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الفُرقَان /

आयत 45

25 : 45
الفُرقَان आयतें 77
सूरह · الفُرقَان
हिन्दी · Omari
25 : 45

أَلَمۡ تَرَ إِلَىٰ رَبِّكَ كَيۡفَ مَدَّ ٱلظِّلَّ وَلَوۡ شَآءَ لَجَعَلَهُۥ سَاكِنٗا ثُمَّ جَعَلۡنَا ٱلشَّمۡسَ عَلَيۡهِ دَلِيلٗا

क्या आपने अपने रब को नहीं देखा कि उसने किस तरह छाया को फैला दिया? और यदि वह चाहता, तो उसे अवश्य स्थिर कर देता। फिर हमने सूर्य को उसका पता बताने वाला बनाया।

Explanation & meanings · 2
  1. अर्थात सदा छाया ही रहती।
  2. अर्थात छाया सूर्य के साथ फैलती तथा सिमटती है। और यह अल्लाह के सामर्थ्य तथा उसके एकमात्र पूज्य होने का प्रामाण है।