعَام /

आयत 20

6 : 20
الأنعَام आयतें 165
सूरह · الأنعَام
हिन्दी · Omari
6 : 20

ٱلَّذِينَ ءَاتَيۡنَٰهُمُ ٱلۡكِتَٰبَ يَعۡرِفُونَهُۥ كَمَا يَعۡرِفُونَ أَبۡنَآءَهُمُۘ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ فَهُمۡ لَا يُؤۡمِنُونَ

जिन लोगों को हमने पुस्तक प्रदान की, वे उसे उसी प्रकार पहचानते हैं, जैसे वे अपने बेटों को पहचानते हैं। वे लोग जिन्होंने स्वयं को क्षति में डाला, तो वे ईमान नहीं लाते।

Explanation & meanings · 2
  1. अर्थात तौरात तथा इंजील आदि।
  2. अर्थात आपके उन गुणों द्वारा जो उनकी पुस्तकों में वर्णित हैं।