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الفُرقَان /

आयत 4

25 : 4
الفُرقَان आयतें 77
सूरह · الفُرقَان
हिन्दी · Omari
25 : 4

وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّآ إِفۡكٌ ٱفۡتَرَىٰهُ وَأَعَانَهُۥ عَلَيۡهِ قَوۡمٌ ءَاخَرُونَۖ فَقَدۡ جَآءُو ظُلۡمٗا وَزُورٗا

तथा काफ़िरों ने कहा : यह तो बस एक झूठ है, जिसे इसने स्वयं गढ़ लिया है और इसपर अन्य लोगों ने उसकी सहायता की है। तो निःसंदेह वे घोर अन्याय और झूठ पर उतर आए हैं।

Explanation & meanings · 2
  1. अर्थात क़ुरआन।
  2. अर्थात मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने।