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المَائدة /

आयत 120

5 : 120

आयत 120 of المَائدة (5 : 120). This page carries the verse in the Uthmani script with a translation of its meaning, at a stable URL that can be cited on its own.

المَائدة आयतें 120
सूरह · المَائدة
हिन्दी · Omari
5 : 120

لِلَّهِ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا فِيهِنَّۚ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرُۢ

आकाशों और धरती तथा जो कुछ उनमें है, उन सबका राज्य अल्लाह ही के लिए है और वह हर चीज़ पर शक्ति रखने वाला है।

Explanation & meanings · 1
  1. आयत 116 से अब तक की आयतों का सारांश यह है कि अल्लाह ने पहले अपने वे पुरस्कार याद दिलाए जो ईसा अलैहिस्सलाम को प्रदान किए। फिर कहा कि सत्य की शिक्षाओं के होते तेरे अनुयायियों ने क्यों तुझे और तेरी माता को पूज्य बना लिया? इसपर ईसा अलैहिस्सलाम कहेंगे कि मैं इससे निर्दोष हूँ। अभिप्राय यह है कि सभी नबियों ने एकेश्वरवाद तथा सत्कर्म की शिक्षा दी। परंतु उनके अनुयायियों ने उन्हीं को पूज्य बना लिया। इस लिए इसका भार अनुयायियों और वे जिसकी पूजा कर रहे हैं, उनपर है। वह स्वयं इससे निर्दोष हैं।