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القَمَر /

आयत 44

54 : 44
القَمَر आयतें 55
सूरह · القَمَر
हिन्दी · Omari
54 : 44

أَمۡ يَقُولُونَ نَحۡنُ جَمِيعٞ مُّنتَصِرٞ

या वे कहते हैं कि हम एक जत्था हैं, जो बदला लेकर रहने वाले हैं?