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الأحقَاف /

आयत 28

46 : 28
الأحقَاف आयतें 35
सूरह · الأحقَاف
हिन्दी · Omari
46 : 28

فَلَوۡلَا نَصَرَهُمُ ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ مِن دُونِ ٱللَّهِ قُرۡبَانًا ءَالِهَةَۢۖ بَلۡ ضَلُّواْ عَنۡهُمۡۚ وَذَٰلِكَ إِفۡكُهُمۡ وَمَا كَانُواْ يَفۡتَرُونَ

तो फिर उन लोगों ने उनकी मदद क्यों नहीं की जिन्हें उन्होंने निकटता प्राप्त करने के लिए अल्लाह के सिवा पूज्य बना रखा था? बल्कि वे उनसे गुम हो गए, और यह उनका झूठ था और जो वे मिथ्यारोपण करते थे।

Explanation & meanings · 1
  1. अर्थात अल्लाह के अतिरिक्त को पूज्य बनाना।